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May 04 2026 08:31 pm

मिस्टर परफेक्शनिस्ट ने जब बिना स्क्रिप्ट पढ़े साइन की फिल्में, आमिर खान बोले- 'पापा के डर से नहीं पूछ पाया कहानी'

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India News Live,Digital Desk : बॉलीवुड में 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' के नाम से मशहूर आमिर खान आज अपनी फिल्मों के चुनाव और बारीकियों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमेशा स्क्रिप्ट को तौलने वाले आमिर ने अपने करियर में दो फिल्में ऐसी भी कीं, जिनकी उन्होंने कहानी तक नहीं सुनी थी? हाल ही में कॉमेडियन जाकिर खान के साथ एक बातचीत में आमिर ने अपनी जिंदगी के इस दिलचस्प और भावनात्मक किस्से से पर्दा उठाया है। आमिर ने कुबूल किया कि अपने पिता ताहिर हुसैन के प्रति सम्मान और उनके डर की वजह से उन्होंने बिना स्क्रिप्ट पढ़े ही फिल्मों के लिए 'हां' कह दिया था।

देव आनंद और पिता के सामने नहीं चली आमिर की जिद

किस्सा फिल्म 'अव्वल नंबर' का है। आमिर ने बताया कि एक दिन उनके पिता ने उनसे कहा कि दिग्गज अभिनेता देव आनंद उनसे मिलना चाहते हैं। चौंकाने वाली बात यह थी कि ताहिर हुसैन साहब ने आमिर से पूछे बिना ही देव आनंद को फिल्म के लिए हामी भर दी थी। आमिर ने कहा, "जब मैंने पापा से कहा कि मैं पहले स्क्रिप्ट सुनना चाहता हूं और फिर फैसला लूंगा, तो उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे। तुम कहानी नहीं पूछोगे, बस जाओगे और हां कह दोगे।" आमिर ने बताया कि वह अपने पिता से बहुत डरते थे, इसलिए बिना कुछ पूछे फिल्म साइन कर आए।

पिता के '3 घंटे के भाषण' ने चुप करा दिया था मिस्टर परफेक्शनिस्ट को

दूसरी फिल्म थी 'तुम मेरे हो', जिसे खुद आमिर के पिता ताहिर हुसैन बना रहे थे। जब आमिर ने अपने पिता से इस फिल्म की कहानी जानने की कोशिश की, तो उन्हें एक लंबा-चौड़ा लेक्चर सुनना पड़ा। आमिर के मुताबिक, उनके पिता ने कहा, "हम तीस साल से फिल्में बना रहे हैं और तुम अब मुझसे कहानी पूछ रहे हो?" आमिर ने हंसते हुए बताया कि उन्हें इसके बाद पिता का 3 घंटे का लंबा भाषण सुनना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने हार मान ली और कहा, "ठीक है पापा, कहानी रहने दीजिए, आप बस फिल्म बनाइए।"

भावनात्मक फैसलों का परिणाम

आमिर खान ने मजाकिया अंदाज में यह भी जोड़ा कि दर्शकों ने उनकी जो अन्य फिल्में देखी हैं, उनके लिए वे उन्हें (आमिर को) दोषी ठहरा सकते हैं क्योंकि उनकी स्क्रिप्ट उन्होंने खुद चुनी थी। लेकिन इन दो फिल्मों के मामले में वह पूरी तरह से भावनात्मक थे। आमिर की यह बातें दिखाती हैं कि करियर के शुरुआती दौर में वह अपने पिता की बात को कितना महत्व देते थे। भले ही आज वह स्क्रिप्ट के मास्टर कहलाते हों, लेकिन कभी वह भी एक आज्ञाकारी बेटे के तौर पर बिना कहानी जाने सेट पर पहुंच जाया करते थे।