होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर क्रैश; पायलट सुरक्षित, ट्रंप का ईरान पर बड़ा दावा
वॉशिंगटन/तेहरान। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के पास से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी सेना का सबसे शक्तिशाली और घातक लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'अपाचे' (Apache Attack Helicopter) एक नियमित उड़ान के दौरान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे के बाद पूरे अमेरिकी सैन्य खेमे में हड़कंप मच गया। हालांकि, एक त्वरित और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान) के जरिए हेलीकॉप्टर के पायलट और चालक दल (क्रू) के सभी सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अमेरिकी समाचार पत्र 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना की पुष्टि की है।
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और इजरायल के बीच चल रहा सीधे सैन्य टकराव एक नाजुक युद्धविराम के मोड़ पर खड़ा है, जिसके चलते इस क्रैश ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। दो सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अपाचे हेलीकॉप्टर के क्रैश होने का सटीक और तकनीकी कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है और इसकी जांच जारी है।
कितना घातक और महंगा है अपाचे हेलीकॉप्टर?
बोइंग AH-64 अपाचे को दुनिया का सबसे एडवांस, घातक और महंगा अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है। युद्ध के मैदान में इसकी मारक क्षमता के कारण इसे 'फ्लाइंग टैंक' (उड़ता हुआ टैंक) भी कहा जाता है।
लागत और तकनीक: अपाचे केवल एक चॉपर नहीं बल्कि हथियारों और रडार का एक उड़ता हुआ किला है। हाल ही में भारतीय सेना ने भी 6 नए AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर्स के लिए बोइंग के साथ लगभग 4,168 करोड़ रुपये की डील की है। इस लिहाज से इसके लेटेस्ट वेरिएंट के एक हेलीकॉप्टर की कीमत करीब 860 करोड़ से 950 करोड़ रुपये के बीच बैठती है, जिसमें इसके अत्याधुनिक सेंसर, रडार, हथियार और पायलटों की ट्रेनिंग का खर्च शामिल होता है।
हथियारों का जखीरा: इसका 'लॉन्गबो रडार' इसे अंधेरे और खराब मौसम में भी सटीक निशाना लगाने में मदद करता है। इसके निचले हिस्से में लगी ऑटोमैटिक गन पायलट के हेलमेट सेंसर से जुड़ी होती है—यानी पायलट जिधर आंख घुमाएगा, यह गन खुद-ब-खुद उधर घूमकर एक मिनट में 600 से 650 राउंड गोलियां दाग सकती है। इसके अलावा, यह अपने साथ 16 'हेलफायर मिसाइलें' (जो भारी टैंकों को तबाह कर सकती हैं) और 76 'हाइड्रा 70' रॉकेट्स ले जाने में सक्षम है।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा: '2 हफ्ते में ईरान पर मिलेगी पूर्ण जीत'
इस सैन्य हादसे और क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान सामने आया है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम के समर्थन में आयोजित एक वर्चुअल फोन रैली (टेली-रैली) के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अगले दो हफ्तों के भीतर ईरान पर 'पूर्ण जीत' हासिल कर लेगा।
सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान के साथ एक नए परमाणु समझौते (Nuclear Deal) की उम्मीद जताते हुए कहा, "हमारी बातचीत चल रही है और वे (ईरान) एक बहुत अच्छी डील करना चाहते हैं। वे हमें सब कुछ देने को तैयार हैं। वे इस बात के लिए भी पूरी तरह राजी हैं कि उनके पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा।"
ट्रंप ने इस संभावित कूटनीतिक सफलता को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि इस डील के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आएगी। वहीं, एनबीसी के 'मीट द प्रेस' कार्यक्रम में ट्रंप ने समझौते में हो रही देरी का बचाव करते हुए इसे ईरान के 'राष्ट्रीय गौरव' से जोड़ा और कहा कि वे एक स्वाभिमानी राष्ट्र हैं, इसलिए बातचीत में थोड़ा समय लग रहा है।
ईरान-इजरायल युद्ध में 'तूफान से पहले की शांति'?
हेलीकॉप्टर क्रैश की इस घटना से ठीक पहले, ईरान और इजरायल के बीच पिछले दिनों हुए भीषण मिसाइल हमलों के बाद स्थिति थोड़ी शांत पड़ती नजर आई है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि तेल अवीव ने ईरान पर अपने सैन्य हमले फिलहाल रोक दिए हैं, हालांकि उन्होंने ट्रंप द्वारा किए जा रहे युद्धविराम के दावों का आधिकारिक तौर पर पूरी तरह समर्थन नहीं किया है।
दूसरी ओर, तेहरान (ईरान) ने भी अपने अभियानों को अस्थायी रूप से थाम दिया है, लेकिन इजरायल को सख्त चेतावनी दी है कि अगर दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले जारी रहे, तो वह अपना आक्रामक मिसाइल अटैक फिर से शुरू कर देगा। इस बेहद अस्थिर माहौल के बीच, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने सीएनएन से बातचीत में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि अगर अमेरिका सच्ची नीयत और भरोसे के साथ आगे बढ़े, तो तेहरान शांति वार्ता और नए समझौते के लिए पूरी तरह तैयार है।