जब शाहरुख खान के नाना ने लाल किले से उखाड़ फेंका अंग्रेजों का झंडा! मिली थी फांसी की सजा, जानें किसने बचाई जान
बॉलीवुड के 'किंग' यानी शाहरुख खान आज दुनिया भर में अपनी अदाकारी और मुकाम के लिए जाने जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शाहरुख खान का परिवार एक बेहद समृद्ध, पढ़ा-लिखा और स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ परिवार रहा है।
शाहरुख के पिता ताज मोहम्मद खान खुद एक स्वतंत्रता सेनानी थे, वहीं उनके नाना मेजर जनरल शाहनवाज खान का नाम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। लाल किले से अंग्रेजों का झंडा उखाड़ फेंकने वाले सेनानियों में उनका नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है।
आजाद हिंद फौज में भूमिका और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ाव
शाहरुख खान की मां लतीफ फातिमा खान, मेजर जनरल शाहनवाज खान की गोद ली हुई बेटी थीं। द्वितीय विश्व युद्ध (1942) के दौरान शाहनवाज ब्रिटिश-इंडियन आर्मी में अधिकारी थे और साउथ एशिया में जापानी सेना के खिलाफ लड़ रहे थे।
युद्ध के दौरान जापानी सेना ने उन्हें बंदी बना लिया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के हवाले कर दिया। नेताजी के विचारों और देशभक्ति से प्रभावित होकर शाहनवाज इंडियन नेशनल आर्मी (INA / आजाद हिंद फौज) में शामिल हो गए। वे नेताजी के बेहद करीबी बने और INA के मेजर जनरल पद तक पहुंचे।
लाल किला केस (INA Trials): जब मिली फांसी की सजा
द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने आजाद हिंद फौज के अधिकारियों पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया। शाहनवाज खान और उनके साथियों को गिरफ्तार कर दिल्ली के लाल किले में ऐतिहासिक मुकदमे (Red Fort Trials) का सामना करना पड़ा।
फांसी का फरमान: अंग्रेजों की सैन्य अदालत ने शाहनवाज खान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुना दी।
देशभर में आक्रोश: इस फैसले के खिलाफ पूरे देश में जनआक्रोश फैल गया।
पंडित नेहरू का हस्तक्षेप: देश के भावी प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने वकालत का काला कोट पहनकर शाहनवाज खान और उनके साथियों के बचाव में कोर्ट में ऐतिहासिक याचिका दायर की।
अंग्रेजों का झुकना: जनता के भारी दबाव और कानूनी पैरवी के कारण तत्कालीन ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल क्लॉड औचिनलेक (Claude Auchinleck) को झुकना पड़ा और फांसी की सजा को रद्द कर केवल जुर्माना लगाकर उन्हें रिहा किया गया।
आजादी के बाद शाहनवाज खान कांग्रेस में शामिल हुए और मेरठ से तीन बार लोकसभा सांसद चुने गए।
शाहरुख खान की मां: ऑक्सफोर्ड की छात्रा और इंदिरा गांधी से खास रिश्ता
शाहरुख खान की मां लतीफ फातिमा खान अपने जमाने की एक बेहद शिक्षित और प्रभावशाली महिला थीं:
उन्होंने ब्रिटेन की प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी।
वे भारत की शुरुआती रैंक-होल्डर महिला मजिस्ट्रेटों में शामिल थीं।
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ उनके पारिवारिक और निजी संबंध बेहद प्रगाढ़ थे।
शाहरुख खान का पारिवारिक इतिहास: एक नज़र में
| पारिवारिक सदस्य | पहचान व योगदान | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| शाहनवाज खान (नाना) | आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल | लाल किला केस में नेहरू जी ने बचाई जान, 3 बार MP रहे। |
| ताज मोहम्मद (पिता) | स्वतंत्रता सेनानी | भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका। |
| लतीफ फातिमा (मां) | ऑक्सफोर्ड ग्रेजुएट व मजिस्ट्रेट | पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की करीबी सहयोगी। |
| शाहरुख खान | बॉलीवुड सुपरस्टार | टेलीविजन 'फौजी' से शुरुआत, 'किंग ऑफ बॉलीवुड' बने। |
इतिहास के पन्नों से:
"लाल किले से आजाद हिंद फौज के लाल-बाल-पाल और शाहनवाज पर चले मुकदमे ने भारत में आजादी की आखिरी लहर पैदा कर दी थी। शाहनवाज खान की देशभक्ति ने लाखों युवाओं को प्रेरित किया था।"
छोटे पर्दे के 'फौजी' से बॉलीवुड के 'किंग' तक का सफर
देशभक्ति के संस्कारों में पले-बढ़े शाहरुख खान ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत भी दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक 'फौजी' और 'सर्कस' से की थी। इसके बाद 1992 में फिल्म 'दीवाना' से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा।
'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'स्वदेस', 'चक दे! इंडिया', 'वीर-जारा' से लेकर हालिया ब्लॉकबस्टर 'पठान' और 'जवान' तक शाहरुख ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर राज किया, बल्कि भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान भी दिलाई। इन दिनों वे अपनी आगामी बहुचर्चित फिल्म 'किंग' (King) को लेकर चर्चा में हैं।