क्या 30 जून से बंद हो जाएंगे ₹100, ₹200 और ₹500 के कागजी नोट? सोशल मीडिया के दावों पर सरकार ने दिया ये दोटूक जवाब

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पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स) पर एक खबर तेजी से जंगल की आग की तरह फैल रही है, जिसने आम जनता के बीच भारी भ्रम और घबराहट पैदा कर दी है। वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आगामी 30 जून 2026 से भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं, जिसके तहत ₹100, ₹200, ₹500 और ₹2000 के मौजूदा कागजी नोट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे और उनकी जगह प्लास्टिक (पॉलिमर) के नए नोट चलन में आ जाएंगे।

यदि आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आया है और आप परेशान हैं, तो आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक एजेंसी PIB Fact Check ने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने रखते हुए स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

PIB Fact Check ने बताया पूरी तरह फर्जी (Fake News)

सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी 'पीआईबी फैक्ट चेक' ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों की बारीकी से जांच करने के बाद इन्हें पूरी तरह से फर्जी, भ्रामक और निराधार करार दिया है।

PIB ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऐसी कोई भी घोषणा नहीं की है कि 30 जून से देश में कागजी नोटों का चलन बंद हो जाएगा।

सरकार की ओर से मौजूदा नोटों को वापस लेने या उन्हें अवैध (Demoneitisation) घोषित करने की कोई योजना नहीं है।

आम जनता को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड होने वाले ऐसे भ्रामक संदेशों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और न ही इन्हें आगे शेयर कर अफवाह फैलाएं। केवल आधिकारिक स्रोतों (RBI की वेबसाइट) से मिली जानकारी को ही सही मानें।

आखिर कहाँ से उड़ी यह अफवाह? जानिए इसके पीछे की असली वजह

इस तरह की फर्जी खबर के वायरल होने के पीछे केंद्रीय बैंक की एक वास्तविक समीक्षा बैठक का संदर्भ जुड़ा हुआ है। हाल ही में आरबीआई (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए एक तकनीकी जानकारी साझा की थी।

गवर्नर ने बताया था कि केंद्रीय बैंक (आरबीआई) वर्तमान में केवल पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों की संभावनाओं और उनकी उपयोगिता का गहराई से अध्ययन (Study) कर रहा है। आरबीआई यह जांचने का प्रयास कर रहा है कि क्या भारत जैसे विशाल और विविध जलवायु वाले देश में प्लास्टिक नोटों को लागू करना व्यावहारिक (Practical) होगा या नहीं, और इसके क्या फायदे और चुनौतियां हो सकती हैं। गवर्नर की इस तकनीकी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश कर दिया गया कि सरकार ने नोट बदलने का फैसला ले लिया है, जो कि पूरी तरह गलत है।

क्या होते हैं पॉलिमर नोट और भारत में इनका इतिहास?

सिंथेटिक बनाम कॉटन: भारत में वर्तमान समय में जो नोट इस्तेमाल किए जाते हैं, वे 100 प्रतिशत कॉटन (कपास) पर आधारित कागज से बने होते हैं। दूसरी ओर, पॉलिमर नोट एक विशेष प्रकार के सिंथेटिक प्लास्टिक पदार्थ से तैयार किए जाते हैं।

दुनिया भर में चलन: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे कई विकसित देशों ने पॉलिमर नोटों को पूरी तरह अपनाया हुआ है। ये नोट अत्यधिक टिकाऊ होते हैं, जल्दी फटते नहीं हैं, पानी या गंदगी से खराब नहीं होते और इनमें जालसाजी (नकली नोट) रोकने के लिए बेहद एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं।

भारत का पुराना प्रयोग: भारत सरकार ने साल 2012 में भी नोटों की उम्र बढ़ाने के उद्देश्य से देश के कुछ चुनिंदा शहरों में ट्रायल के तौर पर ₹10 के पॉलिमर नोटों के परीक्षण (Testing) की मंजूरी दी थी। हालांकि, उस समय कुछ तकनीकी और व्यावहारिक अड़चनों के कारण इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था।

डिजिटल क्रांति के बाद भी देश में बढ़ा नकदी (Cash) का इस्तेमाल

दिलचस्प बात यह है कि देश में यूपीआई (UPI) और डिजिटल भुगतान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय नागरिकों के बीच नकदी (कैश) का महत्व आज भी बेहद मजबूत बना हुआ है।

आरबीआई की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार:

मार्च 2026 तक देश के बाजार में प्रचलन में मौजूद कुल नोटों का मूल्य 11.9% बढ़कर 41.23 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

चलन में मौजूद नोटों की कुल संख्या भी 10.5% की वृद्धि के साथ 171.32 अरब पीस हो गई है।

कुल मूल्य (Value) के मामले में भारतीय बाजार में अकेले ₹500 के नोटों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा यानी 85.5% दर्ज की गई है।