कांग्रेस से TMC, अब TMC से BJP की ओर! कौन हैं सुष्मिता देव जो अक्सर ‘बुरे वक्त’ में छोड़ देती हैं अपनी ही पार्टी का साथ

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर मची अभूतपूर्व भगदड़ थमने का नाम नहीं ले रही है। कोई विधायक पाला बदल रहा है, तो कोई सांसद पद से इस्तीफा देकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सीधी चुनौती दे रहा है।

बंगाल की इस सियासी रार में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कद्दावर राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने सुखेंदु शेखर रॉय के नक्शेकदम पर चलते हुए टीएमसी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि सुष्मिता देव बहुत जल्द भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं। दिलचस्प बात यह है कि सुष्मिता देव ने पहली बार किसी राजनीतिक दल का साथ उसके सबसे मुश्किल दौर में नहीं छोड़ा है, बल्कि इससे पहले साल 2021 में वे देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को भी ऐसे ही मोड़ पर अलविदा कह चुकी हैं।

कौन हैं सुष्मिता देव? पूर्व केंद्रीय मंत्री की बेटी और सोनिया-ममता की रहीं बेहद करीबी

मूल रूप से असम की रहने वाली सुष्मिता देव का नाता एक बेहद मजबूत और रसूखदार राजनीतिक परिवार से है। वह दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं। सुष्मिता देव ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और लंदन जैसी प्रतिष्ठित जगहों से कानून (Law) की उच्च शिक्षा हासिल की और लंबे समय तक कांग्रेस की मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय रहीं।

साल 2017 से 2021 तक उन्होंने 'अखिल भारतीय महिला कांग्रेस' के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने का काम किया। कांग्रेस के भीतर उन्हें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद और करीबी रणनीतिकारों में गिना जाता था। वहीं, जब उन्होंने पाला बदलकर टीएमसी का दामन थामा, तो वहां भी उनकी गिनती ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सबसे कोर ग्रुप के नेताओं में होने लगी थी।

जब 2019 की हार के बाद कांग्रेस का हाथ छोड़ थाम लिया था 'घास-फूल'

सुष्मिता देव असम की सिलचर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुकी हैं। हालांकि, साल 2019 के आम चुनाव में उन्हें भाजपा के उम्मीदवार राजदीप रॉय के हाथों एक करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। साल 2019 का वह दौर कांग्रेस के लिए भी बेहद निराशाजनक था, जहां पार्टी लगातार दूसरी बार आम चुनाव हारकर महज 52 सीटों पर सिमट गई थी।

पार्टी के इस बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण समय में सुष्मिता देव ने अगस्त 2021 में कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया और सीधे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं। टीएमसी ने पूर्वोत्तर भारत (असम और त्रिपुरा) में अपनी पार्टी का विस्तार करने के लिए सुष्मिता देव को एक बड़े राष्ट्रीय चेहरे के रूप में पेश किया और उन्हें राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने की खुली छूट दी।

ममता बनर्जी ने दो बार भेजा राज्यसभा, अब सभापति ने मंजूर किया इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने सुष्मिता देव को बड़ा इनाम देते हुए अगस्त 2021 में पहली बार पश्चिम बंगाल कोटे से राज्यसभा भेजा। इसके बाद पार्टी ने उनके काम पर भरोसा जताते हुए साल 2024 में उन्हें दोबारा उच्च सदन (Rajya Sabha) का टिकट दिया और वे फिर से सांसद चुनी गईं।

लेकिन बुधवार, 10 जून को उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय संगठन और राज्यसभा की सदस्यता से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव का इस्तीफा सदन के सभापति सी पी राधाकृष्णन द्वारा 10 जून, 2026 से तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया गया है।

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा से सीक्रेट मुलाकात, भाजपा में जाने की तैयारी!

टीएमसी और राज्यसभा से इस्तीफा देने के ठीक बाद सुष्मिता देव ने नई दिल्ली में असम के ताकतवर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद से ही असम और बंगाल की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

चूंकि सुष्मिता देव की जमीनी राजनीति का मुख्य केंद्र हमेशा से असम का सिलचर और बराक घाटी का इलाका रहा है, इसलिए राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वह बहुत जल्द दिल्ली या गुवाहाटी में भाजपा की सदस्यता ले सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो सुष्मिता देव आने वाले दिनों में असम में भाजपा के संगठन को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा चेहरा साबित हो सकती हैं, जबकि बिखरती टीएमसी के लिए यह एक ऐसा घाव है जिसे भर पाना ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं होगा।