जन्माष्टमी पर चांदी की कीमतों में आई गिरावट: दिल्ली से लेकर यूपी, बिहार और मुंबई तक गिरे दाम
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जहां देश भर के बाजारों में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप 'लड्डू गोपाल' के जन्मोत्सव को लेकर रौनक चरम पर है, वहीं आभूषण प्रेमियों, छोटे निवेशकों और श्रद्धालुओं के लिए सर्राफा बाजार से एक राहत भरी खबर आई है। आमतौर पर किसी भी प्रमुख भारतीय त्योहार पर जब आभूषणों, चांदी के सिक्कों और बर्तनों की मांग में जोरदार उछाल आता है, तो कीमती धातुओं के दाम तेजी से भागने लगते हैं। लेकिन जन्माष्टमी के दिन बाजार का रुख सामान्य धारणा के बिल्कुल उलट नजर आया।
घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा कारोबार (MCX) दोनों ही मोर्चों पर चांदी की कीमतों में सुस्ती और गिरावट का रुख देखने को मिला। राष्ट्रीय स्तर पर चांदी का भाव फिसलकर लगभग 2,36,020 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करता नजर आया। इस नरमी से उन भक्तों और परिवारों को सीधी राहत मिली है जो कान्हा के लिए चांदी के झूले, बांसुरी, मुकुट, चरण पादुकाएं या फिर आगामी त्योहारी व वैवाहिक सीजन के लिए चांदी के सिक्के और जेवरात खरीदने की तैयारी कर रहे थे।
देश के प्रमुख शहरों में आज का चांदी का भाव: जानिए दिल्ली, यूपी, बिहार और मुंबई के ताजा रेट
स्थानीय सर्राफा संघों और हाजिर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों और महानगरों में चांदी की कीमतों में प्रति किलोग्राम 50 रुपये से लेकर लगभग 300 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है:
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली: दिल्ली के थोक व खुदरा सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में लगभग 52 रुपये की हल्की नरमी दर्ज की गई, जिससे भाव 2.36 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। खुदरा काउंटर पर 10 ग्राम चांदी का भाव 2,360 रुपये और 100 ग्राम चांदी का भाव 23,600 रुपये के आसपास देखा गया।
उत्तर प्रदेश (लखनऊ व कानपुर): यूपी की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर में चांदी की कीमतों में करीब 200 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई, जिसके बाद यहां चांदी का भाव लगभग 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा है।
बिहार (पटना): बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक बाकरगंज सर्राफा बाजार में चांदी की दरों में 273 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते भाव 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया।
राजस्थान (जयपुर): जेवरात और चांदी की कलाकृतियों के बड़े केंद्र जयपुर में चांदी 225 रुपये सस्ती होकर 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर दर्ज की गई।
महाराष्ट्र (मुंबई): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के जवेरी बाजार में चांदी के दाम लगभग 222 रुपये कमजोर होकर 2.36 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गए।
(नोट: सर्राफा बाजार के इन प्राथमिक भावों में 3 प्रतिशत जीएसटी (GST), स्थानीय परिवहन उपकर और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं; शोरूम में अंतिम बिलिंग के वक्त ये शुल्क अलग से जोड़े जाते हैं।)
त्योहार के दिन क्यों सस्ती हुई चांदी? जानिए इसके पीछे के 4 बड़े कारण
त्योहारी मांग के बावजूद चांदी के भाव में आई इस नरमी ने आम खरीदारों के साथ-साथ खुदरा कारोबारियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। कमोडिटी बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि चांदी केवल एक पारंपरिक कीमती धातु (Precious Metal) नहीं है, बल्कि यह एक प्रमुख औद्योगिक धातु (Industrial Metal) भी है। इसलिए इसके भाव केवल घरेलू त्योहारों की खरीदारी से तय नहीं होते, बल्कि वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतों से सीधे प्रभावित होते हैं। इस गिरावट के पीछे निम्नलिखित चार प्रमुख कारण सामने आए हैं:
1. हालिया तेज उछाल के बाद मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मुनाफावसूली
जन्माष्टमी से ठीक पहले के तीन कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में लगभग 9,000 रुपये प्रति किलोग्राम की जोरदार तेजी देखी गई थी। घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जब भी किसी कमोडिटी में इतनी तीव्र बढ़त आती है, तो बड़े संस्थागत निवेशक, हेज फंड्स और सटोरिये ऊंचे स्तरों पर अपना मुनाफा सुरक्षित करने (Profit-Taking) के लिए बिकवाली शुरू कर देते हैं। गुरुवार को सोने और चांदी में आई तेज मजबूती के बाद शुक्रवार की सुबह निवेशकों ने मुनाफा काटना शुरू किया, जिससे वायदा बाजार में बिकवाली का दबाव बना और उसका सीधा असर हाजिर बाजार के भावों पर पड़ा।
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें और अमेरिकी जॉब्स डेटा का डर
वैश्विक बुलियन मार्केट की दिशा काफी हद तक अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) की मौद्रिक नीतियों से संचालित होती है। आगामी फेड बैठक से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक सतर्कता का माहौल है। निवेशक इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि ब्याज दरों में कटौती किस गति से होगी। इसके अलावा, बाजार की निगाहें अमेरिका से आने वाले गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों (US Non-Farm Payrolls Data) पर टिकी हुई हैं। महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने से पहले बड़े कमोडिटी ट्रेडर्स नए सौदे करने से बचते हैं और अपनी मौजूदा पोजीशन हल्की करते हैं, जिससे धातुओं की कीमतों में ठहराव या हल्की गिरावट आ जाती है।
3. मजबूत अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का दोहरा असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से चांदी जैसी संपत्तियों पर दबाव बढ़ जाता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर धातुओं की कीमत डॉलर में तय होती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो गैर-अमेरिकी देशों के खरीदारों के लिए धातु खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग धीमी हो जाती है। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर आकर्षित हुए, जिससे कीमती धातुओं को मिलने वाला तात्कालिक सहारा कुछ हद तक कमजोर हुआ।
4. औद्योगिक मांग में सुस्ती और रिफाइनर्स के पास इन्वेंट्री का दबाव
चांदी की कुल वैश्विक मांग का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा औद्योगिक उपयोग—विशेष रूप से सोलर पैनल्स (फोटोवोल्टाइक सेल्स), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरीज, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण—से आता है। चीन और अन्य प्रमुख वैश्विक विनिर्माण केंद्रों में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार सुस्त रहने के कारण चांदी की तत्काल औद्योगिक खपत पर थोड़ा असर पड़ा है। वहीं भारतीय बाजार के लिहाज से देखें तो घरेलू रिफाइनर्स और बड़े डीलर्स ने त्योहारी सीजन की तैयारी के लिए पहले से ही पर्याप्त मात्रा में चांदी का स्टॉक और आयात ऑर्डर बुक कर रखा है। बाजार में सप्लाई की कोई कमी न होने के कारण त्योहार के दिन भी कीमतों में कृत्रिम तेजी नहीं बन पाई।
सर्राफा बाजारों में लड्डू गोपाल के आभूषणों और चांदी के बर्तनों की खरीदारी तेज
दामों में आई इस नरमी का सीधा लाभ खुदरा उपभोक्ताओं को मिलता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और लखनऊ के अमीनाबाद, तथा बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर और गया के बाजारों में सुबह से ही ग्राहकों की खासी आवाजाही दर्ज की गई।
जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु विशेष रूप से 5 ग्राम से लेकर 50 ग्राम तक के छोटे चांदी के सिक्के, लड्डू गोपाल के लिए चांदी की छोटी कटोरी-चम्मच, सिंहासन, बांसुरी और झूले खरीदते हैं। प्रति किलोग्राम 200 से 270 रुपये की यह गिरावट भले ही बहुत बड़ी न लगे, लेकिन हालिया दिनों में 9,000 रुपये की तेज बढ़त के बाद आई यह रुकावट खरीदारों के बजट को संतुलित रखने में मदद कर रही है। ज्वेलर्स का अनुमान है कि शाम तक मंदिरों और घरों में पूजा का समय नजदीक आने के साथ ही चांदी के सिक्कों और गिफ्ट आइटम्स की बिक्री का आंकड़ा और मजबूत होगा।
क्या चांदी खरीदने का यह सही मौका है? एक्सपर्ट्स की राय और जरूरी सावधानियां
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट तात्कालिक और तकनीकी करेक्शन का हिस्सा है। लंबी अवधि के बुनियादी ढांचों—जैसे ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग—को देखते हुए वैश्विक स्तर पर चांदी की आपूर्ति में लगातार घाटा (Supply Deficit) बना हुआ है। ऐसे में आगामी धनतेरस, दिवाली और शादी-ब्याह के सीजन को ध्यान में रखते हुए किसी भी छोटी गिरावट को खरीदारी (Buy on Dips) के अच्छे मौके के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, त्योहार की हड़बड़ी में चांदी की खरीदारी करते समय आम उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है।
हमेशा बीआईएस हॉलमार्क (BIS Hallmark) वाली प्रमाणित चांदी ही खरीदें। चांदी के आभूषणों और बर्तनों पर आमतौर पर '925' (स्टर्लिंग सिल्वर - 92.5% शुद्धता) का मार्क देखा जाता है, जबकि शुद्ध चांदी के सिक्कों और सिल्लियों पर '999' की मार्किंग होती है।
खरीदारी के समय दुकानदार से पक्का कंप्यूटराइज्ड बिल अवश्य लें, जिसमें चांदी का शुद्ध वजन, प्रति ग्राम रेट और अलग से लगाया गया मेकिंग चार्ज साफ-साफ दर्ज हो।
अशुद्ध या मिलावटी चांदी से बचने के लिए किसी भी सड़क किनारे की दुकान या बिना बिल के नकद लेन-देन से बचें।
जन्माष्टमी के दिन सर्राफा बाजार में आई यह सुस्ती उन तमाम श्रद्धालुओं के लिए एक सुखद मौका बनकर आई है जो कान्हा के जन्मोत्सव को चांदी की चमक के साथ और अधिक दिव्य बनाना चाहते हैं।