SCO समिट: रूस और पाकिस्तान के बीच अवैध इमिग्रेशन और ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ा समझौता
बिश्केक/इस्लामाबाद। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के गृह और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान एक बड़ा राजनयिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत के सदाबहार मित्र देश रूस ने पाकिस्तान के साथ सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग को लेकर कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अवैध प्रवासन (Illegal Immigration) और नशीले पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक साथ मिलकर साझा मुकाबला करेंगे।
रूस-पाकिस्तान समझौते की ३ मुख्य बातें
बिश्केक में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी है:
अवैध नागरिकों का डिपोर्टेशन: दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां एक-दूसरे के देश में अवैध रूप से छिपे या रह रहे नागरिकों की पहचान करेंगी और एक तय प्रक्रिया के तहत उनकी सुरक्षित वतन वापसी (Deportation) सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगी।
घुसपैठ और मानव तस्करी पर रोक: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय मानव तस्करों और अवैध घुसपैठ के सिंडिकेट्स पर नकेल कसने के लिए दोनों देश खुफिया जानकारी (Intelligence Sharing) साझा करेंगे।
नार्को-टेररिज्म और ड्रग्स पर कड़ा एक्शन: मध्य एशिया और वैश्विक मार्ग से होने वाली मादक पदार्थों की हेराफेरी को रोकने के लिए एक विशेष कार्य योजना तैयार की गई है, जिसके तहत दोनों देशों के सुरक्षा बल ड्रग माफियाओं के खिलाफ संयुक्त ऑपरेशन चलाएंगे।
SCO मंच पर पाकिस्तान का कूटनीतिक संपर्क
इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने रूस के अलावा मध्य एशिया के अन्य प्रमुख देशों के साथ भी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए बैठकें कीं:
| देश | बैठक की मुख्य बातें और निर्णय |
|---|---|
| उज्बेकिस्तान | उज्बेक गृह मंत्री अजीज ताशपुलातो के साथ सुरक्षा बलों की 'जॉइंट ट्रेनिंग' और कानून प्रवर्तन में सहयोग के लिए एक विशेष वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी। |
| कजाकिस्तान | कजाख समकक्ष यर्झान सादेनोव के साथ अवैध इमिग्रेशन की रोकथाम के लिए बॉर्डर मैनेजमेंट को मजबूत करने पर चर्चा हुई। |
| किर्गिस्तान | मेजबान देश के गृह मंत्री उलान नियाजबेकोव से मुलाकात कर सुरक्षा सहयोग के विस्तार पर चर्चा की और किर्गिस्तान को UNSC का गैर-स्थायी सदस्य चुने जाने पर बधाई दी। |
अफगानिस्तान पर रूस का 'डबल गेम' और पाकिस्तान की बढ़ती छटपटाहट
इन समझौतों के समानांतर, क्षेत्र की कूटनीति पर गहरी नजर रखने वाली प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की एक ताजा रिपोर्ट ने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस इस समय अफगानिस्तान और तालिबान को लेकर एक सोची-समझी दोहरी रणनीति (Double Game) पर काम कर रहा है, जो अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के प्रभाव को खत्म कर रही है।
क्या है रूस की दोहरी रणनीति?
सार्वजनिक मंचों पर आतंकवाद का विरोध: रूस वैश्विक मंचों पर लगातार अफगानिस्तान की धरती से पनपने वाले आतंकवाद और आईएसआईएस-के (ISIS-K) के खतरे का मुद्दा उठाता है। ऐसा करके मॉस्को मध्य एशियाई देशों (उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान आदि) में अपनी सुरक्षा भूमिका और रूसी सैन्य उपस्थिति को पूरी तरह सही ठहराता है।
पर्दे के पीछे तालिबान से दोस्ती: सार्वजनिक विरोध के उलट, रूस पर्दे के पीछे तालिबान प्रशासन के साथ अपने रणनीतिक और सुरक्षा संबंधों का तेजी से विस्तार कर रहा है। रूस का लक्ष्य तालिबान को साधकर मध्य एशिया की सीमाओं को सुरक्षित रखना और अमेरिकी प्रभाव को क्षेत्र से दूर रखना है।
रिंगमास्टर से हाशिए पर पहुंचा पाकिस्तान
रूस और तालिबान के बीच बनते इस नए समीकरण ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान के दशकों पुराने दबदबे को पूरी तरह उखाड़ फेंका है। पहले पाकिस्तान खुद को अफगानिस्तान के मामलों में एक 'रिंगमास्टर' या नीति निर्धारक के रूप में देखता था, लेकिन अब काबुल (तालिबान) रूस के साथ सीधे संबंधों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ एक मजबूत कूटनीतिक हथियार (Leverage) के रूप में कर रहा है। तालिबान की इस स्वतंत्र विदेश नीति और रूस की सीधी एंट्री के कारण अफगानिस्तान में पाकिस्तान के लिए रणनीतिक पैंतरेबाजी की गुंजाइश अब लगातार सिकुड़ती जा रही है।