नेपाल में राजनीतिक घमासान: PM बालेन शाह की तुलना एडॉल्फ हिटलर से, संसद में लगा तानाशाही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने का आरोप
नेपाल की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। 'जेन-जी' (Gen-Z) आंदोलन और युवाओं के भारी समर्थन से सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे प्रधानमंत्री बालेन शाह अब विपक्ष के तीखे हमलों के केंद्र में आ गए हैं। नेपाल की संसद की नेशनल असेंबली (संसद का ऊपरी सदन) में बुधवार को प्रधानमंत्री की शासन शैली की कटु आलोचना की गई, जहां एक वरिष्ठ नेता ने उनकी तुलना कुख्यात जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर से कर दी।
'नेपाली हिटलर बन चुके हैं पीएम बालेन शाह'
जनता समाजवादी पार्टी (JSP) के वरिष्ठ नेता और नेशनल असेंबली के सदस्य महंथ ठाकुर ने सदन में प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने बालेन शाह प्रशासन को पूरी तरह अकुशल और निष्क्रिय करार देते हुए कहा, "हम उन्हें क्या पुकारें? नेपाली तानाशाह या नेपाली हिटलर? वह नेपाली हिटलर बन चुके हैं। वे जो कुछ भी कहते हैं, उसे ही परम सत्य मान लिया जाता है और उनका हर आदेश कानून बन जाता है। उनकी यह कार्यशैली देश को और अधिक तबाही के मुहाने पर धकेल रही है।"
संस्थाओं पर हमले और अलोकतांत्रिक फैसलों के आरोप
सांसद महंथ ठाकुर ने सरकार पर प्रशासनिक तंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को जानबूझकर पंगु बनाने के कई गंभीर आरोप लगाए:
कर्मचारियों का उत्पीड़न: आरोप है कि सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को उनके पदों से मनमाने ढंग से हटा दिया है, जिससे देश में प्रशासनिक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
राजनीतिक दलों को निशाना बनाना: विपक्षी दलों का आरोप है कि राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों में अनुचित हस्तक्षेप किया जा रहा है, वहां फर्नीचर जलाए जा रहे हैं और उनके कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं।
लोकतांत्रिक संगठनों पर प्रतिबंध: ठाकुर के अनुसार, सरकार ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों का सामना करने में सक्षम नहीं है, इसलिए वह इन लोकतांत्रिक संगठनों को प्रतिबंधित और समाप्त करने का प्रयास कर रही है।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में संकट की चेतावनी
प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा बोर्डिंग स्कूलों और निजी नर्सिंग होम के प्रति अपनाए जा रहे अत्यधिक सख्त और कठोर दृष्टिकोण की भी कड़ी निंदा की गई। महंथ ठाकुर ने चेतावनी दी कि निजी क्षेत्र को पूरी तरह दबाने के इस सरकारी रवैये से लाखों छात्रों और शिक्षकों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि नेपाल की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था केवल सरकारी सहायता के भरोसे नहीं चल सकती; इसके लिए निजी क्षेत्र का सहयोग अनिवार्य है और सरकार के इन कड़े कदमों से देश की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर होगी।
सदन के अंत में महंथ ठाकुर ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने के सरकारी रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि बालेन शाह की यह शासन शैली नेपाल को एक बेहद गलत और खतरनाक दिशा में ले जा रही है।