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October 11 2026 12:05 am

हिरासत में अभिजीत दीपके को दी गई दादी के निधन की खबर: पुलिस ने दी गांव लौटने की छूट

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके को पुलिस हिरासत में ही उनकी 85 वर्षीय दादी सावित्रीबाई शंकरराव दीपके के निधन की दुखद सूचना दे दी गई है। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित पैतृक गांव संतुक पिंपरी में लंबी बीमारी के बाद शनिवार को उनकी दादी ने अंतिम सांस ली। इस निजी त्रासदी के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दीपके और उनका संगठन इस आंदोलन को फिलहाल स्थगित करेंगे या विरोध का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

दिल्ली पुलिस ने दी पैतृक गांव जाने की अनुमति

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने अभिजीत दीपके को तुरंत उनके पैतृक गांव हिंगोली जाने और अंतिम संस्कार में शामिल होने का विकल्प दिया है।

परिजनों के अनुसार, दादी का अंतिम संस्कार रविवार सुबह गांव में होना तय किया गया है।

पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि वे पारिवारिक शोक और अंतिम रस्मों के लिए महाराष्ट्र लौटना चाहते हैं, तो आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं (अंडरटेकिंग) के साथ उन्हें तुरंत रवाना होने की व्यवस्था दी जा रही है।

कानूनी टीम दीपके को तत्काल फ्लाइट के जरिए महाराष्ट्र भेजने की प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुटी है ताकि वे समय पर अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें।

क्या खत्म होगा प्रोटेस्ट? CJP ने रुख किया साफ

अभिजीत दीपके पर टूटे इस पारिवारिक वज्रपात के बावजूद उनके संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने साफ संकेत दिया है कि मुख्य आंदोलन को वापस लेने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है:

'मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन': CJP कोर कमेटी के नेता अजिंक्य शिंदे ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए स्पष्ट किया कि अभिजीत दीपके के व्यक्तिगत पारिवारिक दुख में पूरा संगठन उनके साथ खड़ा है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे और चुनावी सुधारों की मांग पर शुरू हुआ आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती।

लीडरशिप का बंटवारा: दीपके की गैर-मौजूदगी में संगठन के अन्य छात्र नेता, कानूनी टीम और सहयोगी संगठन दिल्ली में आंदोलन की कमान संभालेंगे।

सहानुभूति और नैतिक दबाव: समर्थकों का तर्क है कि दीपके के हिरासत में रहने के दौरान परिवार में हुई इस क्षति ने जमीनी कार्यकर्ताओं में भावनात्मक आक्रोश और बढ़ा दिया है। ऐसे में आंदोलन को पूरी तरह खत्म करने के बजाय इसे सांकेतिक धरने और कानूनी लड़ाई के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।

आगे की राह: व्यक्तिगत शोक बनाम आंदोलन की चुनौती

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिजीत दीपके के लिए इस समय प्राथमिकता अपने शोकाकुल परिवार के बीच पहुंचना ही होगी। ऐसे में वे व्यक्तिगत रूप से कुछ दिनों के लिए दिल्ली के सियासी परिदृश्य से दूर रह सकते हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई धारा 163, सीमाओं पर कड़ी नाकेबंदी और आयोजकों की धरपकड़ के कारण दिल्ली की सड़कों पर बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाना पहले ही लगभग नामुमकिन बना हुआ है। संगठन भले ही आंदोलन को जारी रखने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि संस्थापक की अनुपस्थिति और प्रशासनिक सख्ती के चलते यह प्रदर्शन फिलहाल सड़क पर बड़े टकराव के बजाय डिजिटल अभियानों और अदालती याचिकाओं तक सीमित हो सकता है।