The Lucknow-Kanpur National Highway will be rejuvenated: एक्सप्रेस-वे शुरू होते ही 107 करोड़ से सुधरेगी सड़क; जाम से मिलेगी मुक्ति, जानें पूरा प्लान

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India News Live,Digital Desk : नवाबों के शहर लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों के लिए बड़ी खुशखबरी है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का काम पूरा होने के साथ ही अब पुराने नेशनल हाईवे (NH-25) के दिन भी बहुरने वाले हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस हाईवे को गड्ढा मुक्त और जाम मुक्त बनाने के लिए 107 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कार्ययोजना तैयार की है। अप्रैल 2026 में एक्सप्रेस-वे शुरू होने के ठीक बाद, मई 2026 से हाईवे के सुदृढ़ीकरण का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।

नवाबगंज और दही चौकी पर बनेंगे नए फ्लाईओवर

लखनऊ-कानपुर नेशनल हाईवे पर लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने के लिए NHAI ने दो प्रमुख फ्लाईओवर और एक अंडरपास बनाने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, नवाबगंज तिराहा और दही चौकी पर नए फ्लाईओवर प्रस्तावित हैं। इनके बन जाने से स्थानीय ट्रैफिक और हाईवे पर चलने वाले भारी वाहनों का टकराव खत्म हो जाएगा, जिससे वाहनों की गति बढ़ेगी और हादसों में कमी आएगी।

त्रिभुवन खेड़ा में बनेगा हाईटेक अंडरपास, अवध चौराहे जैसी तकनीक का होगा उपयोग

प्रोजेक्ट की सबसे खास बात त्रिभुवन खेड़ा में बनने वाला अंडरपास है। इसे 'पुश बैक' तकनीक से बनाया जाएगा, जैसा प्रयोग वर्तमान में लखनऊ के आलमबाग स्थित अवध चौराहे पर किया जा रहा है। यह अंडरपास करीब 55 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा होगा। इसकी ऊंचाई 5 मीटर से अधिक रखी जाएगी ताकि बड़े वाहन आसानी से निकल सकें। NHAI का दावा है कि इसे अत्याधुनिक गाइडलाइंस के तहत तैयार किया जाएगा।

रोशनी से जगमगाएगा रास्ता और ड्रेनेज होगा दुरुस्त

अक्सर देखा जाता है कि अंडरपास में अंधेरा रहता है या बारिश का पानी भर जाता है। NHAI ने इस प्रोजेक्ट में इन दोनों समस्याओं का हल निकाला है। अंडरपास में बड़े-बड़े रोशनदान बनाए जाएंगे ताकि दिन में सूरज की रोशनी रहे और रात के लिए आधुनिक लाइटिंग की व्यवस्था होगी। साथ ही, एक ऐसा ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिससे बरसात का पानी मिनटों में बाहर निकल जाएगा।

एक साल में पूरा होगा काम, पर्यावरण का भी रखा जाएगा ख्याल

NHAI ने कार्यदायी संस्था को यह पूरा प्रोजेक्ट एक साल के भीतर पूरा करने की समय सीमा दी है। इस निर्माण के लिए करीब 3 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता होगी, जिसके लिए पेड़ों की शिफ्टिंग और कटान किया जाएगा। हालांकि, इसके बदले NHAI वन विभाग द्वारा दी गई जमीन पर नए पौधे लगाएगा और 5 साल तक उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी उठाएगा।