'बरसात के मौसम में...' नसीरुद्दीन शाह पर फिल्माया यह आइकॉनिक गाना किस मशहूर कवि ने लिखा था? जानिए सुदर्शन फाकिर के यादगार गीतों की दास्तान
90 के दशक का बॉलीवुड संगीत आज भी लोगों के दिलों में एक खास जगह रखता है। साल 1995 में महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म 'नाजायज' (Naajayaz) यूं तो बॉक्स ऑफिस पर सेमी-हिट रही थी, लेकिन इसका एक गाना आज भी हर संगीत प्रेमी की जुबान पर रहता है— "बरसात के मौसम में तन्हाई के आलम में, मैं घर से निकल आया बोतल भी उठा लाया..."
दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पर फिल्माया गया यह गाना एक मजबूर बाप की बेबसी और उसके जज्बातों को बेहद खूबसूरत तरीके से बयां करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल को छू लेने वाले इस आइकॉनिक नगमे को किस महान कवि और गीतकार ने लिखा था?
आइए जानते हैं इस अमर गीत को रचने वाले मशहूर कवि सुदर्शन फाकिर (Sudarshan Faakir) की जिंदगी और उनके यादगार योगदान के बारे में।
फिल्म 'नाजायज' और गाने की पृष्ठभूमि
फिल्म 'नाजायज' में अजय देवगन, जूही चावला, दीपक तिजोरी, रीमा लागू और नसीरुद्दीन शाह मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म की कहानी एक ईमानदार पुलिस अफसर (अजय देवगन) और उसके जैविक पिता (नसीरुद्दीन शाह) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शहर का एक बड़ा क्रिमिनल होता है।
बाप-बेटे की इसी कशमकश और आमने-सामने की मुलाकात के दौर में यह गाना आता है।
कलाकार: नसीरुद्दीन शाह (स्क्रीन पर)
गायक: कुमार सानू और रूप कुमार राठौड़
गीतकार: सुदर्शन फाकिर
संगीत: अनु मलिक
नसीरुद्दीन शाह ने स्क्रीन पर एक ऐसे लाचार पिता का किरदार इतनी शिद्दत से निभाया, जो सामने खड़े अपने ही बेटे को 'बेटा' नहीं कह सकता था।
NCC का 'राष्ट्रगीत' रचने वाले महान कवि: कौन थे सुदर्शन फाकिर?
सुदर्शन फाकिर हिंदी और उर्दू साहित्य का एक ऐसा नाम थे, जिनकी कविताओं और गजलों में प्यार, दर्द और मानवीय एहसासों को बेहद सरल शब्दों में पिरोया जाता था। उनकी लेखनी में इतनी गहराई थी कि पाठक और श्रोता उनकी रचनाओं को बार-बार सुनने के लिए मजबूर हो जाते थे।
उनकी बहुमुखी प्रतिभा का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि उन्होंने नेशनल कैडेट कोर (NCC) का आधिकारिक गीत "हम सब भारतीय हैं" लिखा था, जो देश भर के युवाओं में देशभक्ति का जज्बा भरता है।
सुदर्शन फाकिर के सबसे यादगार नगमे
सुदर्शन फाकिर ने बॉलीवुड फिल्मों से लेकर जगजीत सिंह जैसी महान हस्तियों की गजलों के लिए कालजयी रचनाएं लिखीं:
| गाना / रचना | फिल्म / एल्बम | खास बात |
|---|---|---|
| बरसात के मौसम में | नाजायज (1995) | 90 के दशक का सबसे लोकप्रिय वाइन/इमोशनल सॉन्ग |
| हम सब भारतीय हैं | NCC एंथम | देश के लाखों NCC कैडेट्स का प्रेरणादायक गीत |
| जिंदगी जिंदगी मेरे घर आना | दूरियां (1979) | जीवन और रिश्तों की सादगी पर आधारित मास्टरपीस |
| हो जाता है कैसे प्यार | यलगार (1992) | रोमांटिक गानों में एक बेहद खूबसूरत नगमा |
| फिर आज मुझे तुमको बताना है | आज (1987) | संवाद शैली में लिखा गया भावुक गीत |
जगजीत सिंह संग जुगलबंदी और निजी जीवन
फिल्मों के अलावा गजल गायकी की दुनिया में सुदर्शन फाकिर और गजल सम्राट जगजीत सिंह की जोड़ी बेहद मशहूर थी। जगजीत सिंह ने फाकिर साहब की कई गजलों को अपनी आवाज देकर अमर बना दिया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: सुदर्शन फाकिर ने सुदेश नामा से विवाह किया। उनका एक बेटा 'मानव फाकिर' भी फिल्म इंडस्ट्री और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय रहा है।
अंतिम सफर: साल 2008 में इस महान कवि और गीतकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके लिखे नगमे आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।
साहित्य जगत में स्थान:
सुदर्शन फाकिर उन चुनिंदा गीतकारों में से थे जिन्होंने कभी भी व्यावसायिकता के लिए अपनी शायरी के स्तर से समझौता नहीं किया। उनके लिखे गीतों की सादगी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।