LPG सिलेंडर के दाम आज रांची में दिल्ली के मुकाबले 57.50 रुपये महंगे, जानिए अपने शहर का नया रेट और टैक्स का गणित
देश भर में आम जनता के लिए घरेलू एलपीजी रसोई गैस (Domestic LPG Cylinder) एक बुनियादी और अनिवार्य आवश्यकता है, लेकिन अलग-अलग राज्यों और शहरों में इसके दामों में दिखाई देने वाला अंतर अक्सर उपभोक्ताओं को हैरत में डाल देता है। ताज़ा आंकड़ों और तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) द्वारा जारी की गई रेट लिस्ट के अनुसार, झारखंड की राजधानी रांची में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर देश की राजधानी नई दिल्ली की तुलना में ₹57.50 महंगा बिक रहा है। जहां दिल्ली में उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए निर्धारित दर चुकानी पड़ रही है, वहीं रांची के उपभोक्ताओं को परिवहन लागत और राज्यस्तरीय टैक्सों के चलते अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। इस क्षेत्रीय अंतर ने एक बार फिर ईंधन पर लगने वाले स्थानीय करों, मालभाड़े और राज्यों के बीच मूल्य भिन्नता के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
रांची और दिल्ली में एलपीजी की मौजूदा दरों का तुलनात्मक विवरण
भारतीय तेल निगम (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी के बेंचमार्क दामों के आधार पर घरेलू व व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की दरें संशोधित करती हैं। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत वर्तमान में ₹942.00 के स्तर पर बनी हुई है, जबकि रांची में इसी सिलेंडर के लिए आम जनता को ₹999.50 चुकाने पड़ रहे हैं। इस प्रकार सीधा गणित लगाएं तो रांची में हर रीफिल पर ग्राहकों को ₹57.50 का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दामों में भी दोनों शहरों के बीच काफी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालक करते हैं, जिससे रांची के स्थानीय खान-पान और व्यापार पर भी इस मूल्य अंतर का असर पड़ता है।
एक ही देश में दो अलग-अलग कीमतें क्यों? जानिए टैक्स और फ्रेट का गणित
कई उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि जब पूरे देश में एलपीजी का आयात और शोधन एक ही व्यवस्था के तहत होता है, तो शहर-दर-शहर इसकी कीमतों में इतना अंतर क्यों होता है? इसका मुख्य कारण देश के विभिन्न हिस्सों की भौगोलिक स्थिति, परिवहन लागत (Freight Charges) और राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला मूल्य वर्धित कर (VAT) है। दिल्ली तटीय इलाकों और प्रमुख बॉटलिंग प्लांटों से कनेक्टिविटी के लिहाज से मध्य बिंदु पर स्थित है और वहां का टैक्स ढांचा कुछ अलग है। इसके विपरीत, झारखंड जैसे राज्यों में रिफाइनरी या बॉटलिंग प्लांट से गैस सिलेंडरों को दूर-दराज के इलाकों और पहाड़ी या पठारी क्षेत्रों तक पहुंचाने में परिवहन पर अधिक खर्च आता है। इसके अलावा, राज्य सरकारें अपने हिसाब से लोकल सेल्स टैक्स या वैट वसूलती हैं। जब ये सभी लागते बेसिक बेस प्राइस में जुड़ती हैं, तो अंतिम ग्राहक तक पहुंचते-पहुंचते सिलेंडर का खुदरा मूल्य काफी बढ़ जाता है।
रसोई के बजट पर असर और गृहणियों की प्रतिक्रिया
मंगाई के दौर में ₹57.50 प्रति सिलेंडर का यह अंतर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित करता है। औसतन एक परिवार में साल भर में 10 से 12 घरेलू सिलेंडरों की खपत होती है। यदि कोई परिवार रांची में रह रहा है, तो वह दिल्ली के किसी परिवार की तुलना में हर साल लगभग ₹700 का अतिरिक्त खर्च केवल एलपीजी रीफिल पर कर रहा है। रांची की स्थानीय गृहणियों का कहना है कि खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ ईंधन के दामों में क्षेत्रीय असमानता से घर का बजट संभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विशेषकर उन परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाली सब्सिडी पर निर्भर हैं, उन्हें रीफिल कराते समय पहले पूरा भुगतान करना पड़ता है और बाद में सब्सिडी उनके बैंक खातों में आती है। ऐसे में शुरुआती ज्यादा कीमत चुकाना उनके लिए तात्कालिक वित्तीय दबाव पैदा करता है।
कमर्शियल एलपीजी और छोटे व्यवसायियों पर पड़ता दोहरा दबाव
घरेलू एलपीजी के अलावा, 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी दिल्ली और रांची के बीच बड़ा फासला है। कमर्शियल सिलेंडरों पर सरकार किसी भी प्रकार की सब्सिडी नहीं देती है और ये पूरी तरह से बाजार दरों पर आधारित होते हैं। रांची के होटल और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस महंगी होने से खान-पान के व्यंजन महंगे करने पड़ते हैं, जिससे ग्राहकों की संख्या पर असर पड़ता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और सऊदी अरामको के सीपी (Contract Price) में उतार-चढ़ाव होता है, तो OMCs कमर्शियल गैस के दामों में सबसे पहले बदलाव करती हैं। रांची में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट ज्यादा होने के कारण वहां के छोटे व्यवसायियों को दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों के मुकाबले ऊर्जा लागत अधिक उठानी पड़ती है।
एलपीजी सब्सिडी (PAHAL) का लाभ और अपनी सब्सिडी स्थिति कैसे जांचें?
केंद्र सरकार प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) यानी 'पहल' योजना के जरिए पात्र घरेलू उपभोक्ताओं के बैंक खातों में सब्सिडी राशि सीधे जमा कराती है। हालांकि, बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर खरीदने वाले आम ग्राहकों को पूरा बाजार मूल्य देना होता है। यदि आप रांची या देश के किसी भी शहर के निवासी हैं और यह जांचना चाहते हैं कि आपको सब्सिडी मिल रही है या नहीं, तो निम्नलिखित आसान चरणों का पालन कर सकते हैं:
आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: अपने इंटरनेट ब्राउज़र में MY LPG की आधिकारिक वेबसाइट (mylpg.in) खोलें।
अपनी तेल कंपनी चुनें: होमपेज पर दिख रहे Indane, Bharatgas या HP Gas में से अपने एलपीजी सिलेंडर प्रदाता कंपनी के सिलेंडर चित्र पर क्लिक करें।
'Give Feedback Online' पर जाएं: इसके बाद सिलेंडर रीफिल और सब्सिडी से जुड़े ऑप्शन पर क्लिक करें।
विवरण दर्ज करें: अपना 17 अंकों का LPG ID या पंजीकृत मोबाइल नंबर और डिस्ट्रीब्यूटर का नाम दर्ज करें।
सब्सिडी स्टेटस देखें: सिस्टम आपके द्वारा हाल ही में बुक किए गए सिलेंडरों की सूची और खाते में भेजी गई सब्सिडी राशि का पूरा ब्यौरा स्क्रीन पर प्रदर्शित कर देगा।
भविष्य में क्या घटेंगे दाम? अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख
भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60% से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें मुख्य रूप से मध्य पूर्व (Middle East) के देश शामिल हैं। इसलिए, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर (Rupee vs Dollar Exchange Rate) और लाल सागर या स्वेज नहर के समुद्री मार्गों में तनाव जैसे भू-राजनीतिक कारक सीधे तौर पर देश में एलपीजी के दामों को प्रभावित करते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल और गैस बेंचमार्क स्थिर रहते हैं और भारतीय रुपया मजबूत होता है, तो आने वाले महीनों में तेल कंपनियां एलपीजी की कीमतों में कटौती कर राहत दे सकती हैं। तब तक रांची और पूर्वी भारत के अन्य शहरों में रहने वाले उपभोक्ताओं को परिवहन और टैक्स अंतर के चलते दिल्ली की तुलना में कुछ अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।