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November 01 2026 07:21 am

Special on Bade Mangal : कब और कैसे मिली हनुमान जी को दिव्य गदा?

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India News Live,Digital Desk : ज्येष्ठ मास के मंगलवारों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इसी पवित्र माह के एक मंगलवार को प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की पहली बार भेंट हुई थी। तभी से इस दिन को बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाने लगा। इस दिन प्रभु श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान जी की विशेष पूजा और व्रत का विधान है।

मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजन करता है, उसे जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

अब सवाल ये उठता है कि हनुमान जी के हाथ में जो शक्तिशाली गदा है, वो उन्हें किसने दी?

गदा कैसे प्राप्त हुई?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, बाल अवस्था में ही हनुमान जी अतिशय शक्तिशाली थे। एक बार उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की, जिससे संसार में अंधकार छा गया। इस घटना से सभी देवता उनकी शक्ति से परिचित हो गए।

तब देवताओं ने उन्हें अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र उपहारस्वरूप दिए। इन्हीं में से एक दिव्य गदा उन्हें धन के देवता कुबेर ने भेंट की थी। कुबेर ने यह भी आशीर्वाद दिया कि युद्ध में इस गदा के प्रयोग से उन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस गदा को कौमोदकी गदा भी कहा जाता है और हनुमान जी इसे अपने बाएं हाथ में धारण करते हैं।

गदा की विशेषताएं और प्रतीकात्मकता

हनुमान जी की गदा सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि शक्ति, साहस और संघर्ष का प्रतीक है। इस गदा की सहायता से उन्होंने राक्षसों का विनाश किया और लंका में रावण के महल और अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया।

हनुमान जी की यह गदा हमें सिखाती है कि जीवन में आने वाली हर चुनौती का मुकाबला साहस और आत्मबल से करना चाहिए। हनुमान चालीसा में भी इस गदा का उल्लेख मिलता है, जो इसके महत्व को दर्शाता है।