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May 05 2026 12:40 am

नेपाल के अड़ियल रुख से बढ़ी टेंशन लिपुलेख को अपना बता रोकी मानसरोवर यात्रा, भारत की कड़ी चेतावनी

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India News Live, Digital Desk: भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्तों में एक बार फिर सीमा विवाद का कड़वा जहर घुलता नजर आ रहा है। नेपाल की सत्ताधारी राजनीति और काठमांडू के मेयर बालेन शाह के ताजा रुख ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। नेपाल ने एक बार फिर लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपना हिस्सा बताते हुए भारत की ओर से बनाई जा रही सड़कों और तीर्थयात्रियों के आवागमन पर आपत्ति दर्ज कराई है। नेपाल के इस आक्रामक रुख को भारत की संप्रभुता के खिलाफ एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

लिपुलेख पर नेपाल का पुराना राग, नई अड़चन विवाद की जड़ में लिपुलेख दर्रा है, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा का सबसे छोटा और सुगम मार्ग माना जाता है। नेपाल सरकार ने दावा किया है कि भारत इस क्षेत्र में नेपाल की अनुमति के बिना निर्माण कार्य कर रहा है। स्थानीय प्रशासन और बालेन शाह जैसे प्रभावशाली नेताओं के बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। दावा किया जा रहा है कि नेपाल इस मार्ग से होने वाली तीर्थयात्रा में प्रशासनिक अड़चनें पैदा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं की आस्था दांव पर लग गई है।

बालेन शाह के बयानों ने बढ़ाई कड़वाहट काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जो अपनी राष्ट्रवादी छवि के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से लिपुलेख को नेपाल का अभिन्न अंग बताया है। उनके समर्थकों द्वारा सीमावर्ती इलाकों में प्रदर्शन और नारेबाजी की खबरें भी सामने आ रही हैं। जानकारों का मानना है कि नेपाल की घरेलू राजनीति में खुद को बड़ा दिखाने के लिए 'भारत विरोधी' कार्ड खेला जा रहा है, जिसका सीधा असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और दशकों पुराने सीमा समझौतों पर पड़ रहा है।

भारत का रुख साफ: 'सीमा पर समझौता नहीं' नई दिल्ली ने नेपाल के इन दावों को पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लिपुलेख और कालापानी का क्षेत्र हमेशा से भारत का हिस्सा रहा है और वहां होने वाला सड़क निर्माण पूरी तरह से भारतीय सीमा के भीतर है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल के इस बदले हुए सुर के पीछे किसी 'तीसरी ताकत' (चीन) का हाथ हो सकता है, जो दक्षिण एशिया में भारत के प्रभाव को कम करना चाहती है।

श्रद्धालुओं के लिए बढ़ी मुश्किलें मानसरोवर यात्रा के सीजन की शुरुआत से ठीक पहले पैदा हुए इस विवाद ने ट्रैवल एजेंसियों और तीर्थयात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। यदि नेपाल अपने बॉर्डर पॉइंट्स पर सख्ती बढ़ाता है, तो यात्रा के रूट में बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल, भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन नेपाल की ओर से आ रहे भड़काऊ बयान किसी बड़े गतिरोध की ओर इशारा कर रहे हैं।