A new hope : 43 साल बाद जेल से निकले भारतीय मूल के वेदम अब डिपोर्टेशन की लड़ाई में
- by Priyanka Tiwari
- 2025-10-31 13:54:00
India News Live,Digital Desk : अमेरिका में एक भारतीय मूल के शख्स की ज़िंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 64 वर्षीय सुब्रमण्यम वेदम, जिन्होंने 43 साल जेल में बिताए, अब एक और कानूनी जंग लड़ रहे हैं — डिपोर्टेशन से बचने की लड़ाई।
1980 में अपने दोस्त थॉमस किनसर की हत्या के आरोप में दोषी ठहराए गए वेदम ने हमेशा अपनी बेगुनाही की बात कही। उनके खिलाफ न तो ठोस गवाह थे, न ही कोई स्पष्ट मकसद। इसके बावजूद उन्हें दो बार उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लेकिन अगस्त 2025 में आखिरकार अदालत ने उनकी सजा को नए सबूतों के आधार पर रद्द कर दिया, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने पहले छिपाया था।
जेल से रिहाई से पहले फिर से हिरासत
जब उनकी बहन 3 अक्टूबर को उन्हें जेल से घर लाने की तैयारी कर रही थी, तभी अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने उन्हें 1999 के डिपोर्टेशन ऑर्डर के तहत हिरासत में ले लिया। अब वेदम को एक बार फिर अदालत में अपनी आज़ादी की दलील देनी होगी।
वकीलों की दलील
वेदम के वकीलों का कहना है कि 1980 के दशक में ड्रग्स के मामूली आरोपों के चलते उन्हें जो सजा मिली थी, उसे उनके लंबे गलत कारावास से ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वेदम ने जेल में रहते हुए खुद को पूरी तरह बदल लिया। उन्होंने कई डिग्रियां हासिल कीं और सैकड़ों कैदियों को पढ़ाया।
“अन्याय का शिकार, लेकिन प्रेरणा बने”
इमिग्रेशन वकील एवा बेनाच कहती हैं — “वेदम एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने गहरा अन्याय सहा है। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जेल में भी दूसरों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने का काम किया।”
वेदम फिलहाल पेंसिलवेनिया के यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट सेंटर में हैं, जहां 1,800 से ज्यादा कैदी रखे जाते हैं। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि अदालत उनके पिछले 43 सालों के संघर्ष और अच्छे व्यवहार को देखकर डिपोर्टेशन रोकने का फैसला करेगी।