J-20 फाइटर जेट बनाने वाली AVIC Chengdu के शेयर 27% टूटे, हथियारों की 'विश्वसनीयता' पर उठे सवाल
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और युद्ध के माहौल के बीच जहां दुनिया भर की डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल देखा जा रहा है, वहीं चीन की एक दिग्गज सरकारी डिफेंस कंपनी को तगड़ा झटका लगा है। चीन के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी एवीआईसी चेंगदू (AVIC Chengdu) के शेयरों में इस साल भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बावजूद चीन की इस प्रमुख एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरर और डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर के शेयर इस साल अब तक 27 प्रतिशत तक लुढ़क चुके हैं।
J-10, JF-17 और J-20 जैसे खतरनाक फाइटर जेट्स बनाती है कंपनी
एवीआईसी चेंगदू (AVIC Chengdu) पूरी तरह से चीन सरकार के मालिकाना हक वाली कंपनी है। यह कंपनी चीनी वायुसेना के रीढ़ माने जाने वाले विमानों का निर्माण करती है:
J-20 (चेंगदू जे-20): यह चीन का सबसे आधुनिक 5th जनरेशन का स्टील्थ फाइटर जेट है।
J-10 और JF-17: इन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल चीन के साथ-साथ उसका पड़ोसी देश पाकिस्तान भी बड़े पैमाने पर करता है।
तीन महीने में 22% की गिरावट, टेक्निकल चार्ट पर कमजोर हुआ स्टॉक
चाइनीज मिलिट्री हार्डवेयर और J-10 फाइटर जेट को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी दिलचस्पी के चलते पिछले साल इस स्टॉक में शानदार तेजी देखी गई थी, लेकिन अब यह शेयर लगातार तकनीकी कमजोरी का शिकार हो रहा है।
शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस: पिछले 3 महीनों में कंपनी के शेयर 22% टूट चुके हैं, जबकि पिछले एक साल में इसमें कुल 28% की गिरावट आई है।
लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस: हालांकि, अगर लंबी अवधि के निवेशकों की बात करें, तो पिछले 5 साल में इस स्टॉक ने मल्टीबैगर रिटर्न दिया है और यह 288% ऊपर ट्रेड कर रहा है।
मार्केट कैप और लिस्टिंग: यह कंपनी चीन के शेनझेन स्टॉक एक्सचेंज (Shenzhen Stock Exchange) पर लिस्टेड है और वर्तमान में इसका कुल मार्केट कैप 151 से 154 बिलियन युआन के बीच बना हुआ है। राहत की बात सिर्फ यह है कि साल 2026 की पहली तिमाही (Q1) में कंपनी के रेवेन्यू (राजस्व) में बढ़त दर्ज की गई है।
एक्सपर्ट की राय: मूविंग एवरेज के नीचे फिसला शेयर
मार्केट रिसर्च फर्म लक्ष्मीश्री के रिसर्च हेड अंशुल जैन के मुताबिक, एवीआईसी चेंगदू का स्टॉक वीकली चार्ट्स पर अपने 10, 20 और 50 वीक के 'मूविंग एवरेजेज' (Moving Averages) के नीचे आ गया है। यह लगातार टेक्निकल कमजोरी को दर्शाता है, जिसके चलते निवेशक फिलहाल इस शेयर से दूरी बना रहे हैं।
पिछले साल भारत-पाक तनाव के बीच 2 महीने में 45% उछला था शेयर
यह वही कंपनी है जिसे पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीमा संघर्ष का सबसे ज्यादा फायदा मिला था। उस दौरान सिर्फ दो महीने में ही कंपनी का स्टॉक 45% तक रॉकेट बन गया था। दरअसल, पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर दावा किया था कि उसने भारत के खिलाफ संघर्ष में चीन निर्मित J-10C फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया है, जिसके बाद इस विमान की ग्लोबल ब्रांडिंग हुई थी।
'अनटेस्टेड' (Untested) हैं चीनी हथियार, इसलिए निवेशकों में डर?
ब्लेमबर्ग में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में जुलियाना लियू ने चीनी रक्षा उपकरणों की सबसे बड़ी कमजोरी पर से पर्दा उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक:
"चीन भले ही दुनिया के टॉप-5 ग्लोबल मिलिट्री-इक्विपमेंट मेकर्स (हथियार निर्माताओं) में शामिल है, लेकिन सच्चाई यह है कि चीन ने पिछले करीब आधी शताब्दी (50 साल) से कोई बड़ी और वास्तविक लड़ाई नहीं लड़ी है। यही वजह है कि आज के आधुनिक दौर में लड़ी जा रही व्यावहारिक लड़ाइयों में चीन के ज्यादातर अत्याधुनिक हथियार 'अनटेस्टेड' (जिनका युद्ध में परीक्षण न हुआ हो) हैं। युद्ध के मैदान में उनकी वास्तविक क्षमता और विश्वसनीयता पर हमेशा एक संशय बना रहता है।"
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर चीनी हथियारों की वास्तविक युद्ध क्षमता को लेकर उठ रहे इसी संदेह और तकनीकी अनिश्चितता के कारण निवेशक अब चीन की इस सरकारी डिफेंस कंपनी में भारी बिकवाली कर रहे हैं।