दलीप ट्रॉफी में 55 साल बाद दिखेगा ये ऐतिहासिक नजारा! फाइनल में पहुंची तिलक वर्मा की साउथ जोन
भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक टूर्नामेंट दलीप ट्रॉफी में रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है। बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड पर खेले गए दूसरे रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में युवा कप्तान तिलक वर्मा के नेतृत्व वाली साउथ जोन की टीम ने नॉर्थ जोन को 7 विकेट से धूल चटाकर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया है। इस जीत के साथ ही घरेलू क्रिकेट के गलियारों में एक खास चर्चा शुरू हो गई है क्योंकि दलीप ट्रॉफी के इतिहास में पूरे 55 साल बाद एक ऐसा अनूठा संयोग बनने जा रहा है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों की उत्सुकता को कई गुना बढ़ा दिया है। साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच होने वाला यह महामुकाबला भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
चौथे दिन नॉर्थ जोन पर भारी पड़ी साउथ जोन की कसी हुई गेंदबाजी
मुकाबला अपने चौथे और अंतिम दिन बेहद रोमांचक मोड़ पर था जब नॉर्थ जोन ने अपनी दूसरी पारी में 256 रनों के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया। नॉर्थ जोन के पास कुल बढ़त के आधार पर एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने का मौका था, ताकि वह साउथ जोन के सामने बड़ी चुनौती पेश कर सके। हालांकि, साउथ जोन के अनुभवी दाएं हाथ के तेज गेंदबाज एमडी निधीश ने अपने घातक प्रहारों से नॉर्थ जोन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। निधीश ने सुबह के सत्र में बेहद अनुशासित और आक्रामक गेंदबाजी करते हुए निचले क्रम के बल्लेबाजों को टिकने का कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए नॉर्थ जोन की पूरी पारी को 297 रनों पर समेट दिया और पहली पारी की बढ़त के आधार पर साउथ जोन को जीत के लिए 181 रनों का आसान लेकिन दबाव भरा लक्ष्य मिला। एमडी निधीश ने इस पारी में 56 रन देकर 5 महत्वपूर्ण विकेट झटके, जो उनके फर्स्ट-क्लास करियर का 10वां पांच विकेट हॉल रहा।
कप्तान तिलक वर्मा की लाजवाब पारियों ने दिलाई शानदार जीत
लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ जोन की शुरुआत बेहतरीन रही, जहां सलामी बल्लेबाज रिकी भुई और नारायण जगदीशन ने पहले विकेट के लिए 64 रनों की ठोस साझेदारी कर टीम को मजबूत नींव दी। रिकी भुई ने आक्रामक रुख अपनाते हुए 53 गेंदों पर 7 चौकों की मदद से 42 रनों की तेजतर्रार पारी खेली, जबकि नारायण जगदीशन ने भी 43 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि, मध्यक्रम में कुछ जल्दी विकेट गिरने के बाद साउथ जोन की टीम एक समय 102 रनों के स्कोर पर अपने 3 महत्वपूर्ण विकेट गंवाकर हल्की मुश्किल में नजर आ रही थी। ऐसे में एक बार फिर कप्तान तिलक वर्मा संकटमोचन बनकर क्रीज पर डट गए। तिलक ने अपनी शानदार तकनीक और धैर्य का परिचय देते हुए स्पिन गेंदबाजों का बखूबी सामना किया और पारी को संभाला। उन्होंने पहली पारी में नाबाद 116 रनों की मैराथन शतकीय पारी खेलने के बाद, दूसरी पारी में भी नाबाद 51 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली और रविचंद्रन स्मरण के साथ मिलकर टीम को बिना किसी अन्य नुकसान के लक्ष्य तक पहुंचा दिया। स्मरण ने भी नाबाद 32 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया और दोनों के बीच हुई 80 रनों की नाबाद साझेदारी ने साउथ जोन को आसानी से जीत दिला दी।
55 साल बाद दोहराया जाएगा इतिहास, साउथ और ईस्ट जोन आमने-सामने
दलीप ट्रॉफी के इस सीजन का फाइनल मुकाबला कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में पूरे 55 साल बाद साउथ जोन और ईस्ट जोन की टीमें आमने-सामने होंगी। इससे पहले इन दोनों दिग्गज टीमों के बीच आखिरी बार दलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला 1970/71 के सीजन में खेला गया था, जहां साउथ जोन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ईस्ट जोन को 10 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। अब पांच दशक से अधिक लंबे अंतराल के बाद यह चिर-प्रतीक्षित मुकाबला एक बार फिर क्रिकेट प्रेमियों को देखने को मिलेगा। ईस्ट जोन की टीम भी इस बार बेहद मजबूत नजर आ रही है और उसने सेमीफाइनल मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन सेंट्रल जोन को चार विकेट से हराकर फाइनल का टिकट कटाया है। ईस्ट जोन की कप्तानी विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन संभाल रहे हैं, जबकि टीम में युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी और अनुभवी गेंदबाज मोहम्मद शमी जैसे धुरंधर भी शामिल हैं। ईस्ट जोन की टीम 14 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी के फाइनल में उतरी है, जिससे यह मुकाबला और भी अधिक रोमांचक हो गया है।
चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में सजेगा फाइनल का महामंच
साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच होने वाला यह खिताबी महामुकाबला आगामी 6 सितंबर से चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा। साउथ जोन की टीम पिछले सीजन में फाइनल मुकाबला हारकर उपविजेता रही थी, और इस बार टीम का मुख्य लक्ष्य हर हाल में ट्रॉफी पर कब्जा जमाना होगा। कप्तान तिलक वर्मा की बेहतरीन फॉर्म, टीम का संतुलित गेंदबाजी आक्रमण और खिलाड़ियों का उच्च मनोबल साउथ जोन की सबसे बड़ी ताकत साबित हो रहा है। दूसरी ओर, ईस्ट जोन के पास भी आक्रामक बल्लेबाजों और अनुभवी खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, जो किसी भी वक्त मैच का पासा पलटने का माद्दा रखते हैं। घरेलू क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि चेपॉक की पिच पर स्पिन गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। क्रिकेट फैंस इस ऐतिहासिक भिड़ंत को लेकर बेहद उत्साहित हैं और दोनों ही टीमों के बीच एक कड़े संघर्ष की उम्मीद कर रहे हैं, जो भारतीय घरेलू क्रिकेट के इस सत्र को हमेशा के लिए यादगार बना देगा।