Suneel Lodhi Viral Singer: ट्रेनों में गाकर पेट भरने वाले दृष्टिहीन गायक सुनील लोधी की बदली किस्मत

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कहा जाता है कि जब इंसान के सारे सांसारिक दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब ईश्वर की कृपा का एक ऐसा अदृश्य द्वार खुलता है जो पूरी दुनिया को हैरान कर देता है। कला और संगीत किसी सुख-सुविधा, बड़ी डिग्रियों या शारीरिक परिपूर्णता के मोहताज नहीं होते; यह सीधे अंतरात्मा और रूह से फूटने वाला ईश्वरीय वरदान है। इस बात को अक्षरशः सच साबित कर दिखाया है बुंदेलखंड की माटी से ताल्लुक रखने वाले जन्मजात दृष्टिहीन लोकगायक सुनील लोधी ने। जो सुनील कल तक अपने हाथ में लकड़ी का पुराना तंबूरा थामकर ट्रेनों की जनरल बोगियों, गांव की चौपालों, संकरी गलियों और स्थानीय मेलों में दो वक्त की रोटी के लिए पारंपरिक भजन गाया करते थे, आज उनकी रूहानी और खनकती आवाज पूरे देश के सिनेमाघरों और सोशल मीडिया पर गूंज रही है। उनका गाया पारंपरिक हनुमान भजन "मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई..." इस समय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब पर सबसे बड़ा म्यूजिकल सेंसेशन बन चुका है। अंधेरे में डूबी जिंदगी से निकलकर करोड़ों दिलों पर राज करने का सुनील लोधी का यह सफर हर उस इंसान के लिए एक जीती-जागती मिसाल है जो मुश्किल हालातों के आगे घुटने टेक देता है।

बचपन से दृष्टिहीन, न कोई संगीत की डिग्री और न गॉडफादर: जानिए कौन हैं सुनील लोधी

सुनील लोधी का जन्म मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित बुंदेलखंड के एक बेहद साधारण और विपन्न ग्रामीण परिवार में हुआ था। जन्म से ही नेत्रहीन (दृष्टिबाधित) होने के कारण उनका बचपन आम बच्चों की तरह आसान नहीं रहा। आंखों में रोशनी न होने और परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति के चलते वे किसी बड़े संगीत विद्यालय या एकेडमी में जाकर शास्त्रीय संगीत की औपचारिक तालीम हासिल नहीं कर सके।

किंतु कुदरत ने आंखों की रोशनी छीनने के बदले उनके गले में मां सरस्वती का ऐसा अलौकिक वास दिया था कि जो भी उनकी आवाज सुनता, वह मंत्रमुग्ध रह जाता। सुनील ने अपने क्षेत्र के बुजुर्गों, स्थानीय फकीरों और लोक गायकों को सुनकर बुंदेली लोकगीतों और पारंपरिक भजनों की बारीकियों को आत्मसात किया। हाथ में तंबूरा (एकतारा) और खड़ताल लेकर वे गांव-गांव घूमते और लोकल ट्रेनों में सफर करते हुए यात्रियों को भजन सुनाकर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। बिना किसी आधुनिक वाद्ययंत्र और ऑटो-ट्यून के, उनकी शुद्ध, खुरदरी और दिल को चीर देने वाली आवाज ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।

'मोरे संकट के कटैया' से पलटी किस्मत: जब सोशल मीडिया पर गूंजी रूहानी आवाज

सुनील लोधी की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब स्थानीय स्तर पर गाते हुए किसी राहगीर ने उनका एक वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। उस वीडियो में सुनील पूरे भक्ति भाव और समर्पण के साथ बुंदेली बोली में हनुमान जी का प्रसिद्ध लोक भजन 'ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान' गा रहे थे।

बिना किसी साज-सज्जा के गाए गए इस भजन में दर्द, आस्था और निष्कपट भक्ति का ऐसा अद्भुत संगम था कि वह वीडियो देखते ही देखते इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया। उस क्लिप को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 2.9 करोड़ (29 मिलियन) से भी अधिक बार देखा गया और लाखों लोगों ने इसे शेयर किया। लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े कि कैसे एक दृष्टिहीन युवा इतने गहरे समर्पण के साथ संकटमोचन की आराधना कर रहा है।

म्यूजिक प्रोड्यूसर पंकज VRK की नजर और मुंबई के स्टूडियो में 8 गानों की रिकॉर्डिंग

वायरल वीडियो की यह गूंज जाने-माने म्यूजिक प्रोड्यूसर और संगीतकार पंकज वीआरके (Pankaj VRK) के कानों तक पहुंची। पंकज वीआरके सुनील की प्राकृतिक गायकी, उनके सुरों के ठहराव और आवाज के भारीपन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत सुनील का पता लगवाया।

पंकज ने बुंदेलखंड के उस सुदूर गांव से सुनील लोधी को ढूंढ़ निकाला और उन्हें सीधे इंदौर से देश की मायानगरी मुंबई स्थित प्रतिष्ठित 'साईं बाबा रिकॉर्डिंग स्टूडियो' में आमंत्रित किया। यह सुनील के जीवन का पहला ऐसा पल था जब वे किसी बड़े प्रोफेशनल रिकॉर्डिंग स्टूडियो में माइक के सामने खड़े हुए थे। स्टूडियो में सुनील ने अपनी सुरीली आवाज में लगातार 8 पारंपरिक भक्ति गीतों को रिकॉर्ड किया। उस समय खुद सुनील को भी इस बात का जरा सा भी इल्म नहीं था कि उनकी यह आवाज बहुत जल्द भारतीय सिनेमा के एक बड़े प्रोजेक्ट की आत्मा बनने वाली है।

2 करोड़ के बजट वाली फिल्म 'हनुमान अंश' बनी ब्लॉकबस्टर: थिएटर्स में गूंजा 'मैंने तेरे ही भरोसे'

हाल ही में विश्व विख्यात आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा के जीवन दर्शन और हनुमान भक्ति पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' (Hanuman Ansh) सिनेमाघरों में रिलीज हुई। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट की इस फिल्म के आधिकारिक साउंडट्रैक (OST) में सुनील लोधी का गाया भजन "मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई" शामिल किया गया।

जैसे ही बड़े पर्दे पर यह भजन बजा, सिनेमाघरों में बैठे दर्शकों के रोंगटे खड़े हो गए। फिल्म के सबसे भावुक और प्रेरणादायक दृश्य में जब सुनील की आवाज में यह पंक्तियां गूंजती हैं—

"राम नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार...

ओ रामा ज्ञान की लगा दी जंजीर, सागर में नैया डाल दई...

सीता मैया बैठनहारी, लक्ष्मण खेवनहार...

मोरे बालाजी लगावे बेड़ा पार, सागर में नैया डाल दई..."

तो पूरा हॉल तालियों और जयकारों से गूंज उठता है। इस भजन की लोकप्रियता ने फिल्म के प्रमोशन में संजीवनी बूटी का काम किया। तीसरे हफ्ते तक बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत करने वाली फिल्म ने इस भजन के वायरल होते ही ऐसी तूफानी रफ्तार पकड़ी कि इसने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 46 करोड़ रुपये से अधिक की ऐतिहासिक कमाई कर डाली।

सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स और देश-विदेश से मिल रहा असीम प्यार

फिल्म की ब्लॉकबस्टर सफलता के साथ ही सुनील लोधी अब गुमनाम ट्रेन गायक नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले लोक कलाकार बन चुके हैं। सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स की संख्या रातों-रात बढ़कर 1 लाख 35 हजार से अधिक पहुंच चुकी है।

उनके अन्य भक्ति गीत जैसे 'सीताराम गाइये', 'दरस देदो रघुनंदन', 'मेरे भोले जी कर दो नजर' और किसानों के संघर्ष पर बना लोकगीत 'कर-कर के मर गए किसानी' भी अब म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स (स्पॉटिफाइ, एप्पल म्यूजिक, विंक और यूट्यूब म्यूजिक) पर टॉप ट्रेंडिंग लिस्ट में शामिल हो चुके हैं। देश के बड़े-बड़े संगीतकार, यूट्यूबर्स और आध्यात्मिक हस्तियां सुनील के हुनर को नमन कर रही हैं और उन्हें लाइव कॉन्सर्ट्स व आयोजनों के लिए आमंत्रित कर रही हैं।

आस्था, संघर्ष और प्रतिभा की अमर विजय: अभावों से ऊपर है ईश्वर का आशीर्वाद

सुनील लोधी की यह सफलता गाथा यह सिद्ध करती है कि यदि आपके पास सच्ची प्रतिभा, निष्कपट हृदय और ईश्वर पर अटूट भरोसा है, तो भौतिक अभाव और शारीरिक अक्षमताएं आपकी राह का रोड़ा कभी नहीं बन सकतीं। जिस ट्रेन की बोगियों में सुनील कभी चंद सिक्कों के लिए गाते थे, आज उसी भारतीय रेलवे के करोड़ों यात्री अपने मोबाइल और हेडफोन पर सुनील की आवाज में 'मैंने तेरे ही भरोसे' सुनकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं।

सुनील लोधी ने अपनी आवाज से न केवल बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और सनातन भक्ति परंपरा को वैश्विक पटल पर गौरवान्वित किया है, बल्कि उन सभी दिव्यांग और वंचित कलाकारों को एक नया हौसला दिया है जो अंधेरों में भी अपनी मंजिल तलाशने का साहस रखते हैं।