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August 19 2026 02:40 pm

परिसीमन बिल पर मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा: जानें दलबदल और विपक्ष में बिखराव के बाद लोकसभा का नया नंबर गेम, क्या पवार भी देंगे साथ

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संसद का आगामी मॉनसून सत्र (Monsoon Session 2026) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए (NDA) सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी सियासी परीक्षा साबित होने वाला है। सरकार इस सत्र में देश के राजनीतिक ढांचे को बदलने वाले बेहद महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक— 'एक देश, एक चुनाव' और राज्यों में सीटों के पुनर्निर्धारण यानी 'परिसीमन विधेयक' को दोबारा पेश करने की तैयारी में है।

चूंकि ये संविधान संशोधन विधेयक हैं, इसलिए इन्हें पास कराने के लिए साधारण बहुमत नहीं, बल्कि संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। ऐसे में लोकसभा का मौजूदा नंबर गेम और राजनीतिक दलों के बदलते समीकरण बेहद दिलचस्प हो गए हैं।

क्यों है एनडीए के लिए बड़ी चुनौती? अप्रैल की हार का सबक

संविधान में संशोधन के लिए दो महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होता है:

विधेयक को सदन के कुल सदस्यों की संख्या के आधे से अधिक (50%+) का समर्थन प्राप्त हो।

मतदान के समय सदन में उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत जरूरी है।

इसी साल अप्रैल 2026 में सरकार इसी गणित के चक्कर में लड़खड़ा गई थी। महिलाओं को आरक्षण देने और लोकसभा व विधानसभा सीटों के विस्तार से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान के दौरान सरकार के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े थे। कुल 528 उपस्थित सदस्यों के आधार पर दो-तिहाई का जादुई आंकड़ा 352 था, जिससे सरकार 54 वोट पीछे रह गई और बिल गिर गया था।

पिछले 3 महीनों में कैसे बदला लोकसभा का समीकरण?

बिना किसी नए आम चुनाव के, पिछले तीन महीनों में दलबदल, पार्टियों में टूट और नए गठबंधनों ने विपक्ष को कमजोर और एनडीए को मजबूत किया है:

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट: पश्चिम बंगाल में विपक्ष को सबसे बड़ा झटका लगा है, जहाँ टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने अलग होकर 'नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव' (NCPI) बना लिया है और एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है।

शिवसेना (UBT) को झटका: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट के 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना (NDA घटक) का दामन थाम लिया है।

कांग्रेस-द्रमुक (DMK) गठबंधन में दरार: एक दशक पुराना कांग्रेस-डीएमके गठबंधन टूट चुका है। हालांकि डीएमके (22 सांसद) औपचारिक रूप से एनडीए में शामिल नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष अब उनके समर्थन का दावा नहीं कर सकता। बीजेपी को उम्मीद है कि मुद्दों के आधार पर डीएमके का समर्थन मिल सकता है।

शरद पवार का रुख: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के साथ एनसीपी (एसपी) नेताओं की मुलाकातों ने इंडिया गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है। राकांपा (शरद पवार गुट) ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार राज्यों में सीटों की संख्या 50% बढ़ाने का संशोधन करती है, तो वे चर्चा और समर्थन के लिए तैयार हैं।

लोकसभा का ताजा नंबर गेम (Latest Number Game)

वर्तमान में 3 सांसदों के निधन के कारण लोकसभा की प्रभावी संख्या 543 से घटकर 540 रह गई है। ऐसे में सभी सदस्यों की मौजूदगी की स्थिति में संविधान संशोधन के लिए 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

आइए समझते हैं कि एनडीए इस जादुई आंकड़े के कितने करीब है:

राजनीतिक दल / गुटसांसदों की संख्याकुल संभावित समर्थन
मूल एनडीए (NDA) कुनबा293293
TMC (बागी गुट) + शिवसेना (शिंदे गुट में शामिल बागी)+ 26319 (सत्तारूढ़ खेमा)
द्रमुक (DMK) - मुद्दों के आधार पर संभावित समर्थन+ 22341
एनसीपी (SP - शरद पवार गुट)+ 08349

अन्य संभावित समर्थन: इन सबके अलावा वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पास लोकसभा में 4 सांसद हैं, जो पहले भी कई मौकों पर मोदी सरकार के विधेयकों का समर्थन कर चुके हैं।

यदि वोटिंग के दौरान विपक्ष के कुछ सांसद अनुपस्थित रहते हैं या सदन से वॉकआउट कर जाते हैं, तो उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या कम होने से दो-तिहाई का जादुई आंकड़ा (360 से नीचे) आ जाएगा, जिससे एनडीए के लिए इस ऐतिहासिक परिसीमन बिल को पास कराना बेहद आसान हो जाएगा।