BREAKING:
July 03 2026 04:11 am

25 हजार की नौकरी और ठाठ राजाओं जैसे! राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मियों की चमकी किस्मत; कोई होटल तो कोई बन बैठा हॉस्टल का मालिक

Post

अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी के आरोपों के बीच अब ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिसने पूरी रामनगरी में खलबली मचा दी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ने के बाद कई मामूली वेतनभोगी कर्मचारियों की किस्मत इस कदर चमकी है कि उनका रहन-सहन और जीवन स्तर पूरी तरह राजा-महाराजाओं जैसा हो गया है।

हैरानी की बात यह है कि जिन कर्मचारियों का आधिकारिक वेतन महज 20 से 25 हजार रुपये महीना है, वे आज कई आलीशान गाड़ियों, होटलों और हॉस्टलों के मालिक बन बैठे हैं। अयोध्या में इस समय इन कर्मियों के घरों में होने वाली करोड़ों की आलीशान शादियों और उनके अचानक बदले रसूख की जमकर चर्चा हो रही है।

साइकिल से फॉर्च्यूनर तक का सफर, संतों ने भी उठाए सवाल

कर्मचारियों की इस अचानक बदली माली हालत (आर्थिक स्थिति) पर केवल बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि अयोध्या के प्रतिष्ठित साधु-संत भी सवाल उठा रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्य और मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने पिछले दिनों इन कर्मचारियों के वैभव पर तीखा प्रश्न चिन्ह लगाया था। उन्होंने कहा था कि कुछ साल पहले तक जो लोग साइकिल से चलते थे, आज उनके पास आलीशान बंगले और महंगी चार पहिया गाड़ियां कहां से आ गईं? इस बयान के बाद से स्थानीय स्तर पर इन कर्मचारियों की आय और व्यय को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।

कारसेवकपुरम के पूर्व कर्मी अब चला रहे 12 कमरों का हॉस्टल

जानकारों के मुताबिक, राम मंदिर ट्रस्ट के गठन से पहले जो लोग कारसेवकपुरम में बेहद सामान्य पदों पर काम करते थे, ट्रस्ट बनने के बाद वे मंदिर के रसूखदार कर्मचारी बन गए। देखते ही देखते उनकी आर्थिक स्थिति में भारी उछाल आया।

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के एक प्रभावशाली कर्मचारी ने महज एक वर्ष पहले अयोध्या में 12 कमरों का एक बड़ा हॉस्टल शुरू किया है। इसके अलावा उनके पास तीन लग्जरी चार पहिया वाहन, एक महंगी टू-व्हीलर है और उन्होंने अयोध्या के कई प्राइम लोकेशंस पर जमीनों में मोटा निवेश भी किया है।

बेटे की शाही शादी, डंपर खरीदे और मंदिर परिसर में ही किराए का धंधा

एक अन्य कर्मचारी के बारे में खुलासा हुआ है कि उसने कुछ महीने पहले अपने बेटे का विवाह बेहद आलीशान और वीवीआईपी अंदाज में किया, जिसमें कई रसूखदार लोग शामिल हुए थे। इस शादी का तड़क-भड़क देखकर हर कोई दंग रह गया। इस कर्मचारी ने अपने व्यापार को बढ़ाते हुए हाल ही में भारी-भरकम डंपर भी खरीदे हैं। इतना ही नहीं, कुछ चतुर कर्मचारियों ने महंगी चार पहिया गाड़ियां खरीदकर उन्हें राम मंदिर परिसर के भीतर ही वीआईपी मूवमेंट के लिए किराए (रेंट) पर चला रखा है, जिससे वे दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं।

होटल-ट्रेवल एजेंट नेक्सस: दर्शन और पास के नाम पर पैकेज का खेल

अयोध्या के स्थानीय रसूखदारों ने अपने करीबियों और बेटों को ट्रस्ट का कर्मचारी बनवा रखा है और खुद बैकएंड से होटल व टूरिज्म का बड़ा कारोबार चमका रहे हैं। ये कर्मचारी सीधे ट्रेवल एजेंटों के संपर्क में रहते हैं। बाहर से आने वाले अमीर श्रद्धालुओं को पास बनवाने, आसानी से वीआईपी दर्शन कराने, होटल में रुकवाने और घूमने का एक पूरा 'पेड पैकेज' दिया जाता है। इस अवैध दर्शन-पूजन के खेल से ये कर्मचारी प्रतिदिन हजारों-लाखों रुपये की ऊपरी कमाई कर रहे हैं। हाल ही में पुलिस ने एक ऐसे ही प्रभावशाली कर्मचारी के भतीजे से कड़ी पूछताछ की है, जिसने कुछ ही दिनों पहले लाखों रुपये के सोने के जेवर खरीदे थे।

अफसरों जैसी हनक, प्रतिबंधित क्षेत्र में रील और मोबाइल की दबंगई

परिसर के सूत्रों का दावा है कि इन कर्मचारियों की हनक और रसूख मंदिर परिसर में तैनात बड़े पुलिस अधिकारियों से भी ज्यादा दिखती है। इनके पास चौबीसों घंटे पुलिस का वायरलेस सेट रहता है और सुरक्षाकर्मी भी इनके सामने नतमस्तक रहते हैं।

आम जनता के लिए राम जन्मभूमि परिसर में मोबाइल ले जाना और फोटोग्राफी करना पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन ये रसूखदार कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों को प्रतिबंधित वीआईपी क्षेत्रों में ले जाते हैं। वहां न सिर्फ धड़ल्ले से तस्वीरें खींची जाती हैं, बल्कि रील्स भी बनाई जाती हैं, जो सोशल मीडिया पर साफ देखी जा सकती हैं। सुरक्षा व्यवस्था में इस गंभीर सेंधमारी और वीआईपी ट्रीटमेंट के इस खेल ने अब एसआईटी (SIT) की जांच के दायरे को और बढ़ा दिया है।