AI से लेकर मरीन रोबोटिक्स तक: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चमके भारत के 37 डीप-टेक इनोवेशन
नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीतिक धमक के साथ-साथ तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप सामर्थ्य का भी जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन' (Bharat Innovates Exposition) में देश के 37 चुनिंदा डीप-टेक स्टार्टअप्स और उद्यमों ने अपनी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सम्मेलन में पहुंचे विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने इन भारतीय इनोवेशंस का अवलोकन किया और भारतीय युवा वैज्ञानिकों व उद्यमियों की तकनीकी क्षमता की जमकर सराहना की।
60 सेकंड में कैंसर स्क्रीनिंग और रियल-टाइम कार्डियक AI
स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा प्रस्तुत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डायग्नोस्टिक्स समाधान विदेशी प्रतिनिधियों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र रहे:
पेरिविंकल टेक्नोलॉजीज (Periwinkle Technologies): इस स्टार्टअप ने सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए एआई-सक्षम स्क्रीनिंग और ट्रायेज प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया। यह तकनीक विशेष ऑप्टिकल मैपिंग और एल्गोरिद्म के जरिए महज 60 सेकंड से भी कम समय में कैंसर के जोखिम का सटीक आकलन कर सकती है।
ट्राइकोग हेल्थ (Tricog Health): कार्डियक इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए रियल-टाइम ईसीजी डायग्नोसिस और आपातकालीन प्राथमिकताओं को तय करने की तकनीक दिखाई गई। यह प्रणाली देश-विदेश की 12,000 से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं में 3.5 करोड़ से ज्यादा मरीजों की जांच में पहले से प्रभावी भूमिका निभा रही है।
64-क्यूबिट क्वांटम प्रोसेसर से लेकर अंडरवाटर रोबोटिक्स
प्रदर्शनी में केवल सॉफ्टवेयर ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर और जटिल कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भी स्वदेशी तकनीकी विकास देखने को मिला:
क्यूपीआई-एआई (QpiAI): सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स पर आधारित क्वांटम कंप्यूटरों की स्वदेशी श्रृंखला प्रस्तुत की गई। इसमें शोध व उच्च शिक्षा के लिए 8-क्यूबिट का 'क्युविद्या' (Qvidya), हाइब्रिड कंप्यूटिंग के लिए 25-क्यूबिट का 'सिंधु' (Indus) और स्केलेबिलिटी आधारित 64-क्यूबिट प्रोसेसर 'कावेरी' (Kaveri) शामिल रहे।
आईरोव (EyeROV): जटिल समुद्री और जलीय इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे बांध, पुलों के खंभे और बंदरगाहों की आंतरिक जांच के लिए मरीन रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म पेश किया गया। इसमें रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROV) और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUV) के साथ एआई-एनालिटिक्स का इस्तेमाल होता है।
ग्रीन एनर्जी और रेयर-अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
सतत विकास और क्लाइमेट टेक के मोर्चे पर भी भारतीय स्टार्टअप्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के समाधान पेश किए:
क्वॉन्टसोलर टेक्नोलॉजीज (Quantsolar Technologies): मुश्किल और गहरे जलस्रोतों पर तैरने वाले फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (Floating Solar PV) प्लेटफॉर्म को प्रदर्शित किया गया, जो भूमि की कमी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा उत्पादन का नया विकल्प देता है।
चारा टेक्नोलॉजीज (Chara Technologies): इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बिना किसी 'रेयर-अर्थ मैटेरियल' (Rare-Earth-Free) के चलने वाली मोटर और ई-पावरट्रेन तकनीक पेश की गई। इसका उद्देश्य चीन जैसी विदेशी ताकतों पर चुंबक और दुर्लभ धातुओं की निर्भरता खत्म कर ईवी को सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।
फ्रांस से शुरू होकर भारत मंडपम तक का सफर
शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, 'भारत इनोवेट्स' पहल का उद्देश्य देश के उच्च शिक्षण संस्थानों, आईआईटी, इनक्यूबेशन सेंटर्स और रिसर्च लैब्स से निकलने वाले अनुसंधानों को सीधे वैश्विक बाजारों और निवेशकों से जोड़ना है।
इस पहल का पहला चरण जून 2026 में फ्रांस के नीस (Nice) शहर में आयोजित किया गया था, जहां 120 भारतीय स्टार्टअप्स ने भाग लिया था। उन्हीं में से सबसे बेहतरीन 37 डीप-टेक स्टार्टअप्स को छांटकर नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रदर्शित किया गया। ब्रिक्स बिजनेस फोरम के दौरान सदस्य देशों के निवेशकों और सीईओ के साथ हुई बी2बी बैठकों से इन भारतीय तकनीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के दरवाजे खुलेंगे।