यूपी में बनेंगे 49 'हवाई अड्डे' जैसे हाईटेक बस अड्डे; 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी
India News Live,Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। मंत्रिपरिषद ने कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी है, जिनमें परिवहन विभाग का 'कायाकल्प' करने वाला प्रस्ताव सबसे प्रमुख है।
यूपी में अब 'बस पोर्ट' का दौर: 49 हाईटेक बस अड्डों को मंजूरी
योगी सरकार ने प्रदेश के परिवहन ढांचे को पूरी तरह बदलने के लिए पीपीपी (सार्वजनिक-निजी सहभागिता) मॉडल पर 49 नए बस अड्डों के निर्माण को स्वीकृति दी है।
हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, ये बस अड्डे किसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कम नहीं होंगे। यहाँ यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, एयरकंडीशंड वेटिंग लाउंज, गेमिंग ज़ोन और रेस्टोरेंट जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
व्यापक कवरेज: पहले चरण में 23 बस अड्डों पर काम शुरू हो चुका था, अब 49 नए अड्डों के जुड़ जाने से प्रदेश के कुल 52 जिले इस आधुनिक परिवहन नेटवर्क से कवर हो जाएंगे।
जमीन का आवंटन: कैबिनेट ने बस अड्डों के निर्माण के लिए विभिन्न विभागों की खाली पड़ी जमीनों के निशुल्क हस्तांतरण को भी मंजूरी दी है:
हाथरस (सिकंदराराऊ): कृषि विभाग की 2 हेक्टेयर भूमि बस अड्डे के लिए।
बुलंदशहर (डिबाई): सिंचाई विभाग की जमीन का आवंटन।
बलरामपुर (तुलसीपुर): लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन पर बनेगा बस अड्डा।
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले (संक्षेप में)
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को सौगात: शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 और अनुदेशकों का ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 करने के प्रस्ताव को मंजूरी। यह 1 मई से लागू होगा।
मेट्रो विश्वविद्यालय: ग्रेटर नोएडा में 26.1 एकड़ भूमि पर 'मेट्रो विश्वविद्यालय' की स्थापना को हरी झंडी।
स्वास्थ्य और शिक्षा: कई जिलों में नए मेडिकल कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े प्रस्तावों पर सहमति।
इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रदेश के विभिन्न शहरों में जलभराव की समस्या दूर करने और नई सड़कों के निर्माण के लिए बजटीय आवंटन।
क्यों खास है यह पीपीपी मॉडल?
इन बस अड्डों का निर्माण DBFOT (डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण) मॉडल पर होगा। इसका मतलब है कि सरकार का एक भी रुपया खर्च नहीं होगा, बल्कि निजी निवेशक इसे बनाएंगे और 35 से 90 साल की लीज पर संचालित करेंगे। इससे यात्रियों को वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं मिलेंगी और परिवहन निगम को राजस्व का फायदा होगा।