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July 27 2026 07:50 pm

नेटफ्लिक्स पर नंबर 1 पर ट्रेंड कर रही है तमिल फिल्म 'कॉन सिटी', धोखाधड़ी और सस्पेंस से भरी कहानी को IMDb पर मिली 7.5 रेटिंग

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नई दिल्ली। अगर आप ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर किसी जबरदस्त क्राइम, सस्पेंस और थ्रिलर फिल्म की तलाश में हैं, तो तमिल सिनेमा की नई फिल्म 'कॉन सिटी' (Con City) आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। रिलीज़ होते ही यह फिल्म नेटफ्लिक्स की ट्रेंडिंग लिस्ट में नंबर 1 पर काबिज हो चुकी है। दर्शकों के बीच बेहद पसंद की जा रही इस फिल्म को IMDb पर 7.5 की शानदार रेटिंग मिली है।

फिल्म की कहानी एक ऐसे अनोखे परिवार और गिरोह के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी ज़िंदगी की मुश्किलों से निजात पाने के लिए एक से बढ़कर एक बड़े-बड़े स्कैम (स्कैम और ठगी) को अंजाम देता है।

हर 10 मिनट में बदलती है 'कॉन सिटी' की कहानी

फिल्म 'कॉन सिटी' की सबसे बड़ी खासियत इसका अप्रत्याशित (Unpredictable) स्क्रीनप्ले है। फिल्म शुरू से लेकर अंत तक धोखे, स्कैम और सस्पेंस से भरी हुई है। कहानी में इतने घुमावदार मोड़ हैं कि दर्शक हर 10 मिनट में हैरान रह जाते हैं और आखिरी तक यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि फिल्म का असली विलेन कौन है।

कैसे बनी ठगों की यह अनोखी मंडली? (कहानी के मुख्य मोड़)

फिल्म की कहानी कई जटिल और दिलचस्प परतों में आगे बढ़ती है:

कर्ज में डूबा सरवन: कहानी की शुरुआत सरवन नाम के एक लड़के से होती है, जो भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। हर महीने बैंक की मोटी किस्त और ब्याज देने के बावजूद उसका कर्ज कम होने का नाम नहीं ले रहा। मजबूरी में वह बिजली के बिलों के जमा पैसों में घोटाला करने लगता है।

नकली परिवार और अजीब रिश्ता: सरवन के पास एक परिवार दिखता है—जिसमें उसकी पत्नी, एक 5 साल का बच्चा, उसकी मां और भाई शामिल हैं। हालांकि, पति-पत्नी के बीच एक अजीब सा ठंडा रिश्ता है; वे आपस में बातचीत नहीं करते और सिर्फ अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।

मित्रा की एंट्री और ठगी की दुनिया: कहानी में मित्रा नाम की लड़की की एंट्री होती है, जो शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाती है। प्रेग्नेंसी की खबर सुनते ही उसका बॉयफ्रेंड उसे अकेला छोड़कर भाग जाता है। धोखे की शिकार मित्रा सड़क पर आ जाती है और फिर एक प्रॉपर्टी की मैनेजर बनकर खुद लोगों को ठगना शुरू कर देती है।

इमोशन के नाम पर ठगी (मां-बेटे की जोड़ी): फिल्म में एक मां और उसके बेटे योगी की भी कहानी दिखाई जाती है। मां की बीमारी के नाम पर एक ट्रस्ट के जरिए लोग भारी डोनेशन भेजते हैं। हालांकि बाद में खुलासा होता है कि मां को कोई बीमारी है ही नहीं। बेटा योगी जब पैसे वापस करना चाहता है, तो मां उसे रोक देती है और दोनों लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर ठगी करने लगते हैं।

जब 5 साल का बच्चा हुआ किडनैप और खुला अतीत का पन्ना

कहानी में असली तूफान तब आता है जब सरवन और उनके परिवार का 5 साल का बच्चा अचानक स्कूल से गायब हो जाता है।

CCTV से खुला राज: सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चलता है कि बच्चे को कोई अनजान शख्स नहीं, बल्कि कोई जान-पहचान वाला ही उठाकर ले गया है।

7 साल पुराना फ्लैशबैक: इसके बाद फिल्म 7 साल पीछे जाती है। पता चलता है कि बच्चा चोरी करने वाला शख्स दरअसल एक पुलिस अधिकारी है, जिसे 7 साल पहले ये चारों ठग चकमा देकर भाग निकले थे।

बच्चे का चौंकाने वाला सच: फ्लैशबैक के साथ यह भी बड़ा खुलासा होता है कि किडनैप हुआ बच्चा असल में सरवन का अपना सगा बेटा है ही नहीं! सरवन ने तो बस उसे अपने बच्चे की तरह पाला-पोसा था।

बेटे को बचाने के लिए 'आखिरी ठगी'

बदला लेने पर उतरा पुलिस अधिकारी अब उस बच्चे को सही-सलामत लौटाने के बदले इस गिरोह से एक बहुत बड़ी और मोटी रकम की मांग करता है। बच्चे को बचाने के लिए ये चारों ठग एक बार फिर एकजुट होते हैं और अपने जीवन की सबसे बड़ी और आखिरी ठगी को अंजाम देने के लिए मैदान में उतरते हैं।