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July 08 2026 12:28 am

ट्रंप के दावों पर तालिबान का तीखा तंज: 'डोनाल्ड ट्रंप को अब सिर्फ सपनों में ही नसीब होगा बगराम एयरबेस'

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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के एक शीर्ष मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य महत्वाकांक्षाओं का सरेआम मजाक उड़ाया। यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिका की उस हालिया मांग और दावों के बाद आई है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप बार-बार अफगानिस्तान के ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'बगराम एयरबेस' पर दोबारा अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करने की वकालत कर रहे हैं। तालिबान सरकार के कार्यवाहक सूचना और संस्कृति मंत्री मुहाजिर फराही ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिकी सेना का यह पुराना गढ़ अब हमेशा के लिए वाशिंगटन की पहुंच से बाहर हो चुका है और ट्रंप इस सैन्य ठिकाने को वापस पाने का ख्याल केवल अपने सपनों में ही देख सकते हैं।

चीन को घेरने का अमेरिकी प्लान और बगराम एयरबेस का रणनीतिक महत्व

बगराम एयरबेस का इतिहास और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे पूरी दुनिया में सबसे संवेदनशील सैन्य अड्डों में से एक बनाती है। काबुल के उत्तर में स्थित इस विशाल एयरबेस को मूल रूप से शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ (रूस) द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया था। इसके बाद, 11 सितंबर 2001 (9/11) को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने इसे अपना मुख्य रणनीतिक हब बनाया और दो दशकों तक यहीं से पूरे क्षेत्र में सैन्य ऑपरेशनों को संचालित किया।

अगस्त 2021 में जब अमेरिकी फौजें अचानक अफगानिस्तान छोड़कर जाने लगीं, तब तालिबान ने इस अभेद्य किले पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपनी रैलियों और बयानों में इस बेस को वापस छीनने की बात करते रहे हैं। ट्रंप का मुख्य भू-राजनीतिक तर्क यह है कि बगराम एयरबेस की सीमाएं चीन के बेहद नजदीक हैं, जो बीजिंग की बढ़ती सैन्य ताकत पर नजर रखने और उसे काउंटर करने के लिए अमेरिका के पास सबसे अचूक हथियार था।

सीमा पार तनातनी: तालिबान ने पाकिस्तान सेना को दी नेस्तनाबूद करने की चेतावनी

अमेरिका को आईना दिखाने के साथ-साथ तालिबान सरकार ने अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी बेहद कड़े और आक्रामक लहजे में चेतावनी जारी की है। मंत्री मुहाजिर फराही ने साफ किया कि अफगानिस्तान अपनी भौगोलिक अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ होने वाले किसी भी बाहरी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। हालिया खुफिया और ग्राउंड रिपोर्टों के अनुसार, डूरंड रेखा के पास पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सैन्य तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

हाल ही में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफगान सीमा के भीतर किए गए कथित हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 38 बेगुनाह नागरिकों की मौत हो गई थी, जबकि 163 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हालांकि, इस्लामाबाद प्रशासन ने इन नागरिक मौतों के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने केवल सीमा पार सक्रिय आतंकी ठिकानों को सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए निशाना बनाया है, जिसमें 29 लड़ाके मारे गए हैं। इस पर पलटवार करते हुए तालिबान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को पहले भी अग्रिम चौकियों पर करारा जवाब दिया गया है और आगे भी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

संप्रभुता का ऐलान: बाहरी दबावों को ठुकराकर भारत से दोस्ती और व्यापार बढ़ाने की हुंकार

पाकिस्तान के साथ जारी इस भीषण सीमा विवाद के बीच, तालिबान सरकार ने नई दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बहुत बड़ा और सकारात्मक नीतिगत बयान जारी किया है। विदेशी दखलंदाजी पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सूचना मंत्री फराही ने स्पष्ट किया कि काबुल की नई विदेश नीति पूरी तरह आत्मनिर्भर है और यह केवल और केवल अफगानिस्तान के सर्वोच्च राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही है।

उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। तालिबानी नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय महाशक्तियों को दोटूक संदेश देते हुए कहा कि कोई भी बाहरी मुल्क या एजेंडा हमें यह निर्देश नहीं दे सकता कि हमें किस देश से दोस्ती रखनी चाहिए और किससे नहीं। अफगानिस्तान वर्तमान में भारत के साथ अपने कूटनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए बड़े पैमाने पर व्यापारिक और व्यावसायिक समझौतों को आगे बढ़ाने का इच्छुक है।