PM मोदी की अपील का असर: SEBI ने अपनाया 'वर्क फ्रॉम होम', ईंधन और ऊर्जा बचत के लिए जारी की नई एडवाइजरी
India News Live,Digital Desk : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार की बचत के लिए की गई अपील का असर अब सरकारी संस्थानों पर दिखने लगा है। शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने कर्मचारियों के लिए नई कार्य-संस्कृति और एडवाइजरी लागू कर दी है।
SEBI का नया रोस्टर और वर्क फ्रॉम होम नीति
पीएम मोदी की सलाह के अनुरूप, सेबी ने अपने ग्रेड 'A' से 'C' तक के अधिकारियों (असिस्टेंट मैनेजर, मैनेजर और असिस्टेंट जनरल मैनेजर) के लिए रोटेशन के आधार पर हफ्ते में एक दिन 'वर्क फ्रॉम होम' की अनुमति दी है। हालांकि, कामकाज की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं:
50% उपस्थिति अनिवार्य: चीफ जनरल मैनेजर और विभाग प्रमुखों को ऐसा रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कम से कम 50 प्रतिशत अधिकारी हर समय कार्यालय में उपस्थित रहें।
किसे नहीं मिलेगा WFH?: ग्रुप 'D' (डिप्टी जनरल मैनेजर) और उससे ऊपर के अधिकारियों, चेयरमैन, पूर्णकालिक सदस्यों के स्टाफ, और सेक्रेटेरियल कैडर के कर्मचारियों (सेक्रेटरी, अकाउंट असिस्टेंट आदि) को नियमित रूप से ऑफिस आना होगा।
गोपनीयता का निर्देश: घर से काम करने वाले अधिकारियों को विशेष रूप से डेटा सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत ऑफिस आने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बैठकों और यात्राओं पर सख्त नियम
ईंधन और ऊर्जा की बचत के लिए सेबी ने केवल वर्क फ्रॉम होम ही नहीं, बल्कि अन्य गतिविधियों में भी कटौती की है:
कार्यक्रमों पर रोक: विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अगले 8 हफ्तों के लिए सभी प्रकार के ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र, आपसी मेलजोल के कार्यक्रम और कॉन्क्लेव को टाल दें। इस अवधि में कोई भी नया कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।
वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा: बेवजह की आवाजाही को कम करने के लिए सेबी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह दी है। बाहरी स्टेकहोल्डर्स के साथ भी अब मीटिंग्स को जहां तक संभव हो, वर्चुअल माध्यम से करने को कहा गया है।
सतत परिवहन का उपयोग: कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे ऑफिस आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग या इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का चुनाव करें।
सेबी के ये कदम न केवल ईंधन की बचत करेंगे, बल्कि बिजली की खपत को कम करने और प्रशासनिक कार्यों को अधिक डिजिटल बनाने में भी मदद करेंगे।