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September 14 2026 05:56 pm

राज्यसभा किसे भेजेंगे अरविंद केजरीवाल? राघव चड्ढा के झटके के बाद बनाया नया रूल

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उच्च सदन (राज्यसभा) में पार्टी को लगे अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक झटके के बाद भविष्य के लिए अपनी रणनीति और नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। कभी उनके सबसे भरोसेमंद युवा चेहरों में गिने जाने वाले राघव चड्ढा और संगठन महासचिव रहे डॉ. संदीप पाठक समेत 7 राज्यसभा सांसदों के पार्टी से अलग होकर भाजपा का दामन थामने की घटना को केजरीवाल ने पार्टी के लिए 'बड़ा सबक' करार दिया है। गोवा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने दो टूक ऐलान किया कि भविष्य में किसी भी नेता को राज्यसभा भेजने से पहले पार्टी कड़ा फिल्टर लगाएगी और अब किसी को भी सीधे उच्च सदन का टिकट नहीं मिलेगा।

क्या है अरविंद केजरीवाल का नया नियम?

गोवा के मंच से कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब उसके चुने हुए नेताओं ने पार्टी को धोखा दिया है। उन्होंने राज्यसभा के उम्मीदवारों के चयन के लिए नया पैमाना तय करते हुए कहा:

"हमारे जितने भी चुने हुए प्रतिनिधि (विधायक और पार्षद) हैं, जिन्हें जनता ने वोट देकर चुना, उन्होंने कभी लोगों को धोखा नहीं दिया। गोवा में भाजपा को सिर्फ एक विधायक चाहिए था, लेकिन वो हमारे दो विधायकों को नहीं तोड़ पाए। लेकिन राज्यसभा में जो हुआ, वो हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। उन्हें पार्टी ने राज्यसभा भेजा था, जनता ने सीधे नहीं चुना था। इसलिए अब हमने तय किया है कि आगे से किसी को भी राज्यसभा भेजने से पहले 100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे कि आदमी ठीक है, निष्ठावान है या नहीं। उनकी कड़ी जांच-पड़ताल की जाएगी।'"

क्यों बैकफुट पर आई थी आम आदमी पार्टी?

उच्च सदन में आम आदमी पार्टी के पास कुल 10 सांसद थे, जिससे वह राज्यसभा में चौथी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थी। लेकिन अप्रैल के महीने में राघव चड्ढा के नेतृत्व में कुल 7 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी:

अलग होने वाले 7 सांसद: राघव चड्ढा, डॉ. संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह और संजीव अरोड़ा/राजेंद्र गुप्ता।

दलबदल कानून से बचाव: चूंकि 10 में से 7 सांसदों (दो-तिहाई से अधिक संख्या) ने एक साथ अलग गुट बनाकर फैसला लिया, इसलिए उन पर संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू नहीं हो सका और उनकी सांसदी बच गई।

संख्या घटकर 3 पर सिमटी: इस बगावत के बाद राज्यसभा में 'आप' के सिर्फ तीन सांसद—संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और संत बलबीर सिंह सीचेवाल ही बचे रह गए।

अब किसे राज्यसभा भेजेगी आम आदमी पार्टी?

केजरीवाल के इस नए रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि भविष्य में दिल्ली या पंजाब से खाली होने वाली सीटों पर पार्टी का रुख क्या रहेगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए नियम के तहत अब इन 3 प्राथमिकताओं पर काम होगा:

जमीनी और पुराने आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं को तवज्जो: अब किसी बाहरी सेलिब्रिटी, उद्योगपति या सीधे कॉर्पोरेट बैकग्राउंड से आए चेहरे को टिकट देने के बजाय उन नेताओं को वरीयता दी जाएगी जो पार्टी के शुरुआती 'अन्ना आंदोलन' के दिनों से जुड़े रहे हैं और हर संकट में पार्टी के साथ खड़े रहे हैं।

सख्त बैकग्राउंड और लॉयल्टी वेरिफिकेशन: उम्मीदवार के राजनीतिक अतीत, वित्तीय पारदर्शिता और केंद्रीय एजेंसियों के दबाव को झेलने की क्षमता का '100 बार ठोक-बजाकर' आंतरिक ऑडिट किया जाएगा।

संजय सिंह जैसा आक्रामक और भरोसेमंद मॉडल: पार्टी के भीतर संजय सिंह की निष्ठा को एक बेंचमार्क के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने जेल जाने और तमाम मुश्किलों के बावजूद पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।

राघव चड्ढा और AAP के बीच हालिया तल्खी

पार्टी छोड़ने के बाद से ही आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच जुबानी जंग जारी है। हाल ही में पंजाब में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जब मोहाली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा के नाम के आगे 'स्थानांतरित' (Shifted) दर्ज हुआ, तो चड्ढा ने पंजाब की मान सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में आप नेताओं ने कहा था कि जब वे दिल्ली शिफ्ट हो चुके हैं और पंजाब में नहीं रहते, तो वे अपनी लापरवाही का ठीकरा पार्टी पर न फोड़ें।

अब गोवा के मंच से अरविंद केजरीवाल द्वारा दिए गए इस बयान ने साफ कर दिया है कि राघव चड्ढा और उनके साथियों के जाने का दर्द पार्टी नेतृत्व अभी तक भूला नहीं है और भविष्य में उच्च सदन के टिकट वितरण में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।