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August 04 2026 02:27 pm

संजीव कुमार: वो महान अभिनेता जिसने पहले ही कर ली थी अपनी मौत की भविष्यवाणी

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India News Live,Digital Desk : बॉलीवुड के इतिहास में बहुत कम अभिनेता ऐसे हुए हैं, जो अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ गए हों। उन्हीं में से एक थे संजीव कुमार, जिन्हें 'एन एक्टर्स एक्टर' के रूप में जाना जाता है। न केवल अपने अभिनय के लिए, बल्कि अपनी मौत की सटीक भविष्यवाणी के लिए भी वे आज भी चर्चा में रहते हैं।

जब जवानी में निभाया बुढ़ापे का किरदार

संजीव कुमार ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में कीं जिनमें उन्होंने अपनी उम्र से कहीं बड़े और बुजुर्ग व्यक्तियों का किरदार निभाया। उस दौर में जब सुपरस्टार्स अपनी 'इमेज' बचाने के लिए उम्रदराज किरदारों से बचते थे, संजीव कुमार बड़ी सहजता से बुजुर्ग बन जाते थे।

इस बारे में जब एक इंटरव्यू के दौरान तबस्सुम ने उनसे सवाल किया कि वे युवा होने के बावजूद बुजुर्गों के रोल क्यों चुनते हैं, तो संजीव कुमार ने एक ऐसा जवाब दिया जिसने सबको स्तब्ध कर दिया।

अपनी मौत की खौफनाक भविष्यवाणी

संजीव कुमार ने बताया था कि उनके परिवार में पुरुषों की एक दुर्भाग्यपूर्ण परंपरा रही है। उनके दादा, पिता और छोटे भाई नकुल—सभी का निधन 50 वर्ष की आयु से पहले ही हो गया था। इस पारिवारिक इतिहास के कारण संजीव कुमार का यह पक्का विश्वास था कि वह भी 50 साल की उम्र पार नहीं कर पाएंगे। यही वजह थी कि वे अपने करियर में ही उस उम्र का अनुभव जीना चाहते थे, जिसे शायद वे अपनी निजी जिंदगी में न जी पाएं।

उनकी यह भविष्यवाणी 6 नवंबर 1985 को सच साबित हुई। महज 47 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया, और वे अपने परिवार के अन्य पुरुषों की तरह 50 का आंकड़ा छूने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह गए।

अमिताभ बच्चन और शशि कपूर को दी थी कड़ी टक्कर

संजीव कुमार ने 1960 के दशक में अपने सफर की शुरुआत की थी। 70 और 80 के दशक में वे अमिताभ बच्चन, शशि कपूर जैसे सितारों के साथ बराबरी पर खड़े नजर आते थे। 'शोले' के ठाकुर बलदेव सिंह हों या 'त्रिशूल' का किरदार, उन्होंने हर रोल को जीवंत कर दिया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अविवाहित रहकर अभिनय को ही अपना समर्पित जीवन माना।

एक अद्भुत विरासत

संजीव कुमार का फिल्मी करियर बेहद शानदार रहा। 'खिलौना', 'अंगूर', 'पति पत्नी और वो', 'नया दिन नई रात' और 'देवता' जैसी फिल्मों ने उन्हें अभिनय का उस्ताद साबित किया। उनके निधन के बाद भी उनकी करीब 10 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें 'प्रोफेसर की पड़ोसन' और 'कातिल' जैसी फिल्में शामिल थीं। आज भी उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बहुमुखी (Versatile) अभिनेताओं में गिना जाता है।