रील लाइफ का 'विजय' अब रियल लाइफ के 'मैदान' में क्या सुपरहिट फिल्मों की तरह हिट होगी थलपति की राजनीति?
India News Live, Digital Desk: दक्षिण भारतीय सिनेमा के 'थलापति' यानी विजय अब अपनी फिल्मी पारी को पीछे छोड़ राजनीति के अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि विजय का यह राजनीतिक सफर उनकी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं लगता। जानकारों की मानें तो विजय की फिल्मों के 'प्लॉट' और उनके वास्तविक राजनीतिक जीवन में ऐसी गजब की समानताएं हैं, जो यह संकेत देती हैं कि उनके नेता बनने की स्क्रिप्ट बहुत पहले ही लिखी जा चुकी थी। आइए जानते हैं कैसे विजय की ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उनके मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को हवा दी।
'सरकार' और 'सर्किल': जब रील में बदला था सिस्टम विजय की फिल्म 'सरकार' (Sarkar) को कौन भूल सकता है? इस फिल्म में उन्होंने एक एनआरआई कॉर्पोरेट दिग्गज की भूमिका निभाई थी जो अपना वोट डालने भारत आता है और फिर करप्ट सिस्टम से भिड़ जाता है। हकीकत में भी विजय अब अपनी नई पार्टी 'तमिझगा वेत्री कड़गम' (TVK) के जरिए कुछ ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं। जिस तरह फिल्म में उन्होंने आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया था, आज वे अपनी रैलियों में द्रविड़ राजनीति के पुराने किलों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
'मेर्सल' के विलेन और रियल लाइफ की चुनौतियां फिल्म 'मेर्सल' (Mersal) में विजय ने स्वास्थ्य व्यवस्था और जीएसटी जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की थी, जिसके बाद काफी राजनीतिक विवाद भी हुआ था। आज जब वे चुनावी मैदान में हैं, तो उनके मुद्दे वही हैं भ्रष्टाचार, शिक्षा और आम आदमी की बुनियादी जरूरतें। फिल्मों की तरह ही अब वे रियल लाइफ में भी सत्ताधारी दलों के निशाने पर हैं। विजय का फिल्मों में 'मसीहा' वाला अवतार अब उनके राजनीतिक विजन का आधार बनता जा रहा है।
फैंस से 'कॉमन मैन' तक का सफर विजय की फिल्मों की एक और खासियत रही है जमीनी स्तर से जुड़ाव। 'कथ्थी' (Kaththi) में किसानों के लिए लड़ना हो या 'थुपक्की' (Thuppakki) में देश की सुरक्षा, विजय ने हमेशा 'कॉमन मैन' की छवि को भुनाया है। उनके राजनीतिक सलाहकार भी इसी छवि का इस्तेमाल ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक मानते हैं कि जिस तरह विजय ने फिल्मों में बड़ी-बड़ी बाधाओं को पार किया, वैसे ही वे 2026 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की राजनीति का चेहरा बदल देंगे।
क्या बॉक्स ऑफिस की तरह सफल होगी टीवीके? विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फिल्मी पर्दे की लोकप्रियता को वोट में कैसे बदला जाए। रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गजों ने भी राजनीति में हाथ आजमाया, लेकिन सफलता का ग्राफ अलग रहा। हालांकि, विजय की पार्टी 'टीवीके' को जिस तरह का जनसमर्थन मिल रहा है, उससे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के खेमों में हलचल तेज है। अब देखना यह है कि 2026 के 'क्लाइमेक्स' में विजय का राजनीतिक उदय किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह सुखद अंत वाला होता है या नहीं।