BREAKING:
September 03 2026 11:51 pm

भारतीय टीम से बाहर होते ही आग उगलने लगा प्रभसिमरन सिंह का बल्ला, महज 3 दिन के भीतर ठोक डाले 2 धमाकेदार शतक

Post

भारतीय घरेलू क्रिकेट के गलियारों में जब किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को चयनकर्ताओं की अनदेखी का सामना करना पड़ता है, तो उसके पास अपनी बात कहने का सबसे मजबूत माध्यम केवल उसका बल्ला ही होता है। पंजाब के 24 वर्षीय युवा और विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह ने इसी पुरानी परंपरा को दोहराते हुए मैदान पर ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसकी गूंज सीधे राष्ट्रीय चयन समिति के कानों तक पहुंची है। भारतीय टीम और हालिया इंडिया-ए के दौरों से बाहर रखे जाने के कड़वे घूंट को ताकत बनाते हुए प्रभसिमरन ने घरेलू टूर्नामेंट में महज 3 दिन के भीतर बैक-टू-बैक 2 विस्फोटक शतक जड़कर सनसनी मचा दी है। सफेद और लाल गेंद दोनों ही प्रारूपों में गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए इस युवा बल्लेबाज ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के चंद हफ्तों के स्टार नहीं हैं, बल्कि लंबी रेस के ऐसे घोड़े हैं जो किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की असाधारण क्षमता रखते हैं।

महज 72 घंटों में 2 शतक: मैदान पर दिखा प्रभसिमरन सिंह का रौद्र रूप

घरेलू सर्किट में खेले जा रहे प्रतिष्ठित मुकाबले के दौरान प्रभसिमरन सिंह का बल्ला उस समय गरजा जब उनकी टीम को एक ठोस और आक्रामक शुरुआत की सबसे ज्यादा जरूरत थी। मैच के पहले ही दिन से प्रभसिमरन ने विपक्षी गेंदबाजों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना शुरू किया। उन्होंने अपनी पहली शतकीय पारी के दौरान मैदान के चारों तरफ आकर्षक और जोखिम भरे शॉट्स की झड़ी लगा दी। तेज गेंदबाजों के खिलाफ फ्रंट-फुट पुल और स्पिनरों के खिलाफ कदमों का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए उन्होंने महज कुछ ही गेंदों में अपना पहला शतक पूरा किया। उनकी इस पारी ने विपक्षी कप्तान की फील्डिंग सजावट को पूरी तरह तितर-बितर कर दिया।

हैरान करने वाली बात यह रही कि प्रभसिमरन की रनों की भूख पहले शतक पर ही शांत नहीं हुई। अगले मुकाबले में जब वे दोबारा 22 गज की पट्टी पर उतरे, तो उनका अंदाज और भी अधिक आक्रामक और बेखौफ नजर आया। गेंदबाजों ने उन्हें शॉर्ट पिच गेंदों और कसी हुई लाइन से छकाने की भरसक कोशिश की, लेकिन प्रभसिमरन ने अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल से समझौता किए बिना केवल 3 दिनों के भीतर अपना दूसरा शतक भी ठोक डाला। इन दोनों पारियों में उनका स्ट्राइक रेट किसी टी20 मुकाबले जैसा रहा, जिसने यह साफ कर दिया कि वे फॉर्म में आने के लिए समय बर्बाद नहीं करते बल्कि पहली ही गेंद से मैच का रुख अपनी टीम के पक्ष में मोड़ने का दम रखते हैं।

टीम इंडिया से बाहर होने का दर्द: जब प्रदर्शन के बावजूद बंद रहे दरवाजे

प्रभसिमरन सिंह के इस हालिया विस्फोटक प्रदर्शन को समझने के लिए उस पृष्ठभूमि को जानना जरूरी है जिसके चलते वे मैदान पर इतने आक्रामक नजर आ रहे हैं। पंजाब किंग्स के लिए आईपीएल में लगातार अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से करोड़ों फैंस का दिल जीतने वाले प्रभसिमरन घरेलू क्रिकेट में भी पंजाब की ओर से लगातार रन बना रहे थे। इसके बावजूद, जब जिम्बाब्वे दौरा, श्रीलंका सीरीज और हालिया इंडिया-ए की टीमों का ऐलान हुआ, तो चयनकर्ताओं ने विकेटकीपर-बल्लेबाजों की कतार में संजू सैमसन, ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल, ईशान किशन और जितेश शर्मा जैसे नामों को प्राथमिकता दी, जबकि प्रभसिमरन को किसी भी मुख्य स्क्वाड में जगह नहीं मिली।

किसी भी उभरते हुए खिलाड़ी के लिए राष्ट्रीय टीम की चौखट के इतने करीब आकर बाहर का रास्ता देखना मानसिक रूप से काफी हताश करने वाला होता है। कई खिलाड़ी ऐसे मौकों पर दबाव में आकर अपनी लय गंवा बैठते हैं। लेकिन प्रभसिमरन ने सोशल मीडिया या बयानों में अपनी निराशा जाहिर करने के बजाय अपने गुस्से और ऊर्जा को रन बनाने में झोंक दिया। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि टीम से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने नेट्स पर घंटों पसीना बहाया और अपनी तकनीक में कुछ ऐसे सूक्ष्म बदलाव किए जिससे वे क्रीज पर ज्यादा देर टिककर लंबी पारियां खेल सकें।

आईपीएल की चमक से लेकर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट तक: एक मुकम्मल ऑल-फॉर्मेट बैटर की छवि

प्रभसिमरन सिंह को शुरुआत में केवल एक टी20 हिटर के रूप में देखा जाता था जो पहली गेंद से छक्का मारने की फिराक में रहता था। साल 2019 में जब पंजाब किंग्स ने उन्हें महज 18 साल की उम्र में 4.8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बोली लगाकर खरीदा था, तब वे रातोंरात सुर्खियों में आए थे। आईपीएल 2023 में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ कोटला के धीमे ट्रैक पर खेली गई उनकी 103 रनों की ऐतिहासिक शतकीय पारी ने दुनिया को उनकी असली ताकत से रूबरू कराया था। उस पारी में बाकी बल्लेबाज जहां एक-एक रन के लिए संघर्ष कर रहे थे, वहां प्रभसिमरन ने अकेले दम पर मैच का पासा पलट दिया था।

हालांकि, पिछले दो घरेलू सत्रों में प्रभसिमरन ने अपनी बल्लेबाजी के कैनवास को काफी बड़ा किया है। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में पंजाब के लिए नियमित रूप से ओपनिंग करते हुए यह साबित किया है कि उनके पास नई स्विंग होती लाल गेंद को छोड़ने का धैर्य भी है और मौका मिलने पर ढीली गेंदों को बाउंड्री के पार भेजने की ताकत भी। विकेटकीपिंग के मोर्चे पर भी उन्होंने अपनी फिटनेस और रिफ्लेक्सेज में भारी सुधार किया है, जिससे वे भारतीय टीम के लिए एक संपूर्ण 'पैकेज' के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं।

विकेटकीपर-बल्लेबाजों की भारी भीड़: पंत, सैमसन और जुरेल के बीच कैसे बनेगी जगह?

भारतीय क्रिकेट के मौजूदा दौर में विकेटकीपर-बल्लेबाज का स्थान सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा वाला स्लॉट बन चुका है। ऋषभ पंत के तीनों प्रारूपों में स्थापित होने के बाद बैकअप के तौर पर संजू सैमसन टी20 में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं, जबकि टेस्ट क्रिकेट में ध्रुव जुरेल ने अपने धैर्यपूर्ण खेल से सबको प्रभावित किया है। इसके अलावा ईशान किशन भी घरेलू क्रिकेट में वापसी करके टीम में लौटने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे भीषण कॉम्पिटिशन के बीच प्रभसिमरन सिंह के लिए जगह बनाना आसान नहीं है। लेकिन प्रभसिमरन की सबसे बड़ी यूएसपी (खासियत) उनका बतौर ओपनर खेलना है। भारतीय सीमित ओवरों की टीम को हमेशा ऐसे शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों की तलाश रहती है जो पावरप्ले के शुरुआती 6 ओवरों का अधिकतम फायदा उठा सकें और बिना किसी झिझक के गेंदबाजों पर हावी हो सकें। प्रभसिमरन का निडर एटीट्यूड ठीक उसी आक्रामक ब्रांड का है जिसकी वकालत मुख्य कोच गौतम गंभीर हमेशा से करते आए हैं। यदि प्रभसिमरन इसी तरह घरेलू सीजन में शतकों का अंबार लगाते रहे, तो चयनकर्ताओं के लिए उन्हें ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज करना नामुमकिन हो जाएगा।

चयनकर्ताओं के लिए सीधा संदेश: 'मैं सिर्फ आईपीएल का खिलाड़ी नहीं हूं'

3 दिन में 2 शतक ठोककर प्रभसिमरन सिंह ने सीधे तौर पर अजीत अगरकर की अगुवाई वाली राष्ट्रीय चयन समिति की मेज पर एक मजबूत संदेश फेंक दिया है। यह प्रदर्शन चीख-चीख कर कह रहा है कि युवा प्रतिभा को केवल आईपीएल की चमक-दमक के आधार पर नहीं, बल्कि उसके घरेलू फॉर्म और बड़े प्रारूपों में मैच जिताने की क्षमता के आधार पर आंका जाना चाहिए।

क्रिकेट के दिग्गजों का मानना है कि भारतीय टीम में ट्रांजिशन (बदलाव) का दौर चल रहा है। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों के टी20 से संन्यास के बाद सफेद गेंद की टीम में युवा और बेखौफ खिलाड़ियों की नई खेप तैयार की जा रही है। प्रभसिमरन सिंह ने सही समय पर अपने बल्ले की गूंज से यह साबित कर दिया है कि वे हर चुनौती के लिए तैयार हैं। अब गेंद पूरी तरह से चयनकर्ताओं के पाले में है कि वे इस युवा प्रतिभा के धमाकेदार प्रदर्शन को कब तक अंतरराष्ट्रीय कैप में तब्दील करते हैं।