UP's heritage will now be immortalized: ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों का होगा कायाकल्प; जिलों में सीडीओ संभालेंगे कमान, जानें पूरा प्लान

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की समृद्ध ज्ञान परंपरा और हजारों साल पुरानी बौद्धिक विरासत को सहेजने के लिए योगी सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। केंद्र सरकार के 'ज्ञान भारतम मिशन' (Gyan Bharatam Mission) के तहत अब यूपी की प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और दुर्लभ ग्रंथों को डिजिटल अवतार मिलने जा रहा है। सरकार का उद्देश्य रखरखाव के अभाव में नष्ट हो रही इस अनमोल धरोहर को भावी पीढ़ियों और शोधार्थियों के लिए सुरक्षित करना है। इसके लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में व्यापक सर्वे और संग्रहण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।

सीडीओ होंगे नोडल अधिकारी, घरों और मठों में होगा सर्वे

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए शासन ने हर जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। जिला प्रशासन अब सरकारी पुस्तकालयों के साथ-साथ निजी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों और उन व्यक्तियों से भी संपर्क करेगा जिनके पास प्राचीन ग्रंथ उपलब्ध हैं। गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर के अनुसार, यह अभियान उन पांडुलिपियों को चिन्हित करेगा जो 75 वर्ष से अधिक पुरानी हैं।

नष्ट होने से बचाएगी 'वैज्ञानिक' तकनीक और डिजिटलीकरण

अक्सर देखा गया है कि भोजपत्रों और ताड़पत्रों पर लिखी गई पांडुलिपियां नमी और सही रखरखाव न होने के कारण खराब हो जाती हैं। 'ज्ञान भारतम मिशन' के तहत इन ग्रंथों का न केवल वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली स्कैनिंग के जरिए इनका डिजिटल आर्काइव भी बनाया जाएगा। यह सारा डेटा 'ज्ञान भारतम पोर्टल' पर अपलोड होगा, जिससे दुनिया भर के शोधार्थी और छात्र एक क्लिक पर भारत के प्राचीन ज्ञान दर्शन और साहित्य को पढ़ सकेंगे।

मालिकाना हक नहीं छीनेगी सरकार, सिर्फ ज्ञान को करेगी साझा

इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि पांडुलिपियों के संग्रहकर्ताओं को डरने की जरूरत नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मूल पांडुलिपि संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास ही सुरक्षित रहेगी। सरकार केवल उनका डेटा सूचीबद्ध (Cataloging) करेगी और उनका डिजिटल स्वरूप तैयार करेगी। इससे पांडुलिपि के मालिकों को भी अपने संग्रह को सहेजने के लिए सरकारी विशेषज्ञों की मदद मिल सकेगी।

उत्तर प्रदेश: प्राचीन ज्ञान और संस्कृति का केंद्र

उत्तर प्रदेश को अनादिकाल से ही साहित्य, संस्कृति और दर्शन की भूमि माना गया है। वाराणसी, मथुरा, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में हजारों दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ बिखरे पड़े हैं। इस अभियान के जरिए सरकार इन बिखरे हुए मोतियों को एक माला में पिरोने का काम कर रही है। जिला स्तर पर तैयार सूची को राजकीय अभिलेखागार भेजा जाएगा, जहां विशेषज्ञों की टीम इन पर आगे का कार्य करेगी।