जाति नहीं, 'काम' दिखेगा! यूपी भाजपा संगठन में होने जा रही बड़े चेहरों की एंट्री
India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार के ठीक बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने प्रादेशिक संगठन को नए सिरे से धार देने में जुट गई है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब महज एक साल का वक्त बचा है, और पार्टी इस चुनावी रण से पहले अपनी 'इलेक्शन मशीनरी' (चुनीवी तंत्र) को पूरी तरह अभेद्य बनाना चाहती है। इसी कड़ी में बुधवार को यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दिल्ली का दौरा कर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल बैठक की। इस मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस बात के चर्चे तेज हैं कि इस बार भाजपा केवल जातीय समीकरणों के भरोसे नहीं, बल्कि एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली रणनीति पर काम कर रही है।
जातीय संतुलन से ज्यादा 'संगठन की समझ' को मिलेगी तवज्जो
पार्टी के शीर्ष सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस महीने के अंत तक उत्तर प्रदेश भाजपा के नए पदाधिकारियों की सूची का आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया जाएगा। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने अंदरूनी रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि आगामी टीम में कम से कम 60 पदाधिकारी ऐसे होंगे, जिन्हें 'संगठन की गहरी समझ' होगी।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार इन नियुक्तियों में पारंपरिक जातीय संतुलन के मुकाबले काम करने की क्षमता और वफादारी को ज्यादा महत्व दिया जाएगा। दरअसल, हाल ही में हुए योगी कैबिनेट विस्तार में भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग (जातीय संतुलन) का पूरा ख्याल रखा था, जिसमें ओबीसी (OBC) और दलित वर्ग के चेहरों को भारी तवज्जो मिली थी। लेकिन संगठन के स्तर पर कहानी अलग होगी; यहाँ जातिगत आंकड़ों को किनारे रखकर केवल उन्हीं जुझारू नेताओं को आगे बढ़ाया जाएगा जो लंबे समय से जमीन पर काम कर रहे हैं।
कौन कहलाते हैं 'संगठन के आदमी'? आरएसएस बैकग्राउंड को प्राथमिकता
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, भाजपा इस बार केवल उन चेहरों पर दांव लगाने जा रही है जिन्हें विशुद्ध रूप से 'संगठन का आदमी' कहा जाता है। भाजपा की कार्यशैली में यह टैग उन नेताओं को मिलता है जो:
आरएसएस (RSS) बैकग्राउंड: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हों और जमीनी स्तर पर काम करने का लंबा अनुभव रखते हों।
रीति-नीति के पक्के: जो पार्टी की मूल विचारधारा, कार्यपद्धति और नीतियों को न सिर्फ बेहतर तरीके से समझते हों, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का माद्दा रखते हों।
इन 6 क्षेत्रीय यूनिटों पर तैनात होंगे भाजपा के कद्दावर 'कमांडर'
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य को सांगठनिक रूप से सुचारू रूप से चलाने के लिए भाजपा ने इसे 6 क्षेत्रीय इकाइयों (रीजनल यूनिट्स) में बांट रखा है। ये इकाइयां हैं: पश्चिम यूपी, ब्रज, अवध, कानपुर-बुंदेलखंड, काशी और गोरखपुर। गौर करने वाली बात यह है कि आरएसएस भी उत्तर प्रदेश को इन्हीं 6 प्रांतों के आधार पर देखता है।
सूत्रों का दावा है कि इन 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों के पदों पर इस बार किसी भी तरह का कोई प्रयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि यहां पार्टी के सबसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं को कमान सौंपी जाएगी। भाजपा भलीभांति जानती है कि साल 2014 के बाद से उसने उत्तर प्रदेश में जितने भी बड़े चुनाव जीते हैं, उनमें उसकी मजबूत 'इलेक्शन मशीनरी' का सबसे बड़ा योगदान रहा है। यही वजह है कि 2027 के चुनावी चक्रव्यूह को भेदने के लिए संगठन के सभी ढीले पेंचों को अभी से कसा जा रहा है।