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September 12 2026 02:16 am

बसपा में बड़ा भूचाल: ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद भी मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला

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उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे और पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त (बाहर) करने का बड़ा ऐलान कर दिया है। यह पूरा घटनाक्रम आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लिए जाने के ठीक बाद सामने आया है। मायावती के इस कड़े कदम से यूपी की सियासत में जबरदस्त भूचाल आ गया है।

ससुर के संन्यास में देरी और आकाश द्वारा रीपोस्ट न करने से भड़कीं मायावती

इस सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब मायावती ने शर्त रखी थी कि यदि अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह से राजनीति से संन्यास ले लेते हैं, तभी आकाश आनंद के भविष्य और उनकी पार्टी में वापसी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। इस शर्त के बाद अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लंबा पत्र लिखकर राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया।

हालांकि, मायावती ने उनके इस कदम को "देर से उठाया गया सही कदम" करार दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अशोक सिद्धार्थ ने यह फैसला लेने में बहुत देर कर दी। मायावती का गुस्सा इस बात पर सबसे ज्यादा फूटा कि आकाश आनंद ने अपने ससुर से जुड़ी उस आधिकारिक पोस्ट को अपने अकाउंट से रीपोस्ट तक नहीं किया, जिसमें उनके भविष्य को सुधारने के लिए यह शर्त रखी गई थी।

'दोहरी मानसिकता' और पारिवारिक मोह को बताया बड़ी वजह

मायावती ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कड़े शब्दों में कहा कि आकाश आनंद का अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति मोह और पारिवारिक लगाव पार्टी हित और खुद के राजनीतिक करियर से कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति 'दोहरी मानसिकता' (Double-minded) के साथ पार्टी में रहेगा और संगठन के हितों से ऊपर परिवार को रखेगा, वह बहुजन मूवमेंट के लिए समर्पित होकर काम नहीं कर सकता। इसी अनुशासनहीनता और मतभेदों के चलते मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया है।