मुरादाबाद में गरजे केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, आकाश आनंद को दिया आरपीआई में आने का खुला न्योता
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर मचे सियासी घमासान और आकाश आनंद के निष्कासन के बाद राज्य की दलित राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। बसपा के पारंपरिक कोर वोट बैंक और नाराज कार्यकर्ताओं पर अन्य सियासी दलों ने नजरें टिका दी हैं। इसी कड़ी में मुरादाबाद पहुंचे केंद्र की मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रामदास आठवले ने बड़ा सियासी दांव चल दिया है। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती के निष्कासित भतीजे आकाश आनंद को अपनी पार्टी आरपीआई में शामिल होने का खुला न्योता दिया है। इसके साथ ही आठवले ने कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए दो टूक कहा कि अब समय आ गया है जब हमें उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी से अपना पुराना हक वापस लेना है।
'सत्तर के दशक में हाथी का निशान RPI का था, बसपा से हक छीनना होगा'
मुरादाबाद में आयोजित 'संविधान सम्मान महारैली' को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की विरासत और आरपीआई के ऐतिहासिक वजूद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में चुनाव आयोग द्वारा आवंटित 'हाथी' चुनाव चिह्न रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के पास हुआ करता था, जिसे बाद में बसपा ने अपनी पहचान बनाया।
आठवले ने मंच से कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब के मिशन को आगे बढ़ाने की जो नींव आरपीआई ने रखी थी, उसे हमें फिर से हासिल करना है। हमें यूपी में बसपा से अपना हक वापस लेना होगा। इसके लिए जिले से लेकर गांव और बूथ स्तर तक आरपीआई का मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करना पड़ेगा।" उन्होंने आगे कहा कि देश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन जनता के आशीर्वाद से उनका प्रभाव और रुतबा हमेशा कायम रहा।
आकाश आनंद को खुला ऑफर: 'बाबा साहेब का मिशन बढ़ाना है तो RPI आएं'
रैली के समापन के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान रामदास आठवले ने आकाश आनंद को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद एक पढ़े-लिखे और ऊर्जावान युवा नेता हैं।
आठवले ने कहा, "अगर आकाश आनंद सचमुच बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के मिशन को बिना किसी दबाव के आगे ले जाना चाहते हैं, तो उनका रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया में खुले दिल से स्वागत है। उन्हें आरपीआई में आकर बहुजन समाज के हक की लड़ाई लड़नी चाहिए। यदि आकाश आनंद हमारे साथ जुड़ते हैं, तो इससे उत्तर प्रदेश में आरपीआई और दलित आंदोलन को अप्रत्याशित मजबूती मिलेगी।'"
आकाश आनंद के निष्कासन से समर्थकों में मायूसी, विरोधी दल सक्रिय
गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाने और बाद में पार्टी से निष्कासित किए जाने के फैसले के बाद से ही यूपी की सियासत गरमाई हुई है। आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास के ऐलान में हुई देरी का हवाला देकर मायावती ने यह कड़ा कदम उठाया था।
विधानसभा चुनावों के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश में बसपा के युवा कैडर और कार्यकर्ताओं के बीच इस फैसले को लेकर भारी मायूसी और असमंजस देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आकाश आनंद के प्रति उपजी इसी सहानुभूति और बसपा के असंतुष्ट वोटरों को अपने पाले में खींचने के लिए चंद्रशेखर आजाद की 'आजाद समाज पार्टी' और अब रामदास आठवले की आरपीआई पूरी ताकत झोंकने में जुट गई है।