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September 14 2026 06:22 pm

खराब गेंद पर विकेट मिलने से खुश नहीं होते वरुण चक्रवर्ती: मिस्ट्री स्पिनर ने खोला सफलता का राज, बोले- 'मुझे जाकर ऐसा करना होगा

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भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने अपनी धारदार गेंदबाजी और हालिया शानदार फॉर्म के पीछे की कार्यप्रणाली व सोच पर बड़ा खुलासा किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े-बड़े बल्लेबाजों को अपनी गेंदों की विविधता से चकमा देने वाले वरुण का मानना है कि केवल विकेटों की संख्या से किसी गेंदबाज की असली गुणवत्ता तय नहीं होती। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें तब बिल्कुल खुशी नहीं मिलती जब किसी खराब या ढीली गेंद पर किस्मत के सहारे उन्हें विकेट मिल जाता है। वरुण के मुताबिक, उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि वे कितनी निरंतरता के साथ अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदें फेंक सकते हैं।

'खराब गेंद पर आउट होना मुझे संतोष नहीं देता': चक्रवर्ती

अपनी गेंदबाजी प्रक्रिया और मानसिक अनुशासन पर बात करते हुए वरुण चक्रवर्ती ने कहा:

"अगर मैंने कोई खराब या शॉर्ट पिच गेंद फेंकी और बल्लेबाज ने उसे सीधे फील्डर के हाथ में मार दिया और मुझे विकेट मिल गया, तो लोग स्कोरकार्ड देखकर तालियां बजा सकते हैं, लेकिन मुझे अंदर से खुशी या संतुष्टि नहीं मिलती। एक गेंदबाज के तौर पर आपको खुद के प्रति ईमानदार होना पड़ता है। मैं जानता हूं कि वह गेंद खराब थी और टी-20 जैसे खेल में अगली बार वही गेंद बाउंड्री के पार 6 रनों के लिए जा सकती है।'"

वरुण ने जोर देकर कहा कि वे किस्मत के भरोसे मिले विकेटों के बजाय उस विकेट को तरजीह देते हैं जो बल्लेबाज को पूरी तरह चकमा देकर या कई गेंदों के सेटअप के बाद योजना बनाकर हासिल किया गया हो।

'जाकर वही काम दोहराना होगा, यही नियम है'

मिस्ट्री स्पिनर ने टी-20 क्रिकेट की अनिश्चितता और गेंदबाज की असली जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए अपनी कार्यप्रणाली का नियम समझाया:

सटीकता और निरंतरता ही असली कुंजी: वरुण ने कहा, "टी-20 क्रिकेट बहुत तेज है। यहां हर मैच में नई चुनौती होती है। खेल का सबसे बुनियादी नियम यही है कि मुझे जाकर बार-बार सही टप्पे (Good Length) पर गेंद डालनी होगी और बल्लेबाज को गलती करने पर मजबूर करना होगा। यही नियम है और यही मेरी जिम्मेदारी है।'"

नतीजे के बजाय प्रक्रिया पर फोकस: उनका मानना है कि जब आप हर गेंद को शत-प्रतिशत निष्पादन (Execution) के साथ डालते हैं, तो विकेट अपने आप मिलते हैं। सिर्फ विकेट लेने की हड़बड़ी में अपनी लेंथ से भटक जाना गेंदबाज को नुकसान पहुंचाता है।

कमबैक के बाद बदले हुए वरुण चक्रवर्ती

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोबारा वापसी के बाद से वरुण चक्रवर्ती के आत्मविश्वास और लाइन-लेंथ में जमीन-आसमान का बदलाव देखा गया है:

स्पीड वेरिएशन पर काम: वरुण ने अपनी गेंदों की गति में विविधता लाकर बल्लेबाजों के फुटवर्क को बांधा है। वे अब सिर्फ कैरम बॉल या गुगली पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि क्रीज के कोण और गति के बदलाव से बल्लेबाजों को असहज करते हैं।

घरेलू क्रिकेट और नेट्स में बहाया पसीना: टीम से बाहर रहने के दौरान उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लंबे स्पेल फेंके, जिससे उनका शारीरिक स्टेमिना और एक ही टप्पे पर लगातार गेंद डालने की क्षमता काफी मजबूत हुई।

गंभीर और आत्म-विश्लेषी रवैया: मैच खत्म होने के बाद अपनी ही गेंदबाजी के वीडियो फुटेज देखकर गलतियों की पहचान करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।

वरुण चक्रवर्ती की यह सोच दर्शाती है कि वे केवल क्षणिक सफलता या स्कोरकार्ड की चमक-दमक के पीछे भागने वाले खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि अपनी कला को निखारने और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लगातार खुद को साबित करने वाले एक परिपक्व गेंदबाज के रूप में विकसित हो चुके हैं।