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July 03 2026 05:42 am

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला; सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज की कमेटी करेगी ड्राफ्ट बिल की पड़ताल

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पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट (मंत्रिमंडल) ने गुरुवार (2 जुलाई 2026) को समान नागरिक संहिता (UCC) ड्राफ्ट बिल को लेकर अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, सरकार ने इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले इसकी गहन कानूनी पड़ताल के लिए देश के उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक हाई-लेवल न्यायिक समिति (Committee) के गठन को हरी झंडी दे दी है।

कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने की आधिकारिक पुष्टि

शुभेंदु सरकार में महिला और बाल कल्याण के साथ-साथ शहरी विकास और नगरपालिका मामलों की कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने मंत्रिमंडल की अहम बैठक के बाद न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत में इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने 'पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026' के ड्राफ्ट को न्यायिक समीक्षा और आम जनता व विशेषज्ञों के सुझावों को समाहित करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई संभालेंगी कमेटी की कमान: मिला 4 हफ्ते का समय

कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने समिति के स्वरूप और समय-सीमा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं:

कमेटी की अध्यक्षता: इस उच्च स्तरीय न्यायिक समिति की कमान देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। (बता दें कि जस्टिस देसाई इससे पहले उत्तराखंड के यूसीसी ड्राफ्ट को तैयार करने वाली समिति की भी अध्यक्ष रह चुकी हैं)।

जांच और सिफारिशों की समय-सीमा: जस्टिस देसाई के नेतृत्व वाली इस कमेटी को पश्चिम बंगाल यूसीसी ड्राफ्ट बिल की हर एक धारा की सूक्ष्म जांच-पड़ताल करने और अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए चार हफ्ते (एक महीने) का समय दिया गया है।

अगस्त के बजट सत्र में पेश होगा ऐतिहासिक UCC विधेयक

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू किए जाने के ठीक तीन दिन बाद यह बड़ा फैसला आया है। सरकार का मानना है कि इस न्यायिक समिति की पड़ताल और उनकी सिफारिशों के जुड़ने के बाद विधेयक कानूनी रूप से पूरी तरह अचूक और मजबूत हो जाएगा।

इससे पहले सोमवार (29 जून 2026) को खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के पटल पर इस ऐतिहासिक पहल की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया था कि सरकार आगामी अगस्त 2026 के महीने में निर्धारित बजट सत्र के दौरान 'पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026' को पूरे विधि-विधान के साथ सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश करेगी।