सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी, अभिव्यक्ति की आज़ादी की भी एक सीमा होती है
India News Live,Digital Desk : सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हेट स्पीच पर गहरी चिंता जताई। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अभिव्यक्ति की आज़ादी” के नाम पर सब कुछ सही ठहराने की कोशिशें अब खतरनाक मोड़ ले चुकी हैं।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज फ्रांसिस विस्वनाथन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब वे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ वजाहत खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
"स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी नहीं है"
कोर्ट ने कहा कि नफरत फैलाने वाली भाषा पर सख्त कार्रवाई बेहद ज़रूरी है, लेकिन इसके साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन न हो। अदालत ने नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों को जिम्मेदारी के साथ समझें और आत्मसंयम बरतें।
"राज्य को बार-बार हस्तक्षेप क्यों करना पड़े?"
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर बार राज्य को दखल देकर हेट स्पीच रोकनी पड़े तो यह स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती। सोशल मीडिया के ज़रिए फैले ज़हर को रोकना सिर्फ सरकार का काम नहीं है, बल्कि हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है कि वह नफरत फैलाने वाली सामग्री को न साझा करें और न ही उसका प्रचार करें।
मामला क्या है?
यह केस वजाहत खान से जुड़ा है, जिनके खिलाफ पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में FIR दर्ज हैं। 9 जून को उन्हें कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून को उन्हें 14 जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।
वजाहत खान का आरोप है कि उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR दरअसल एक प्रतिशोध की कार्रवाई है, क्योंकि उन्होंने शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ एक कथित सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। पनोली को गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में जमानत मिल गई।