चीन के तियानजिन सम्मेलन में भारत की भूमिका ने क्यों बढ़ाई वाशिंगटन की बेचैनी
- by Priyanka Tiwari
- 2025-09-02 16:46:00
India News Live,Digital Desk : तियानजिन, चीन में हाल ही में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन पर अमेरिकी मीडिया ने गहरी नजर रखी। इस बैठक में चीन और भारत की सक्रिय भागीदारी को लेकर कई अमेरिकी अखबारों में व्यापक चर्चा हुई।
अमेरिकी मीडिया का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों को कमजोर किया है। वहीं, चीन ने इस सम्मेलन का उपयोग अपनी वैश्विक शक्ति और प्रभाव को मजबूत करने के लिए किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन में गर्मजोशी से स्वागत और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक को भी विशेष महत्व दिया गया।
अमेरिकी मीडिया की प्रमुख टिप्पणियां:
वाशिंगटन पोस्ट ने सम्मेलन को अमेरिका के खिलाफ चीन की नई कूटनीतिक रणनीति बताया।
सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि ट्रंप की नीतियों ने भारत को चीन और रूस के करीब ला दिया है।
द इकोनॉमिस्ट ने इसे भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत बताया और ट्रंप के फैसलों को भारत के लिए नुकसानदायक करार दिया।
वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि चीन इस समय खुद को वैश्विक नेता के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स का विश्लेषण:
अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत कभी अमेरिका के लिए चीन का विकल्प माना जाता था। भारत ने खुद को चीनी विनिर्माण के बेहतर विकल्प के रूप में पेश करने के लिए काफी मेहनत की थी, लेकिन मौजूदा हालात ने इस धारणा को कमजोर कर दिया है। मोदी-शी मुलाकात ने इस बदलाव को स्पष्ट कर दिया है।
कूटनीतिक संदेश:
एससीओ शिखर सम्मेलन को केवल सुरक्षा मंच नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का प्रतीक भी माना जा रहा है। चीन की मेजबानी और भारत की सक्रिय भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि एशिया की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं।