हॉर्मुज की खाड़ी में ट्रम्प का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकराया, खाड़ी में युद्ध के नगाड़े
India News Live, Digital Desk: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'हॉर्मुज की खाड़ी' को लेकर अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कड़े तेवर साफ कर दिए हैं। ट्रम्प प्रशासन ने ईरान की ओर से आए 'शांति और सहयोग' के ताजा प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए अपने महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' (Project Freedom) का ऐलान कर दिया है। ट्रम्प के इस फैसले ने मध्य पूर्व की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में ईरान पर दबाव और सैन्य घेराबंदी और भी सख्त होने वाली है।
क्या है 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' और क्यों डरा ईरान? डोनाल्ड ट्रम्प का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' केवल एक नाम नहीं, बल्कि हॉर्मुज की खाड़ी पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की एक बड़ी सैन्य और कूटनीतिक रणनीति है। इस प्रोजेक्ट के तहत अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर खाड़ी क्षेत्र में एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को ईरान के किसी भी संभावित खतरे से मुक्त रखना है। ट्रम्प का मानना है कि खाड़ी के पानी पर 'स्वतंत्रता' तभी संभव है जब ईरान की दादागिरी को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए।
ईरान के प्रस्ताव को बताया 'धोखा' ईरान ने हाल ही में क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए एक द्विपक्षीय वार्ता का प्रस्ताव दिया था, जिसे ट्रम्प प्रशासन ने 'समय की बर्बादी' और 'धोखा' करार दिया। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान यह प्रस्ताव केवल प्रतिबंधों से राहत पाने और अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखने के लिए समय खरीदने के लिए दे रहा है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान अपनी 'आतंकवादी गतिविधियों' और मिसाइल परीक्षणों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाता, तब तक कोई भी बातचीत संभव नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतों पर मंडराया संकट जैसे ही वॉशिंगटन से 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की खबर आई, वैश्विक बाजार में हलचल शुरू हो गई है। हॉर्मुज की खाड़ी से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनातनी बढ़ती है, तो खाड़ी का यह रास्ता बंद हो सकता है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं। आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ट्रम्प की यह 'हार्डलाइन' नीति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है।
इजरायल और खाड़ी देशों का रुख ट्रम्प के इस आक्रामक रुख का इजरायल और सऊदी अरब जैसे देशों ने दबे स्वर में समर्थन किया है। ये देश लंबे समय से ईरान के बढ़ते प्रभाव से चिंतित रहे हैं। 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के जरिए अमेरिका इन मित्र देशों को यह भरोसा दिलाना चाहता है कि मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं क्या वह पीछे हटेगा या फिर खाड़ी का पानी बारूद की गंध से भर जाएगा?