UP Electricity : प्रीपेड स्मार्ट मीटर पर फंसा पावर कॉरपोरेशन,नियामक आयोग ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
India News Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में बदलने और नए कनेक्शनों को केवल प्रीपेड मोड में देने के मामले में राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन पर अपना शिकंजा कस दिया है। आयोग ने पिछली नोटिस का जवाब न मिलने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कॉरपोरेशन को गुरुवार तक जवाब देने की आखिरी मोहलत दी है।
क्यों सख्त हुआ नियामक आयोग?
नियामक आयोग की सख्ती के पीछे मुख्य रूप से बिजली नियमों की अनदेखी और उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दायर याचिका में कई गंभीर मुद्दे उठाए गए थे:
नियमों का उल्लंघन: पावर कॉरपोरेशन पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की अधिसूचना का उल्लंघन करने का आरोप है।
जबरन प्रीपेड कनेक्शन: आयोग के नियमों के विपरीत उपभोक्ताओं को केवल प्रीपेड विकल्प के साथ नया कनेक्शन लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
बिना सहमति मोड परिवर्तन: पुराने उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटरों को बिना उनकी लिखित सहमति के प्रीपेड में बदला जा रहा है।
24 घंटे की आखिरी मोहलत
नियामक आयोग ने इससे पहले 16 अप्रैल को पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी कर 10 दिनों में जवाब मांगा था। समय सीमा बीत जाने के बाद भी कॉरपोरेशन ने न तो कोई जवाब दाखिल किया और न ही अपने पुराने आदेश वापस लिए। अब आयोग ने मंगलवार को नई नोटिस जारी करते हुए साफ कर दिया है कि यदि गुरुवार तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ऊर्जा मंत्री के आदेश के बाद भी 'सुस्ती'
हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने सोमवार को ही राज्य में जबरन प्रीपेड मीटर व्यवस्था को समाप्त करने के आदेश दिए थे। हालांकि, मंत्री के मौखिक आदेश के बावजूद पावर कॉरपोरेशन ने अब तक कोई भी आधिकारिक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी नहीं किया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
उपभोक्ता परिषद ने की कार्रवाई की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग से मांग की है कि पावर कॉरपोरेशन पर भारी जुर्माना लगाया जाए। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेशन जानबूझकर उपभोक्ताओं के अधिकारों को छीन रहा है और संवैधानिक संस्था (आयोग) के नोटिस को नजरअंदाज करना इसकी तानाशाही को दर्शाता है।
फिलहाल, सबकी नजरें गुरुवार को होने वाली कॉरपोरेशन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि कॉरपोरेशन अपना अड़ियल रुख नहीं बदलता है, तो प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर एक बड़ा कानूनी संकट खड़ा हो सकता है।