राहुल गांधी को झटका या तोहफा? राजीव गांधी के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' पर सुप्रीम कोर्ट में तकरार, अब CM विजय के फैसले पर टिकी नजरें
तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय (Navodaya Vidyalaya) खोलने के दशकों पुराने विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के सामने हुए इस घटनाक्रम ने अब राज्य की नई तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार और मुख्यमंत्री थलपति विजय के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "केंद्र सरकार के स्कूलों को न रोकें"
सुनवाई के दौरान जब तमिलनाडु के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने निर्देश लेने के लिए समय मांगते हुए सुनवाई टालने का अनुरोध किया, तो जस्टिस नागरत्ना ने तल्ख टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा, "नवोदय विद्यालय का सारा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। आपको सिर्फ जमीन उपलब्ध करानी है। जब देश के बाकी सभी राज्यों में नवोदय विद्यालय हैं, तो आप तमिलनाडु के बच्चों को इससे क्यों वंचित रख रहे हैं?"
पीठ ने राज्य की राजनीतिक तब्दीली का जिक्र करते हुए कहा, "अब वहां दूसरी सरकार (TVK) है। हमें नहीं पता कि उनकी पॉलिसी क्या है। हो सकता है कि आपकी अपनी शिक्षा प्रणाली हो, लेकिन तमिलनाडु में केंद्र सरकार के स्कूलों को न रोकें।"
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त 2026 की तारीख तय करते हुए राज्य सरकार को 3 हफ्ते का समय दिया है।
इसके साथ ही पीठ ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि नौवीं कक्षा से तीसरी भाषा लागू नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इस स्तर पर यह छात्रों के लिए बेहद तनावपूर्ण हो जाता है।
40 साल से क्यों अटका है राजीव गांधी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट?
नवोदय विद्यालय की शुरुआत 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा देना था।
पूरे देश में यह व्यवस्था लागू है, लेकिन तमिलनाडु एकमात्र ऐसा राज्य है जहां एक भी नवोदय विद्यालय नहीं है। इसकी मुख्य वजह राज्य की पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों (DMK और AIADMK) द्वारा केंद्र की त्रि-भाषा (Three-Language Formula) नीति का विरोध और केवल दो-भाषा (तमिल और अंग्रेजी) नीति का समर्थन करना रहा है। नवोदय विद्यालयों में हिंदी एक अनिवार्य भाषा के रूप में शामिल होती है, जिसका तमिलनाडु में हमेशा राजनीतिक विरोध हुआ।
मुख्यमंत्री विजय के सामने धर्मसंकट: क्या होगा कांग्रेस और राहुल गांधी का रुख?
तमिलनाडु में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद थलपति विजय की TVK सरकार सत्ता में है, जिसमें कांग्रेस पार्टी भी गठबंधन सहयोगी के तौर पर शामिल है। अब मुख्यमंत्री विजय के सामने यह सबसे बड़ा दिलचस्प सवाल है:
राजीव गांधी के सपने को साकार करना: यदि सीएम विजय द्रविड़ियन पार्टियों की लीक से हटकर हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने के लिए जमीन देने को राजी हो जाते हैं, तो यह कांग्रेस, राहुल गांधी और गांधी परिवार के लिए एक बड़ी वैचारिक जीत होगी।
कांग्रेस को झटका: यदि क्षेत्रीय राजनीति और तमिल भाषा के पुराने गौरव के दबाव में विजय सरकार भी पुराने ढर्रे पर चलती है और स्कूलों को मंजूरी नहीं देती है, तो यह उनके सहयोगी दल कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
कांग्रेस पहले द्रमुक (DMK) के साथ भी गठबंधन में थी, लेकिन तब वह नवोदय विद्यालय नहीं खुलवा सकी थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की इस डेडलाइन के बाद मुख्यमंत्री विजय का अगला कदम तमिलनाडु की भावी राजनीति और शिक्षा नीति की नई दिशा तय करेगा।