ममता बनर्जी के हटते ही TMC के बुरे दिन शुरू! आर्म्स एक्ट मामले में सांसद माला रॉय ने कोर्ट में किया सरेंडर

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल की सियासी फिजां बदलते ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दिग्गज नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। सूबे से ममता बनर्जी सरकार की विदाई और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के गठन के बाद से टीएमसी खेमे में खलबली मची हुई है। इसी कड़ी में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) के तहत आरोपी और टीएमसी की वरिष्ठ लोकसभा सांसद माला रॉय ने कोलकाता की एक अदालत में चुपचाप सरेंडर कर दिया।

हालांकि, अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद उन्हें कानूनी राहत मिल गई और कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी। इस घटनाक्रम को बंगाल की बदली हुई राजनीतिक व्यवस्था और टीएमसी नेताओं के 'बुरे दिन' की शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है।

बेटे संग अलीपुर कोर्ट पहुंचीं सांसद, आर्म्स एक्ट की धाराओं में दर्ज थी FIR

मिली जानकारी के मुताबिक, कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी सांसद और कोलकाता नगर निगम (KMC) की चेयरपर्सन माला रॉय बुधवार को अपने बेटे अनिर्बाण रॉय के साथ अलीपुर अदालत पहुंचीं और जज के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

दरअसल, यह पूरा मामला विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद टॉलीगंज इलाके में हुई भीषण चुनावी हिंसा और भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर हथियार चमकाकर धमकाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद माला रॉय, उनके बेटे और 24 अन्य लोगों के खिलाफ आर्म्स एक्ट की गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इसी कानूनी दबाव के चलते सांसद को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा।

कोर्ट से मिली फौरी राहत, 1,000 रुपये के बॉन्ड पर मंजूर हुई जमानत

अदालत के भीतर चली संक्षिप्त कानूनी कार्यवाही के बाद न्यायधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। चूंकि मामला आत्मसमर्पण से जुड़ा था, इसलिए अदालत ने सांसद माला रॉय और उनके बेटे अनिर्बाण रॉय को एक-एक हजार रुपये के निजी मुचलके (बॉन्ड) पर जमानत दे दी।

भले ही सांसद को जेल जाने से फौरी राहत मिल गई हो, लेकिन इस मामले ने बंगाल की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। बता दें कि माला रॉय का परिवार बंगाल की राजनीति में खासा रसूख रखता है; उनके पति निर्बेद रॉय भी राज्य के पूर्व विधायक रह चुके हैं और एक जाना-माना चेहरा हैं।

चुनावी नतीजों के बाद भड़की थी राजनीतिक हिंसा

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब पूर्ण बहुमत के साथ सूबे में भाजपा की सरकार बनी है। करीब 15 साल तक एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी की सरकार को इस बार करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इस चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 208 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सत्तासीन टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई।

चुनावी नतीजे आने के तुरंत बाद राज्य के कई शहरों और टॉलीगंज जैसे इलाकों में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। अब सूबे की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि हिंसा और 'माफिया राज' फैलाने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका राजनीतिक कद कितना ही बड़ा क्यों न हो।