मनरेगा की जगह नया कानून लाने पर संसद में हंगामा, शशि थरूर ने गांधी नाम हटाने का किया विरोध
India News Live,Digital Desk : लोकसभा में मंगलवार को उस वक्त भारी हंगामा देखने को मिला, जब केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह नया कानून लाने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष ने इसे गरीबों और ग्रामीण भारत की मूल भावना पर हमला बताया।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीछे ले जाने वाला कदम” करार दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता के साथ अन्याय है और यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है।
गांधी के विचारों पर हमला: थरूर
तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने सदन में कहा कि गांधीजी का नाम इस योजना से गहराई से जुड़ा था। यह योजना सिर्फ रोजगार देने की नहीं, बल्कि ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर गांव और सामाजिक न्याय की अवधारणा पर आधारित थी।
थरूर ने गांधीजी के “राम राज्य” के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कोई राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि एक ऐसी सामाजिक-आर्थिक सोच थी, जिसमें गांवों को सशक्त बनाना केंद्र में था। उनका कहना था कि गांधीजी का नाम हटाने से इस योजना की नैतिक दिशा और ऐतिहासिक पहचान दोनों कमजोर हो जाएंगी।
बिल के नाम पर भी उठाए सवाल
शशि थरूर ने नए कानून के नाम पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बिल के नाम में दो भाषाओं का इस्तेमाल केवल “जी राम जी” जैसा शब्द बनाने के लिए किया गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 348 की भावना के खिलाफ प्रतीत होता है।
अपने भाषण के अंत में थरूर ने हल्के व्यंग्य के साथ एक पुराना गीत गुनगुनाया—
“राम का नाम बदनाम मत करो”
उनके इस अंदाज पर सदन कुछ क्षण के लिए शांत हो गया, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने जोरदार तालियां बजाईं।
क्या है नया कानून?
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025 पेश किया, जिसे संक्षेप में वीबी-जी राम जी बिल कहा जा रहा है।
इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है, जो मौजूदा मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है। बिल के लागू होने के बाद राज्यों को छह महीने के भीतर अपनी योजनाएं इस कानून के अनुरूप तैयार करनी होंगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, यह कानून ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसमें जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े कार्य और जलवायु परिवर्तन से निपटने से संबंधित परियोजनाओं पर विशेष फोकस होगा।