पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वीकेंड पर सफारी और घूमना हुआ महंगा: सैलानियों को अब चुकाने होंगे इतने रुपये, 1.96 करोड़ का बजट मंजूर
उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में घूमने जाने वाले सैलानियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। वीकेंड यानी शनिवार और रविवार के दिन टाइगर रिजर्व में घूमना अब महंगा हो गया है। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में हुई पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन की शासी निकाय की बैठक में पर्यटन सत्र 2026-27 के लिए नई दरों और कई विकास प्रस्तावों को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही पार्क के विकास और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 1.96 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट भी मंजूर किया गया है।
नई पर्यटन दरें: भारतीय और विदेशी सैलानियों के लिए बदला शुल्क
सैलानियों की बढ़ती संख्या और पार्क के प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से टिकट दरों में आंशिक संशोधन किया गया है:
भारतीय पर्यटकों के लिए (वीकेंड): शनिवार और रविवार के दिन पर्यटकों को अब 150 रुपये की बजाय 200 रुपये प्रति व्यक्ति का टिकट लेना होगा।
सामान्य दिनों में शुल्क: सप्ताह के बाकी दिनों (सोमवार से शुक्रवार) में प्रवेश शुल्क पहले की तरह ही 120 रुपये प्रति व्यक्ति ही रहेगा।
विदेशी पर्यटकों के लिए: विदेशी सैलानियों के लिए वीकेंड या अन्य दिनों का शुल्क 800 रुपये से बढ़ाकर सीधा 1000 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया है।
ईको-टूरिज्म और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम पर जोर
लखनऊ में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में वन राज्य मंत्री केपी मलिक, प्रमुख सचिव वन वी. हेकाली झिमोमी और प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान वन मंत्री ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने निर्देश दिए कि संघर्ष से प्रभावित ग्रामीणों और उनके परिवारों के प्रति पूरी संवेदनशीलता बरती जाए और सरकार द्वारा मिलने वाली सहायता राशि व सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं।
प्रमुख सचिव वन ने बताया कि फाउंडेशन की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए स्वैच्छिक दानदाताओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। जंगल में पर्यावरण संरक्षण के कड़े मानकों का पालन करते हुए पर्यटकों को आधुनिक और पर्यावरण-मित्र सुविधाएं मुहैया कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।