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July 03 2026 05:40 am

मिशन 2027 को धार देने में जुटी बसपा; अयोध्या से होगा चुनावी शंखनाद, अकेले चुनाव लड़ने का मायावती का बड़ा फैसला

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लखनऊ/अयोध्या। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) के खेमे में भी तेजी से बढ़ने लगी है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति पूरी तरह साफ कर दी है। पार्टी इस बार किसी भी छोटे या बड़े दल से गठबंधन किए बिना, उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर 'एकला चलो' की नीति के तहत अकेले ही चुनावी मैदान में उतरेगी।

इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए बसपा ने अपने संगठन को जिला, सेक्टर और सीधे बूथ स्तर तक री-एक्टिव (सक्रिय) करने की व्यापक जमीनी तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में लखनऊ में हुई प्रदेश पदाधिकारियों की हाई-लेवल समीक्षा बैठक के बाद इस महाअभियान को हरी झंडी दी गई है।

दलित-ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए 'भाईचारा कमेटियां' एक्टिव

बसपा का मुख्य फोकस अपने पारंपरिक और कोर दलित व ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) वोट बैंक को फिर से पूरी तरह मजबूत करने पर है। इसके लिए पार्टी आलाकमान के निर्देश पर सभी जिलों में विशेष 'दलित-ओबीसी कमेटियों' और 'भाईचारा कमेटियों' की रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। इन बैठकों के जरिए न सिर्फ पुराने और रूठे कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा में लाया जा रहा है, बल्कि जमीनी स्तर पर सामाजिक समीकरणों को बसपा के पक्ष में मोड़ने की चक्रव्यूह रचना की जा रही है। पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट मानना है कि सत्ता की चाबी पाने के लिए अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रखना सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है।

22 जून को अयोध्या और 23 जून को अंबेडकरनगर में शक्ति प्रदर्शन

मिशन 2027 को रफ्तार देने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने रैलियों का पूरा शेड्यूल तैयार कर लिया है। पार्टी आगामी 22 जून को रामनगरी अयोध्या और उसके ठीक अगले दिन 23 जून को अंबेडकरनगर में दो बेहद विशाल जनसभाएं आयोजित करने जा रही है। इन रैलियों के माध्यम से बसपा न केवल अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नया चुनावी जोश भरेगी, बल्कि सूबे में अपनी बड़ी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी करेगी। पार्टी ने इन दोनों बड़े कार्यक्रमों को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का कड़ा टास्क संगठन के बेहद वरिष्ठ नेताओं और मुख्य पदाधिकारियों को सौंप दिया है।

पदाधिकारियों को मिला होमवर्क, सीधे मायावती को जाएगी रिपोर्ट

बसपा सुप्रीमो के सख्त निर्देशों के बाद सभी जिला संयोजकों और प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन की वास्तविक और जमीनी स्थिति का बारीकी से आकलन करने का होमवर्क दिया गया है। उन्हें विशेष रूप से यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक इस समय किस स्थिति में है, विरोधी दल उसमें कितनी सेंधमारी कर पाए हैं और किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को और ज्यादा मजबूत करने की जरूरत है। इन सभी ग्राउंड रिपोर्ट्स को बिना किसी काट-छांट के सीधे बसपा आलाकमान तक भेजा जाएगा, जिसके आधार पर ही चुनाव की फाइनल रणनीति और टिकटों का बंटवारा तय होगा।

घर-घर संपर्क अभियान और जल्द हो सकता है उम्मीदवारों का ऐलान

पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को 'कमरे की राजनीति' छोड़कर सीधे जनता के बीच जाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जल्द ही 'घर-घर संपर्क अभियान' शुरू किया जा रहा है, ताकि मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित किया जा सके। सूत्रों की मानें तो बसपा चौंकाने वाले फैसले लेते हुए बहुत जल्द कई महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर अपने संभावित उम्मीदवारों (प्रत्याशियों) के नामों की पहली सूची भी जारी कर सकती है। इसके साथ ही अन्य दलों के असंतुष्ट नेताओं और मजबूत चेहरों को पार्टी में शामिल कराकर सदस्यता अभियान को एक नई और आक्रामक गति देने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ चुनावों में कमजोर हुई राजनीतिक स्थिति के बाद बसपा इस 'मिशन-2027' को उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी दमदार वापसी का आखिरी और सबसे बड़ा अवसर मानकर चल रही है। यही वजह है कि पार्टी इस बार पूरी ताकत झोंकने के मूड में दिखाई दे रही है।