बसपा में बड़ा भूचाल: ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के ऐलान के बावजूद मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निकाला
उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान अपने चरम पर पहुंच गया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के बीच चल रहे सियासी ड्रामे में नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। बुधवार को मायावती ने एक शर्त रखी थी कि यदि आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेते हैं, तो आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है। इस शर्त के बाद गुरुवार को अशोक सिद्धार्थ ने औपचारिक रूप से राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया। लेकिन इसके कुछ ही देर बाद मायावती ने बड़ा कदम उठाते हुए आकाश आनंद को पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। मायावती ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास लेने में बहुत देर कर दी, जिसके चलते यह कड़ा निर्णय लेना पड़ा।
कौन हैं अशोक सिद्धार्थ और क्यों गहराया विवाद?
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के कायमगंज के रहने वाले डॉ. अशोक सिद्धार्थ ने मेडिकल कॉलेज झांसी से ऑर्थोमेट्री में डिप्लोमा किया है। सरकारी सेवा (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) के दौरान वे वामसेफ (BAMCEF) संगठन से जुड़े रहे और वर्ष 2007 में सरकारी नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक रूप से बसपा में शामिल हो गए। पार्टी प्रमुख मायावती ने उन्हें 2009 में विधान परिषद (MLC) और 2016 में राज्यसभा का सदस्य बनाया। इसके अलावा उन्हें कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित पांच राज्यों का जोनल कोऑर्डिनेटर व राष्ट्रीय सचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। उनकी पत्नी सुनीता सिद्धार्थ भी 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। मार्च 2023 में अशोक सिद्धार्थ की बेटी डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ का विवाह मायावती के भतीजे और उत्तराधिकारी आकाश आनंद के साथ हुआ था, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में इस परिवार का प्रभाव और चर्चाएं काफी बढ़ गई थीं।
समधी का असर और आकाश आनंद के करियर पर ग्रहण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ रही आंतरिक कलह और फैसलों में अत्यधिक दखलअंदाजी के कारण मायावती और अशोक सिद्धार्थ के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं। वर्ष 2025 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला भी गया था, हालांकि बाद में वापसी हुई लेकिन दूरियां कम नहीं हुईं। साल 2026 में एक बार फिर मायावती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। चूंकि अशोक सिद्धार्थ आकाश आनंद के ससुर हैं, इसलिए पार्टी के भीतर यह चर्चा आम रही कि 'समधी की नाराजगी का गुस्सा दामाद यानी आकाश आनंद पर उतर रहा है।' मायावती के ताजा फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी संगठन में अनुशासनहीनता और पारिवारिक समीकरणों के टकराव को लेकर सुप्रीमो किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं।