'SIR से 10 करोड़ नागरिक वोटिंग अधिकार से होंगे वंचित', पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के पोस्ट पर चिदंबरम का बड़ा दावा
भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम का एक बड़ा बयान सामने आया है। पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि SIR प्रक्रिया के चलते देश की लगभग 10 प्रतिशत वयस्क आबादी—यानी करीब 10 करोड़ लोग—वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के अनुभव से उठा मुद्दा
कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मिस्र और यूएई में भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने पंजाब में इस प्रक्रिया के दौरान नागरिकता साबित करने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को सार्वजनिक किया था। पूर्व राजनयिक सूरी के अनुसार, अधिकारियों ने उन्हें नागरिकता के प्रमाण के रूप में अपना पासपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें नोटिस लेकर ऐसे दस्तावेज दिखाने को कहा गया जो यह साबित करें कि वे भारतीय नागरिक हैं, जबकि उनके पास वोटर आईडी और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज पहले से मौजूद हैं।
पूर्व राजनयिक ने सवाल उठाया कि यदि तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने में इतनी परेशानी आ रही है, तो आम नागरिक का क्या हाल होगा।
10% नागरिकों के पास नहीं होगा मतदान का अधिकार
पूर्व राजनयिक की इस सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब तक के परिणामों के आधार पर, SIR प्रक्रिया के अंत में भारत की 10% वयस्क आबादी 'नागरिक' तो रहेगी, लेकिन चुनाव आयोग की इस व्यवस्था के कारण उनके पास मतदान का अधिकार नहीं होगा।