Sidharth Malhotra The One: बिहार के इस रहस्यमयी और सदियों पुराने मंदिर पर आधारित है सिद्धार्थ मल्होत्रा की 'द वन'

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भारतीय सिनेमा में इन दिनों लोककथाओं, प्राचीन सनातन मान्यताओं, तंत्र विद्या और माइथोलॉजिकल-थ्रिलर जॉनर का ऐसा सुनहरा दौर चल रहा है जिसे दर्शक हाथों-हाथ ले रहे हैं। 'कांतारा', 'मुंजा' और 'ब्रह्मास्त्र' जैसी फिल्मों की अपार सफलता के बाद बॉलीवुड के हैंडसम हंक और बहुमुखी अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा अब तक के अपने सबसे बड़े, अनोखे और रोंगटे खड़े कर देने वाले प्रोजेक्ट के साथ पर्दे पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। निर्देशक दीपक मिश्रा और एकता कपूर के प्रोडक्शन में बनने जा रही हाई-ऑक्टेन लोक-रहस्य थ्रिलर फिल्म 'द वन' (The One) को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरे मनोरंजन जगत और इतिहास प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फिल्म से जुड़े करीबी सूत्रों और प्रोडक्शन टीम के अनुसार, इस फिल्म की मूल कहानी और इसका पूरा रहस्यमयी ताना-बाना किसी काल्पनिक कथा पर नहीं, बल्कि बिहार के ऐतिहासिक और सदियों पुराने एक ऐसे रहस्यमयी मंदिर की सच्ची मान्यताओं और लोक-कथाओं पर आधारित है, जिसके कपाट सूर्यास्त होते ही हमेशा के लिए बंद कर दिए जाते हैं और रात के अंधेरे में वहां किसी भी इंसान या मुख्य पुजारी के रुकने पर सख्त पाबंदी होती है।

सूर्यास्त के बाद क्यों थर्रा उठता है मंदिर का परिसर? पुजारियों के भी रुकने पर है सख्त पाबंदी

बिहार की धरती सदियों से आध्यात्मिकता, ज्ञान, तंत्र-साधना और अलौकिक शक्तियों का केंद्र रही है। राज्य के कैमूर-बक्सर क्षेत्र के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर (जिसकी मान्यताएं मां त्रिपुर सुंदरी और मुंडेश्वरी देवी के तांत्रिक स्वरूपों से जुड़ी हैं) अपने अनसुलझे रहस्यों के लिए दुनिया भर के शोधकर्ताओं और पैरानॉर्मल एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। इस मंदिर की सबसे चौंकाने वाली और डरावनी परंपरा यह है कि जैसे ही शाम को सूर्य की अंतिम किरण ढलती है, मंदिर के गर्भगृह में विशेष आरती करके मुख्य द्वार पर भारी ताले जड़ दिए जाते हैं।

पुजारी और सेवादार बिना एक पल भी गंवाए मंदिर की चारदीवारी से कई किलोमीटर दूर चले जाते हैं। स्थानीय मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, रात के समय इस मंदिर के परिसर में साक्षात अदृश्य और पराशक्तियां (Divine and Occult Energies) विचरण करती हैं। जो कोई भी रात के समय इस मंदिर परिसर में रुकने या इसके गर्भगृह में झांकने का दुस्साहस करता है, वह या तो अपनी मानसिक संतुलन खो बैठता है या फिर किसी भयानक दैवीय प्रकोप का शिकार हो जाता है। यही वह खौफनाक और जादुई वातावरण है जिसे फिल्म 'द वन' का केंद्रीय आधार बनाया गया है।

तंत्र साधना, तांत्रिक शक्तियां और रात के सन्नाटे में होने वाली रहस्यमयी ध्वनियों का सच

इस मंदिर के इतिहास की जड़ें हजारों साल पुराने तांत्रिक अनुष्ठानों और गुप्त सिद्धियों से जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि प्राचीन काल में अघोरी और महान तांत्रिक इस गुप्त स्थान पर दुर्लभ सिद्धियां प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करते थे। मंदिर के पत्थरों, स्तंभों और मूर्तियों पर ऐसी प्राचीन पांडुलिपियां और तांत्रिक चक्र उकेरे गए हैं जिन्हें आज के आधुनिक वैज्ञानिक भी पूरी तरह डिकोड नहीं कर पाए हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और वैज्ञानिकों के दलों ने भी कई बार यह दावा किया है कि रात के 12 बजे के बाद मंदिर के बंद गर्भगृह से घंटों की आवाजें, मंत्रोच्चार की गूंज और पायल की खनक स्पष्ट सुनाई देती है, जबकि अंदर परिंदा भी पर नहीं मार सकता। वैज्ञानिकों का एक वर्ग इसे विशेष चुंबकीय तरंगों और पत्थरों की बनावट से निकलने वाली फ्रीक्वेंसी मानता है, जबकि करोड़ों भक्तों के लिए यह मां भगवती और उनके गुप्त गणों की साक्षात उपस्थिति का प्रमाण है। फिल्म की पटकथा में इन सभी वास्तविक वैज्ञानिक तर्कों और आध्यात्मिक मान्यताओं के बीच के द्वंद्व को बेहद बारीकी से पिरोया गया है।

'द वन' में सिद्धार्थ मल्होत्रा का सबसे खतरनाक और इंटेंस अवतार: रोंगटे खड़े कर देगी कहानी

'शेरशाह' और 'योद्धा' जैसी फिल्मों में एक वीर फौजी का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीतने वाले सिद्धार्थ मल्होत्रा फिल्म 'द वन' में एक बिल्कुल अनदेखे और चुनौतीपूर्ण अवतार में नजर आएंगे। फिल्म में सिद्धार्थ एक ऐसे आधुनिक आर्कियोलॉजिस्ट (पुरातत्वविद) और खोजी अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं जो बिहार के इस प्रतिबंधित मंदिर से जुड़े एक सदियों पुराने रहस्य, लापता हुए शोधकर्ताओं के दल और वहां छिपी एक अलौकिक शक्ति की खोज में निकलता है।

सिद्धार्थ का किरदार विज्ञान और तर्कों पर भरोसा करने वाला एक निडर युवक है, जो इन प्राचीन मान्यताओं को केवल अंधविश्वास मानता है। किंतु जब वह रात के सन्नाटे में उस मंदिर के निषिद्ध क्षेत्र में कदम रखता है, तो उसका सामना उन अदृश्य ताकतों और प्राचीन शक्तियों से होता है जो उसकी सोच की सीमाओं से परे हैं। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा के किरदार का शारीरिक और मानसिक परिवर्तन दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देगा। इस भूमिका के लिए सिद्धार्थ ने मार्शल आर्ट्स, प्राचीन हथियारों के संचालन और इंटेंस एक्सप्रेशंस की विशेष ट्रेनिंग ली है।

बिहार की समृद्ध लोककथाओं और आस्था को हॉलीवुड-लेवल सिनेमैटोग्राफी के साथ पेश करने की तैयारी

बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर दक्षिण भारत या पश्चिमी देशों की लोककथाओं को प्राथमिकता दी जाती रही है, किंतु 'द वन' के जरिए पहली बार बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, लोक संस्कृति, मैथिली-भोजपुरी अंचल के प्राचीन तांत्रिक इतिहास और भव्य पौराणिक गाथाओं को 70 एमएम के विशालकाय पर्दे पर पेश किया जा रहा है।

मेकर्स ने इस फिल्म को विजुअली भव्य बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वीएफएक्स स्टूडियोज और हॉलीवुड के तकनीशियनों के साथ हाथ मिलाया है। फिल्म की शूटिंग बिहार के वास्तविक ऐतिहासिक स्थलों, कैमूर की पहाड़ियों, रोहतास के जंगलों और मुंबई में बनाए गए एक विशालकाय मंदिर के रियलिस्टिक सेट्स पर की जा रही है। घने कोहरे, मशालों की रोशनी, प्राचीन मूर्तियों के नक्काशीदार चेहरों और डार्क नियॉन शेड्स के साथ फिल्माए जा रहे सीन्स दर्शकों को 'तुंबाड' और 'कांतारा' जैसा एक अलौकिक और जादुई अनुभव प्रदान करेंगे। इसके साथ ही फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों, शंखनाद और वैदिक मंत्रों के फ्यूजन से तैयार किया जा रहा है जो थिएटर्स में सिहरन पैदा कर देगा।

माइथोलॉजिकल-थ्रिलर जॉनर में 'द वन' रचेगी नया इतिहास: रिलीज को लेकर दर्शकों में भारी उत्सुकता

भारतीय दर्शक अब घिसे-पिटे पारिवारिक ड्रामों और सतही एक्शन फिल्मों से आगे बढ़कर अपनी जड़ों, सनातन संस्कृति और रहस्यों से भरे इतिहास को सिनेमाई पर्दे पर देखना चाहते हैं। यही कारण है कि 'द वन' की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर इसके प्रति दीवानगी देखने को मिल रही है।

सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ इस फिल्म में दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक शीर्ष अभिनेत्री और कई दिग्गज थियेटर कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म के निर्माताओं का लक्ष्य इसे न केवल हिंदी में, बल्कि तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम सहित कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में पैन-इंडिया और ग्लोबल स्तर पर रिलीज करना है।

बिहार के उस सदियों पुराने मंदिर का यह खौफनाक और पावन रहस्य जब सिद्धार्थ मल्होत्रा की दमदार अदाकारी और भव्य वीएफएक्स के साथ बड़े पर्दे पर खुलेगा, तो यह फिल्म न केवल भारतीय सिनेमा के बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचेगी, बल्कि दुनिया भर को भारत के इस अनसुलझे रहस्य से रूबरू कराएगी।