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July 03 2026 05:38 am

लॉन्च से पहले ही क्यों अटक गया WhatsApp का 'Username' फीचर? सरकार ने भेजा नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब

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दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप (WhatsApp) का आगामी 'यूजरनेम फीचर' (Username Feature) भारत में रोलआउट होने से पहले ही बड़े कानूनी और सुरक्षा विवादों में फंस गया है। आम यूजर्स द्वारा अपने पसंदीदा या ओरिजिनल नाम किसी और के द्वारा 'रिजर्व' (हड़प) कर लेने की शिकायतों के बाद, अब भारत सरकार ने भी इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) को एक सख्त नोटिस भेजकर 3 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है और तब तक के लिए भारत में इस फीचर के रोलआउट पर पूरी तरह से पाबंदी (बैन) लगा दी है।

क्या है WhatsApp का यूजरनेम फीचर और यह कैसे काम करता है?

वर्तमान में व्हाट्सऐप पर किसी भी नए व्यक्ति से चैट करने, ग्रुप में जुड़ने या कॉल करने के लिए मोबाइल नंबर शेयर करना अनिवार्य होता है। इसी व्यवस्था को बदलने के लिए कंपनी 'यूजरनेम फीचर' लेकर आ रही थी।

नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं: इस फीचर के आने के बाद टेलीग्राम (Telegram) ऐप की तरह ही यूजर सिर्फ एक यूनिक यूजरनेम (जैसे @username) के जरिए दूसरों से कनेक्ट हो सकेंगे।

पहचान छिपाने की आजादी: हालांकि अकाउंट वेरिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन के लिए मोबाइल नंबर बैकग्राउंड में जरूरी रहेगा, लेकिन फ्रंट-एंड पर किसी तीसरे व्यक्ति को आपका मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा। व्हाट्सऐप इसे प्राइवेसी के लिहाज से बड़ा कदम बता रहा है, लेकिन यही खूबी अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन गई है।

सरकार को किन बातों की सता रही है चिंता?

सरकार की ओर से मेटा को भेजे गए नोटिस में मुख्य रूप से तीन गंभीर डिजिटल खतरों का जिक्र किया गया है:

स्कैम और डिजिटल अरेस्ट के मामलों में बढ़ोतरी: जब किसी यूजर का मोबाइल नंबर सामने नहीं आएगा, तो अपराधियों के लिए अपनी असली पहचान छिपाना बेहद आसान हो जाएगा। सरकार को डर है कि इससे ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और हाल के दिनों में बढ़े 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे खतरनाक साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा सकता है।

फर्जी प्रोफाइल (Impersonation) का खतरा: यदि कोई शातिर अपराधी किसी नामी हस्ती, जाने-माने बैंक, या किसी सरकारी विभाग (जैसे पुलिस, सीबीआई या आरबीआई) से मिलता-जुलता यूजरनेम रिजर्व कर लेता है, तो आम नागरिकों को धोखा देना और उनके साथ वित्तीय ठगी करना बच्चों का खेल हो जाएगा।

जांच एजेंसियों के लिए खड़ी हो सकती है 'दीवार': IPS अरुण बोथरा

इस तकनीकी बदलाव को लेकर सुरक्षा मामलों के एक्सपर्ट्स भी बेहद चिंतित हैं। वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी अरुण बोथरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर चिंता जताते हुए लिखा, > "व्हाट्सऐप का यूजरनेम-बेस्ड आइडेंटिटी फीचर कानून लागू करने वाली एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है। टेलीग्राम में बिल्कुल इसी फीचर की मौजूदगी के कारण आज वहां बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट स्कैम, पहचान छिपाकर होने वाली धोखाधड़ी और ड्रग्स तस्करी जैसे साइबर क्राइम धड़ल्ले से चल रहे हैं।"

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि भारत में व्हाट्सऐप के अरबों यूजर्स हैं। ऐसे में ऐप के डिजाइन में किया गया यह छोटा सा बदलाव देश की पब्लिक सेफ्टी (सार्वजनिक सुरक्षा) के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। मोबाइल नंबर के जरिए किसी भी अपराधी को डिजिटल रूप से ट्रैक (Trace) करना आसान होता है, लेकिन सिर्फ एक रैंडम यूजरनेम होने से जांच प्रक्रिया बेहद जटिल और धीमी हो जाएगी।