लखनऊ विकास प्राधिकरण में बड़े घूसकांड पर विजिलेंस का करारा वार, 11 इंजीनियरों और एक PCS अफसर के खिलाफ जांच शुरू
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में सामने आए बहुचर्चित घूसकांड के बाद प्रशासनिक और जांच एजेंसियों के गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है। भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एलडीए के 11 इंजीनियरों और एक वरिष्ठ प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी के खिलाफ औपचारिक रूप से प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। इस जांच के शुरू होते ही विजिलेंस की टीम ने एलडीए मुख्यालय पर धावा बोला और संबंधित अधिकारियों व अभियंताओं के कमरों व प्रवर्तन अनुभागों से जुड़े रिकॉर्ड्स को कब्जे में लेकर गहन छानबीन शुरू कर दी है।
जांच के दायरे में आए अधिकारियों और अभियंताओं पर आरोप है कि वे लंबे समय से राजधानी में अवैध निर्माणों को संरक्षण दे रहे थे, जनसुनवाई और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर आने वाली शिकायतों में हेरफेर कर रहे थे तथा बिचौलियों व दलालों के माध्यम से बिल्डरों व भवन स्वामियों से लाखों रुपये की अवैध वसूली कर रहे थे। विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक जिन 11 अभियंताओं के खिलाफ जांच चल रही है, उनमें से एक इंजीनियर हाल ही में सेवानिवृत्त हो चुका है, जबकि बाकी 10 इंजीनियर और एक पीसीएस अधिकारी वर्तमान में विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
विजिलेंस विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम अचानक गोमती नगर स्थित एलडीए मुख्यालय पहुंची और करीब ढाई घंटे तक अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ गहन पूछताछ की। टीम ने उन सभी फाइलों और दस्तावेजों को जब्त किया, जिनसे जुड़े मामलों में अवैध निर्माणों को सील न करने या सीलिंग हटाने के एवज में रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे। जांच एजेंसी के हाथ कई ऐसे ठोस साक्ष्य भी लगे हैं, जिनमें अभियंताओं और बिचौलियों के बीच लेन-देन से जुड़ी फोन पर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल है। इन रिकॉर्डिंग्स में साफ तौर पर रिश्वत की रकम तय करने और शिकायतों को दबाने की डील होती सुनाई दे रही है।
दलालों का सिंडिकेट, 18 कथित पत्रकार और आईजीआरएस पोर्टल का खेल
एलडीए घूसकांड की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे भ्रष्टाचार के एक संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश हो रहा है। विजिलेंस की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि केवल एलडीए के अधिकारी और इंजीनियर ही इस घूसकांड में शामिल नहीं थे, बल्कि उनके साथ कुछ बाहरी तत्वों, बिचौलियों और कथित पत्रकारों का एक बड़ा गिरोह काम कर रहा था। जांच एजेंसी ने आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर सबसे अधिक शिकायतें दर्ज कराने वाले 18 कथित पत्रकारों को भी जांच के रडार पर ले लिया है।
जांच के अनुसार, यह सिंडिकेट बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था:
शिकायत का हथियार: सबसे पहले कथित पत्रकार या ब्लैकमेलर आईजीआरएस पोर्टल पर किसी भी नई निर्माणाधीन इमारत या बिना नक्शा पास कराए बन रहे व्यावसायिक परिसर की शिकायत दर्ज कराते थे।
इंजीनियरों की सांठगांठ: शिकायत दर्ज होते ही संबंधित जोनल क्षेत्र के जेई और एई (इंजीनियर) भवन स्वामी पर सीलिंग या डिमोलिशन का दबाव बनाते थे।
रेट कार्ड और वसूली: प्रति मंजिल के हिसाब से ढाई लाख से पांच लाख रुपये तक की अवैध वसूली तय की जाती थी। पैसा मिलने के बाद शिकायतकर्ता कथित पत्रकार से झूठी आख्या लगवाकर या शिकायत वापस कराकर फाइल को बंद कर दिया जाता था।
ऑनलाइन पेमेंट का खुलासा: हाल ही में एलडीए के एक जेई के एजेंट द्वारा बिल्डर से ऑनलाइन 70 हजार रुपये का एडवांस रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद इस पूरे नेक्सस का भांडाफोड़ हुआ था।
विजिलेंस अब इन 18 कथित शिकायतकर्ताओं के पिछले तीन वर्षों के बैकग्राउंड, उनकी वित्तीय स्थिति और उनके द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर की गई सैकड़ों शिकायतों के पैटर्न की जांच कर रही है। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि शिकायतें वास्तव में नागरिक जनहित में की गई थीं या फिर उनका एकमात्र उद्देश्य भवन स्वामियों को डरा-धमकाकर एलडीए अभियंताओं के साथ मिलकर अवैध उगाही करना था।
इसके साथ ही, हाल ही में अलीगंज स्थित बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शासन स्तर से निलंबित किए गए एलडीए के इंजीनियरों की भूमिका को भी विजिलेंस की इस प्राथमिक जांच में जोड़ दिया गया है। उस अग्निकांड में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर चलाई जा रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के कारण 15 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। एसआईटी और विजिलेंस की टीमें अब 2016 से लेकर 2026 तक अलीगंज और अन्य संवेदनशील प्रवर्तन जोनों में तैनात रहे अभियंताओं, प्रवर्तन प्रभारियों और पीसीएस अधिकारियों की संपत्तियों व उनके फैसलों की फाइलों का मिलान कर रही हैं।
एलडीए के नए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने घूसकांड की भनक लगते ही प्रशासनिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दागी और संदिग्ध छवि वाले कई जोनल अधिकारियों और अभियंताओं की कुर्सियां बदलते हुए पूरे प्रवर्तन तंत्र का बड़ा फेरबदल कर दिया है। इसके अतिरिक्त, शहर में 51 चिन्हित अवैध व्यावसायिक इमारतों पर बुलडोजर चलाने और उन्हें सील करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
विजिलेंस की इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई से एलडीए कर्मचारियों और अधिकारियों में भारी हड़कंप व्याप्त है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों, फोन कॉल रिकॉर्डिंग्स और बैंक खातों के स्टेटमेंट का मिलान पूरा होते ही दोषी अधिकारियों और उनके दलालों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।