पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गूंजी 'सारस' की आवाज: बाघों के इलाके में बढ़ रहा उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी का कुनबा

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। बाघों की दहाड़ और तेंदुओं की फुर्ती के लिए मशहूर पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) के सरहदी इलाकों में उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी 'सारस' (Sarus Crane) की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वन विभाग के ताजा आंकड़ों ने इस क्षेत्र में जैव विविधता के एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है।

गणना के आंकड़े: एक दर्जन नए मेहमानों का आगमन

हाल ही में संपन्न हुई सारस गणना के अनुसार, पीलीभीत में सारसों का परिवार अब पहले से बड़ा हो गया है:

कुल संख्या: वर्तमान गणना में जिले में कुल 98 सारस पाए गए हैं।

वर्गीकरण: इनमें 89 वयस्क (Adults) और 9 नन्हे बच्चे (Juveniles) शामिल हैं।

बढ़ोतरी: पिछली गणना में यह संख्या 86 थी, यानी इस बार 12 नए सारस कुनबे में जुड़े हैं।

बाघों के साये में निडर जीवन

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 72 से अधिक बाघ और बड़ी संख्या में तेंदुए मौजूद हैं। इसके बावजूद रिजर्व के बाहरी इलाकों जैसे महुआ, न्यूरिया और बरखेड़ा में सारसों की बढ़ती मौजूदगी विशेषज्ञों को हैरान और उत्साहित कर रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि यहां का पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) पूरी तरह संतुलित है।

रेंज वार गणना की स्थिति

वन विभाग ने जिले को तीन रेंजों में बांटकर यह सर्वे पूरा किया है:

रेंज का नामसारसों की संख्याप्रमुख क्षेत्र
बीसलपुर रेंज52नैनीझील, करेली, बमरौली, चौसर हरदो पट्टी
पूरनपुर रेंज24घुंघचिहाई, सकरिया, कलीनगर, माधोटांडा
पीलीभीत रेंज22महुआ, न्यूरिया, बारातबोझ, हुसैनपुर

बीसलपुर रेंज सारसों के लिए सबसे पसंदीदा जगह बनकर उभरी है, जहाँ अकेले चौसर हरदो पट्टी में 10 सारस देखे गए हैं।

अब बनेगा 'सारस संरक्षण केंद्र'

सारसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग ने अब इनके संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है:

संरक्षण केंद्र: पीलीभीत के डीएफओ (DFO) भरत कुमार के अनुसार, जिले में जल्द ही एक विशेष सारस संरक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम शुरू होगा।

अनुकूल वातावरण: यहाँ के जलाशयों और खेतों के पास सारसों को पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिल रही है। संरक्षण केंद्र बनने से इनके प्रजनन और सुरक्षा को और बल मिलेगा।

इको-टूरिज्म: बाघों के साथ-साथ अब पर्यटक इन राजसी पक्षियों को देखने के लिए भी पीलीभीत का रुख करेंगे, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

सारस (Sarus Crane) के बारे में रोचक तथ्य

यह दुनिया का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी है।

सारस को 'प्रेम और समर्पण' का प्रतीक माना जाता है क्योंकि ये जोड़े (Pair) में रहते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे 'राज्य पक्षी' का दर्जा दिया है।